मुर्शिदाबाद: पश्चिम बंगाल के रिजिनगर विधानसभा उपचुनाव में मतदान समाप्त होने के बाद आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख और नाओदा के विधायक हुमायूं कबीर के भावुक बयानों ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। मतदान के दिन पुलिस के साथ विवाद के बाद हिरासत में लिए गए हुमायूं कबीर रिहाई के बाद मीडिया के सामने भावुक नजर आए। उन्होंने सक्रिय चुनावी राजनीति से दूर होने के संकेत दिए और इसके साथ ही अपने बेटे तथा रिजिनगर से पार्टी उम्मीदवार गोलाम नबी आजाद की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
रिजिनगर विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव हुआ। यह सीट उस समय खाली हुई थी, जब 2026 के विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर ने रिजिनगर और नाओदा, दोनों सीटों से जीत दर्ज करने के बाद नाओदा सीट को अपने पास रखा। इसके बाद आम जनता उन्नयन पार्टी ने रिजिनगर से उनके बेटे गोलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया। उपचुनाव का परिणाम 9 अक्टूबर को घोषित होना है।
मतदान के दिन पुलिस से भिड़े थे हुमायूं कबीर
6 अक्टूबर को मतदान के दौरान रिजिनगर में तनाव की स्थिति तब बनी, जब हुमायूं कबीर का पुलिसकर्मियों के साथ विवाद हो गया। हुमायूं ने पुलिस पर मतदान प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने और मतदाताओं को प्रभावित करने के आरोप लगाए। पुलिस के अनुसार, उनके लगातार बयानों के बाद पुलिसकर्मी पार्टी कार्यालय पहुंचे, जहां कहासुनी के बाद स्थिति बिगड़ गई और उन्हें हिरासत में लिया गया।
रिपोर्टों के अनुसार, हुमायूं कबीर को करीब 12 घंटे बाद रिहा किया गया। रिहाई के अगले दिन जब उन्होंने मीडिया से बातचीत की तो उनका अंदाज बेहद भावुक था। उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से वह निराश हैं और चुनावी राजनीति से दूरी बनाने पर विचार कर रहे हैं।
‘जब तक शुभेंदु मुख्यमंत्री हैं, विधानसभा नहीं जाऊंगा’
रिहाई के बाद हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जब तक शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे, तब तक वह विधानसभा में नहीं जाएंगे। उन्होंने नाओदा की जनता से भी माफी मांगने की बात कही और कहा कि जिस तरह की परिस्थितियां बनी हैं, उससे वह बेहद निराश हैं।
हुमायूं ने रिजिनगर में मतदान को लेकर भी कई आरोप लगाए। उनका कहना था कि मतदान प्रक्रिया के दौरान जिस तरह की स्थिति बनी, उससे वह संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि इन आरोपों पर राजनीतिक विरोधियों और प्रशासन की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
बेटे गोलाम नबी आजाद पर क्यों भड़के हुमायूं?
इसके बाद विवाद सीधे पिता-पुत्र के बीच पहुंच गया। हुमायूं कबीर ने अपने बेटे गोलाम नबी आजाद पर आरोप लगाया कि हिरासत में लिए जाने के बाद उन्होंने बेटे को पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने और संगठन को संभालने के लिए कहा था।
हुमायूं का दावा है कि इसके बजाय उनके बेटे ने कथित तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं से बूथ छोड़कर घर लौटने के लिए कहा। इसी बात को लेकर वह बेहद नाराज हुए। उन्होंने बेटे के इस रवैये को राजनीतिक तौर पर ‘गद्दारी’ तक करार दिया।
हुमायूं ने बेटे को राजनीति से दूर होकर पारिवारिक कारोबार संभालने की सलाह भी दी। उनका कहना था कि पार्टी और कार्यकर्ताओं के लिए जिस तरह संघर्ष किया गया, उस समय उनसे ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी।
बेटे ने पिता को बताया ‘फ्रस्टेटेड’
पिता के आरोपों के बाद गोलाम नबी आजाद ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने पिता की स्थिति को मतदान के दिन हुई घटना से जोड़ते हुए कहा कि पुलिस के साथ विवाद के बाद हुमायूं कबीर मानसिक दबाव और निराशा में हैं।
गोलाम नबी आजाद के अनुसार, चुनाव जीतना महत्वपूर्ण है, लेकिन वह अपने साथ मौजूद किसी व्यक्ति या पार्टी कार्यकर्ता की सुरक्षा को खतरे में डालकर चुनाव नहीं लड़ना चाहते। उन्होंने पिता के आरोपों को भावनात्मक प्रतिक्रिया बताते हुए उन्हें ‘फ्रस्टेटेड’ कहा।
गोलाम नबी आजाद ने मतदान के दिन भी कहा था कि वह ऐसी राजनीति नहीं करना चाहते, जिसमें उनके साथियों या पार्टी समर्थकों को पुलिस कार्रवाई अथवा अन्य नुकसान का सामना करना पड़े।
मुख्यमंत्री पर भी लगाए गंभीर आरोप
हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को लेकर एक और दावा किया। उन्होंने कहा कि मतदान से पहले मुख्यमंत्री ने उनसे मुलाकात के दौरान कथित तौर पर कहा था कि उनके बेटे गोलाम नबी आजाद रिजिनगर में करीब 30 हजार मतों के अंतर से जीतेंगे।
हुमायूं के मुताबिक, उन्होंने इस कथित आश्वासन पर भरोसा किया था, लेकिन अब उन्हें लगता है कि उनके साथ विश्वासघात हुआ है। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि वह खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने हुमायूं कबीर के इस दावे को खारिज किया है और इसे राजनीतिक उद्देश्य से जोड़ा है।
भाजपा उम्मीदवार ने बताया सहानुभूति हासिल करने की कोशिश
रिजिनगर से भाजपा उम्मीदवार शाखारभ सरकार ने हुमायूं कबीर के बयानों पर सवाल उठाया है। उन्होंने इसे जनता की सहानुभूति हासिल करने की कोशिश बताया और आरोप लगाया कि चुनावी परिस्थितियों को देखते हुए हुमायूं अलग-अलग बयान दे रहे हैं।
भाजपा की ओर से हुमायूं कबीर के पुलिस से हुए विवाद और बाद के राजनीतिक बयानों पर भी सवाल उठाए गए हैं। दूसरी ओर हुमायूं लगातार अपने आरोपों पर कायम हैं और उन्होंने मतदान प्रक्रिया को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है।
अब 9 अक्टूबर के परिणाम पर नजर
रिजिनगर उपचुनाव का परिणाम 9 अक्टूबर को सामने आएगा। इस चुनाव में आम जनता उन्नयन पार्टी की ओर से गोलाम नबी आजाद, भाजपा की ओर से शाखारभ सरकार और अन्य दलों के उम्मीदवार मैदान में हैं। ऐसे में परिणाम से पहले ही पिता-पुत्र के बीच खुलकर सामने आया राजनीतिक विवाद चुनावी चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
एक तरफ हुमायूं कबीर सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने के संकेत दे रहे हैं, तो दूसरी ओर उनके बेटे गोलाम नबी आजाद अपने पिता के आरोपों को उनकी भावनात्मक और निराशाजनक स्थिति से जोड़ रहे हैं। अब सभी की निगाहें 9 अक्टूबर की मतगणना पर टिकी हैं। परिणाम यह तय करेगा कि रिजिनगर की जनता ने उपचुनाव में किस उम्मीदवार के पक्ष में अपना जनादेश दिया है और इसके बाद हुमायूं कबीर की राजनीतिक भूमिका किस दिशा में जाती है।




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