नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच बुधवार को नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में इंडिया ब्लॉक की अहम बैठक हुई। करीब तीन घंटे चली इस बैठक में 19 विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक के बाद विपक्षी दलों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर अपनी मांगें सामने रखीं। साथ ही 2 अक्टूबर से देशभर में ‘लोकतंत्र बचाओ’ पदयात्रा और 6 अक्टूबर को चुनाव सदन तक मार्च सहित कई कार्यक्रमों का ऐलान किया गया।
बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वाम दलों, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार गुट, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट समेत कई दलों के नेता शामिल हुए। हालांकि, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और आम आदमी पार्टी बैठक में मौजूद नहीं रहे। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी व्यक्तिगत रूप से बैठक में शामिल नहीं हुए, लेकिन उनकी पार्टी की ओर से प्रतिनिधि मौजूद रहे।
बैलेट पेपर से मतदान की मांग
बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्षी दलों ने ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग रखी है। उनके अनुसार, बैठक में शामिल दलों ने इस मुद्दे पर अपनी सहमति जताई। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में मतदाताओं का भरोसा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है।
बैलेट पेपर की मांग के साथ विपक्ष ने एसआईआर से पहले की मतदाता सूची को आगामी चुनावों का आधार बनाने की मांग भी रखी है। इसके अलावा किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे पर्याप्त सूचना और अपना पक्ष रखने का अवसर देने की मांग की गई है।
मतदाता सूची को लेकर चार प्रमुख मांगें
इंडिया ब्लॉक की बैठक के बाद सामने आई प्रमुख मांगों में एसआईआर से पहले की मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराने की बात शामिल है। विपक्ष ने कहा कि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम हटाने से पहले उसे उचित नोटिस दिया जाना चाहिए, ताकि वह अपना पक्ष रख सके।
विपक्ष ने यह भी मांग की कि प्रशासनिक गलती, दस्तावेजों की कमी या जागरूकता के अभाव में यदि किसी वैध मतदाता का नाम सूची से हट गया है तो उसके लिए कानूनी सुरक्षा और प्रभावी अपील व्यवस्था होनी चाहिए। चौथी प्रमुख मांग ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराने की रही।
2 से 8 अक्टूबर तक ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च
बैठक के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की। उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक देश के अलग-अलग जिलों में ‘लोकतंत्र बचाओ’ पदयात्रा आयोजित की जाएगी। इस दौरान जिलाधिकारियों के कार्यालयों के सामने प्रदर्शन भी किया जाएगा।
इंडिया ब्लॉक की ओर से घोषित कार्यक्रम का अगला बड़ा चरण 6 अक्टूबर को होगा। इस दिन विपक्षी दलों के सांसद चुनाव आयोग के मुख्यालय यानी चुनाव सदन की ओर मार्च करेंगे। इस कार्यक्रम के जरिए एसआईआर, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों को उठाने की तैयारी है।
अक्टूबर-नवंबर में बड़ी सभाओं की तैयारी
विपक्षी गठबंधन ने आगे भी आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाने की योजना बनाई है। बैठक के बाद बताया गया कि अक्टूबर और नवंबर के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में पांच बड़ी सभाएं आयोजित करने की योजना है। इन सभाओं की तारीख और स्थान बाद में तय किए जाएंगे।
इसके अलावा 1 जनवरी को दिल्ली में भी एक बड़े कार्यक्रम की घोषणा की गई है। इस तरह इंडिया ब्लॉक की रणनीति केवल संसद या दिल्ली तक सीमित रखने के बजाय जिला स्तर तक आंदोलन को पहुंचाने की है।
ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार पर उठाए सवाल
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने बैठक के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी आपत्ति दोहराई और उनके पद से हटने की मांग की। उन्होंने एसआईआर और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कही।
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की चिंताओं को सामने रखा। तृणमूल कांग्रेस की ओर से बैठक में डोला सेन, डेरेक ओ’ब्रायन और कल्याण बनर्जी भी शामिल हुए। ममता बनर्जी और उनकी पार्टी पहले से ही पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराती रही हैं।
राहुल गांधी ने भी उठाया सवाल
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था किसी एक व्यक्ति से बड़ी है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा को लेकर भी सवाल किया।
विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना जरूरी है। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े सॉफ्टवेयर और प्रक्रियाओं की समीक्षा के लिए भी कदम उठाए हैं।
19 दलों की बैठक, कई प्रमुख नेता मौजूद
बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी के अलावा सीपीएम महासचिव एमए बेबी, सीपीआईएमएल महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला, पीडीपी की महबूबा मुफ्ती, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार गुट की सुप्रिया सुले समेत कई नेता मौजूद रहे।
शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट के प्रमुख उद्धव ठाकरे और झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख हेमंत सोरेन ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल हुए। समाजवादी पार्टी की ओर से अखिलेश यादव के प्रतिनिधियों ने बैठक में हिस्सा लिया। वहीं, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और आम आदमी पार्टी की अनुपस्थिति बैठक की प्रमुख बातों में रही।
चुनाव आयोग विवाद पर आगे बढ़ेगा आंदोलन
इंडिया ब्लॉक की बैठक के बाद अब एसआईआर और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों का आंदोलन अगले चरण में पहुंच गया है। विपक्ष ने मतदाता सूची में पारदर्शिता, नाम हटाने से पहले सूचना और अपील की व्यवस्था, प्री-एसआईआर मतदाता सूची तथा बैलेट पेपर जैसे मुद्दों को अपनी प्रमुख मांगों में शामिल किया है।
आने वाले दिनों में 2 से 8 अक्टूबर तक होने वाली जिला स्तरीय पदयात्राओं और 6 अक्टूबर को चुनाव सदन तक प्रस्तावित मार्च पर राजनीतिक नजरें रहेंगी। इसके साथ ही संसद और न्यायिक स्तर पर चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाने की विपक्षी रणनीति भी आगे बढ़ सकती है।
इस पूरे विवाद में विपक्ष के आरोप और मांगें राजनीतिक पक्ष हैं, जबकि चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया को निर्धारित कानूनी ढांचे के तहत संचालित करने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में आंदोलन, चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और न्यायिक प्रक्रियाओं से यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है, इस पर देश की राजनीति की नजर रहेगी।




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