Wednesday, 30 September 2026
Advertisement
ब्रेकिंग न्यूज़
अनुव्रत मंडल का विवादों से पुराना नाता, मवेशी तस्करी केस से जेल तक पहुंचा मामला एसआईआर पर इंडिया ब्लॉक का महामंथन, ममता-अभिषेक के साथ कल्याण बनर्जी भी बैठक में आदिवासी स्टूडेंट यूथ फोरम का जोरदार प्रदर्शन, एसडीएम कार्यालय में सौंपा ज्ञापन छह महीने से वेतन नहीं मिला तो श्रमिकों का धरना, पूजा से पहले भुगतान की मांग आसनसोल इनडोर स्टेडियम में 1 अक्टूबर से 10 दिवसीय महिला सशक्तिकरण अभियान, आत्मरक्षा की मिलेगी ट्रेनिंग गरुई ब्रिज पर बड़े-बड़े गड्ढे और बाहर निकली लोहे की रॉड, विधायक ने किया निरीक्षण अनुव्रत मंडल का विवादों से पुराना नाता, मवेशी तस्करी केस से जेल तक पहुंचा मामला एसआईआर पर इंडिया ब्लॉक का महामंथन, ममता-अभिषेक के साथ कल्याण बनर्जी भी बैठक में आदिवासी स्टूडेंट यूथ फोरम का जोरदार प्रदर्शन, एसडीएम कार्यालय में सौंपा ज्ञापन छह महीने से वेतन नहीं मिला तो श्रमिकों का धरना, पूजा से पहले भुगतान की मांग आसनसोल इनडोर स्टेडियम में 1 अक्टूबर से 10 दिवसीय महिला सशक्तिकरण अभियान, आत्मरक्षा की मिलेगी ट्रेनिंग गरुई ब्रिज पर बड़े-बड़े गड्ढे और बाहर निकली लोहे की रॉड, विधायक ने किया निरीक्षण
आसनसोल-दुर्गापुर

अनुव्रत मंडल का विवादों से पुराना नाता, मवेशी तस्करी केस से जेल तक पहुंचा मामला

Moutushi · 30 September 2026, 9:09 PM

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बीरभूम जिले की राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले अनुव्रत मंडल का नाम पिछले कई वर्षों से राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ कानूनी विवादों में भी चर्चा में रहा है। विशेष रूप से कथित मवेशी तस्करी मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद उनका नाम राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया। अगस्त 2022 में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने भी इसी मामले से जुड़े कथित धनशोधन की जांच के सिलसिले में उन्हें गिरफ्तार किया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान आसनसोल से दिल्ली तक अदालतों में कई महत्वपूर्ण सुनवाई हुईं।

अगस्त 2022 में सीबीआई ने किया गिरफ्तार

अनुव्रत मंडल को 11 अगस्त 2022 को सीबीआई ने कथित मवेशी तस्करी मामले में गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। गिरफ्तारी से पहले सीबीआई ने उनसे पूछताछ के लिए कई बार समन जारी किए थे। गिरफ्तारी के बाद उन्हें आसनसोल की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया गया। अदालत ने मामले की जांच के दौरान उन्हें जांच एजेंसी की हिरासत में भेजा था।

यह मामला भारत-बांग्लादेश सीमा के जरिए कथित मवेशी तस्करी से जुड़ा था। सीबीआई की जांच में सीमा क्षेत्र में कथित तस्करी नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही थी। एजेंसी ने अपनी जांच में कई लोगों के नाम सामने आने और कथित नेटवर्क की जानकारी मिलने का दावा किया था। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

आसनसोल की अदालत में हुई कई सुनवाई

गिरफ्तारी के बाद अनुव्रत मंडल को आसनसोल की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाता रहा। अगस्त 2022 में अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए सीबीआई हिरासत बढ़ाई थी। उस समय जांच एजेंसी की ओर से अदालत में यह तर्क दिया गया था कि अनुव्रत मंडल प्रभावशाली व्यक्ति हैं और जमानत मिलने की स्थिति में गवाहों या जांच को प्रभावित कर सकते हैं। दूसरी ओर, उनके वकीलों ने आरोपों से इनकार करते हुए जमानत की मांग की थी।

गिरफ्तारी के बाद कुछ समय तक अनुव्रत मंडल आसनसोल जेल में न्यायिक हिरासत में भी रहे। इसी दौरान मामला राजनीतिक रूप से भी काफी चर्चा में रहा। तृणमूल कांग्रेस की ओर से केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक सवाल उठाए गए थे, जबकि विपक्षी दलों ने इसे भ्रष्टाचार और कथित तस्करी के मामलों में जांच की कार्रवाई बताया था।

नवंबर 2022 में ईडी की एंट्री

मामले में अगला बड़ा घटनाक्रम नवंबर 2022 में हुआ। प्रवर्तन निदेशालय ने 17 नवंबर 2022 को अनुव्रत मंडल को कथित धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया। ईडी की जांच उसी कथित मवेशी तस्करी मामले से जुड़े आर्थिक लेनदेन पर केंद्रित थी। एजेंसी ने आरोप लगाया कि कथित तस्करी से प्राप्त धन को विभिन्न माध्यमों से वैध बनाने की कोशिश की गई।

ईडी की कार्रवाई के बाद अनुव्रत मंडल की कानूनी लड़ाई का दायरा बंगाल से दिल्ली तक पहुंच गया। दिल्ली की अदालत में भी मामले से जुड़ी सुनवाई शुरू हुई। इस दौरान उनकी ओर से कानूनी राहत हासिल करने के लिए विभिन्न अदालतों का रुख किया गया।

दिल्ली ले जाने को लेकर कानूनी लड़ाई

मार्च 2023 में अनुव्रत मंडल को दिल्ली ले जाने को लेकर भी कानूनी प्रक्रिया तेज हुई। आसनसोल की विशेष सीबीआई अदालत ने ईडी को उन्हें दिल्ली ले जाकर पूछताछ करने की अनुमति दी थी। इस आदेश को अनुव्रत मंडल की ओर से कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। बाद में अदालत के आदेश के बाद उन्हें दिल्ली ले जाने का रास्ता साफ हुआ।

7 मार्च 2023 को उन्हें आसनसोल जेल से कड़ी सुरक्षा के बीच निकाला गया और चिकित्सकीय जांच के बाद विमान से दिल्ली ले जाया गया। उनके साथ ईडी के अधिकारी और एक चिकित्सक भी मौजूद थे। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें अदालत के समक्ष पेश किया गया।

तिहाड़ जेल तक पहुंचा मामला

दिल्ली पहुंचने के बाद अनुव्रत मंडल को दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत में पेश किया गया। मामले की न्यायिक प्रक्रिया के तहत उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया और तिहाड़ जेल में रखा गया। इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में काफी चर्चा पैदा की, क्योंकि एक प्रभावशाली क्षेत्रीय नेता की गिरफ्तारी और दिल्ली की जेल तक पहुंचने का मामला राष्ट्रीय सुर्खियों में था।

बाद के वर्षों में भी मामले की जांच और अदालत की कार्यवाही जारी रही। प्रवर्तन निदेशालय ने फरवरी 2025 में इस मामले में अनुव्रत मंडल, उनके परिवार के सदस्यों, उनसे जुड़ी संस्थाओं और अन्य संबंधित लोगों के नाम से जुड़े बैंक खातों समेत कई संपत्तियों पर कार्रवाई की जानकारी दी। ईडी के अनुसार, उस कार्रवाई में करीब 25.86 करोड़ रुपये की चल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की गई थीं। एजेंसी ने यह भी कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है।

राजनीतिक सफर भी रहा चर्चा में

अनुव्रत मंडल लंबे समय तक बीरभूम में तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे। उन्हें पार्टी के मजबूत क्षेत्रीय नेताओं में गिना जाता था। उनका प्रभाव मुख्य रूप से बीरभूम की राजनीति में दिखाई देता था और वे पार्टी संगठन को लेकर लगातार सक्रिय रहे।

उनकी राजनीतिक सक्रियता के कारण उनके बयान और गतिविधियां अक्सर चर्चा में रहती थीं। बाद में केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई ने उनके राजनीतिक जीवन को कानूनी मामलों से जोड़कर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।

आरोप और अदालत की प्रक्रिया अलग-अलग विषय

अनुव्रत मंडल से जुड़े मामलों में यह महत्वपूर्ण है कि जांच एजेंसियों द्वारा लगाए गए आरोप और अदालत में अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य एक ही बात नहीं होते। मवेशी तस्करी और कथित धनशोधन से जुड़े आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया अपने स्तर पर चलती है। संबंधित एजेंसियां जांच और सबूतों के आधार पर अपना पक्ष रखती हैं, जबकि आरोपी पक्ष को भी अदालत में अपना बचाव प्रस्तुत करने का अधिकार होता है।

यही वजह है कि अनुव्रत मंडल की गिरफ्तारी से लेकर आसनसोल, कोलकाता और दिल्ली की अदालतों तक पहुंची कानूनी प्रक्रिया बंगाल की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रही। सीबीआई की गिरफ्तारी, ईडी की कार्रवाई, दिल्ली स्थानांतरण और तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत—इन घटनाओं ने उनके राजनीतिक और कानूनी सफर को एक बड़े विवाद के केंद्र में ला दिया।

Advertisement