दुर्गापुर: पश्चिम बंगाल की राजनीति में हुमायूं कबीर के कथित विवादित बयान को लेकर सियासी घमासान तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में दुर्गापुर में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। एमएएमसी टाउनशिप के उत्तरपल्ली इलाके में भाजपा कार्यकर्ताओं ने हुमायूं कबीर के नाम पर प्रतीकात्मक पारलौकिक कर्मकांड किया। प्रदर्शन के दौरान मंत्रोच्चार किया गया और धार्मिक रस्मों के जरिए विरोध दर्ज कराया गया। इस दौरान मैदान के एक हिस्से में प्रतीकात्मक कब्र बनाने की व्यवस्था भी की गई थी। घटना के बाद इलाके में यह प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया। स्थानीय स्तर पर सामने आई रिपोर्ट में भी इस प्रतीकात्मक श्राद्ध और कर्मकांड का उल्लेख किया गया है।
कथित बयान के विरोध में भाजपा का अनोखा तरीका
भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि हुमायूं कबीर की ओर से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को लेकर कथित तौर पर की गई टिप्पणी के विरोध में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। हाल ही में हुमायूं कबीर के एक बयान को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में विवाद खड़ा हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने शुभेंदु अधिकारी को लेकर ऐसी टिप्पणी की थी, जिसे भाजपा ने आपत्तिजनक और राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया। इसके बाद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से लगातार विरोध दर्ज कराया जा रहा है।
दुर्गापुर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसी विरोध को अलग तरीके से सामने रखा। उत्तरपल्ली इलाके में आयोजित कार्यक्रम में मंत्रोच्चार के बीच प्रतीकात्मक धार्मिक कर्मकांड किया गया। कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने हुमायूं कबीर के कथित बयान की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक भाषा के गिरते स्तर से जोड़कर विरोध दर्ज कराया।
स्वतंत्र घोष ने निभाई पुरोहित की भूमिका
कार्यक्रम में पश्चिम बर्धमान जिला भाजपा ओबीसी मोर्चा के जिला महासचिव स्वतंत्र घोष ने पुरोहित की भूमिका निभाई। उन्होंने मंत्रोच्चार के साथ प्रतीकात्मक कर्मकांड पूरा कराया। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक विधि-विधान के अनुरूप कई रस्में निभाई गईं और मैदान के एक कोने में प्रतीकात्मक रूप से कब्र बनाने की व्यवस्था की गई।
इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों की मौजूदगी रही। महिला मोर्चा की नेत्री मिठू राय भी कार्यक्रम में शामिल हुईं। प्रदर्शन में शामिल भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य हुमायूं कबीर के कथित बयान के खिलाफ अपनी नाराजगी दर्ज कराना था।
बयान को लेकर पहले भी बढ़ा है विवाद
हुमायूं कबीर का नाम पिछले कुछ महीनों में कई राजनीतिक विवादों में सामने आया है। जून 2026 में भी उनके एक कथित बयान को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणी का निशाना शुभेंदु अधिकारी नहीं बल्कि कुछ अन्य लोगों पर था। उस समय उन्होंने यह भी कहा था कि यदि उनके बयान को लेकर उन्हें जेल भेजने की कोशिश की जाती है तो वह कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
इसके बाद सितंबर में शुभेंदु अधिकारी को लेकर उनका एक और बयान राजनीतिक विवाद का कारण बना। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हुमायूं कबीर ने एक सार्वजनिक बयान में शुभेंदु अधिकारी के जल्द दुनिया से विदा होने की दुआ करने की बात कही थी। इस बयान के सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
बाद में इस बयान को लेकर हुमायूं कबीर के रुख में बदलाव की भी खबरें सामने आईं। कुछ रिपोर्टों में उनके द्वारा बाद में शुभेंदु अधिकारी के लिए लंबी उम्र और भविष्य में प्रधानमंत्री बनने की दुआ करने की बात कही गई। इससे विवाद और भी चर्चा में आ गया।
दुर्गापुर में बढ़ी राजनीतिक हलचल
हुमायूं कबीर के कथित बयान का असर अब राज्य के अलग-अलग इलाकों में दिखाई दे रहा है। दुर्गापुर में हुए इस कार्यक्रम ने राजनीतिक बयानबाजी को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। भाजपा कार्यकर्ताओं ने धार्मिक कर्मकांड के प्रतीकात्मक रूप का इस्तेमाल करते हुए अपना विरोध जताया।
इससे पहले दुर्गापुर में ही भाजपा युवा मोर्चा की ओर से भी हुमायूं कबीर के खिलाफ अलग तरह का प्रदर्शन किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए, पुतले को जूतों की माला पहनाई और बाद में प्रतीकात्मक रूप से उसे दफन किया। इसके जरिए कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक माफी और कार्रवाई की मांग उठाई थी।
लगातार हो रहे इन प्रदर्शनों से साफ है कि हुमायूं कबीर के बयान का मुद्दा अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा है। भाजपा कार्यकर्ता इसे लेकर विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।
राजनीतिक भाषा और बयानबाजी पर बहस
इस पूरे विवाद ने राजनीतिक नेताओं के बयानों की भाषा को लेकर भी बहस तेज कर दी है। लोकतांत्रिक राजनीति में अलग-अलग दलों के बीच वैचारिक और राजनीतिक मतभेद सामान्य हैं, लेकिन किसी नेता के बयान को लेकर विवाद खड़ा होने पर उसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव पर भी चर्चा होती है।
भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि हुमायूं कबीर की टिप्पणी राजनीतिक मर्यादा के अनुरूप नहीं थी। वहीं, हुमायूं कबीर की ओर से पहले भी अपने बयानों को लेकर अलग-अलग स्पष्टीकरण दिए जाते रहे हैं। इसलिए पूरे विवाद में कथित बयान, उस पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया और संबंधित नेता की बाद की सफाई—इन सभी पहलुओं को अलग-अलग देखना जरूरी है।
प्रतीकात्मक प्रदर्शन के बाद क्या?
दुर्गापुर के उत्तरपल्ली इलाके में हुए इस प्रदर्शन के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हुमायूं कबीर या उनकी पार्टी की ओर से इस विरोध पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। फिलहाल भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने कार्यक्रम के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे कथित बयान को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
हुमायूं कबीर इससे पहले भी कई राजनीतिक विवादों में अपनी टिप्पणियों को लेकर चर्चा में रहे हैं। वहीं, भाजपा की ओर से उनके बयानों को लेकर लगातार विरोध दर्ज कराया जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की बयानबाजी और तेज होने की संभावना बनी हुई है।
दुर्गापुर में हुआ यह प्रतीकात्मक पारलौकिक कर्मकांड इसी राजनीतिक टकराव का एक नया रूप रहा। मंत्रोच्चार, प्रतीकात्मक कब्र और भाजपा कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने प्रदर्शन को स्थानीय स्तर पर खासा चर्चित बना दिया। अब इस मामले में आगे कोई राजनीतिक प्रतिक्रिया या प्रशासनिक कार्रवाई सामने आती है या नहीं, इस पर भी नजर रहेगी।




Leave a Reply