दुर्गापुर: पश्चिम बर्दवान जिले के दुर्गापुर के कांकसा थाना क्षेत्र से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। राजबांध स्थित एक निजी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के हॉस्टल में प्रथम वर्ष के मेडिकल छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। छात्र का शव हॉस्टल के कमरे के अंदर फंदे से लटका हुआ मिलने के बाद कॉलेज परिसर में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही कांकसा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी।
मृत छात्र की पहचान 20 वर्षीय अभिषेक कुमार के रूप में हुई है। बताया गया है कि अभिषेक मूल रूप से बिहार के सीतामढ़ी जिले का रहने वाला था और दुर्गापुर के राजबांध स्थित निजी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चिकित्सा की पढ़ाई कर रहा था। वह मेडिकल पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष का छात्र था। कम उम्र में इस तरह की मौत की खबर सामने आने के बाद उसके सहपाठियों और कॉलेज से जुड़े लोगों में शोक का माहौल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अभिषेक हॉस्टल के एक कमरे में अपने एक सहपाठी के साथ रहता था। शुक्रवार दोपहर उसका सहपाठी नमाज पढ़ने के लिए कमरे से बाहर गया था। कुछ समय बाद जब वह वापस हॉस्टल के कमरे में लौटा, तो उसने दरवाजा खटखटाया और अभिषेक को आवाज दी। हालांकि, अंदर से कोई जवाब नहीं मिला।
काफी देर तक प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर सहपाठी को चिंता हुई। इसके बाद उसने हॉस्टल प्रबंधन को मामले की जानकारी दी। घटना की सूचना पुलिस को भी दी गई। जानकारी मिलते ही कांकसा थाना पुलिस हॉस्टल पहुंची और कमरे का दरवाजा खोलकर अंदर प्रवेश किया। पुलिस के अनुसार, कमरे के अंदर अभिषेक को फंदे से लटका हुआ पाया गया।
पुलिस और कॉलेज प्रबंधन की ओर से तत्काल उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आपातकालीन विभाग में ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद अभिषेक को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद घटना की जानकारी उसके परिवार को दी गई। परिवार के सदस्यों को जैसे ही बेटे की मौत की खबर मिली, वे दुर्गापुर के लिए रवाना हो गए।
इस घटना ने हॉस्टल में रहने वाले अन्य विद्यार्थियों को भी झकझोर दिया है। मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं के बीच भी घटना को लेकर चर्चा शुरू हो गई। जिस कमरे में अभिषेक रहता था, वहां पुलिस ने आवश्यक जांच प्रक्रिया शुरू की। मौत की परिस्थितियों को समझने के लिए पुलिस हॉस्टल से जुड़े लोगों और अभिषेक के सहपाठियों से भी जानकारी जुटा रही है।
मेडिकल कॉलेज के सहायक महाप्रबंधक शुभंकर भट्टाचार्य ने बताया कि अभिषेक की परीक्षा भी नजदीक थी। हालांकि, परीक्षा या पढ़ाई से जुड़ा कोई दबाव उसकी मौत का कारण था या नहीं, इस संबंध में फिलहाल निश्चित तौर पर कुछ कहना संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना के वास्तविक कारण की जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगी।
वहीं, आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस आयुक्तालय के पुलिस उपायुक्त रासप्रीत सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। पुलिस मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने की कोशिश कर रही है। पुलिस की जांच के साथ आवश्यक कानूनी प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है।
फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता घटना से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाना है। कमरे की परिस्थितियों, घटनाक्रम और छात्र के आसपास के लोगों से मिली जानकारी के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले अभिषेक की स्थिति कैसी थी और उसके साथियों या कॉलेज प्रबंधन को किसी तरह की परेशानी की जानकारी थी या नहीं।
हालांकि, इस मामले में अभी तक पुलिस की ओर से मौत के पीछे किसी विशेष कारण की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए परीक्षा, पढ़ाई या किसी अन्य व्यक्तिगत कारण को लेकर किसी तरह का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। पोस्टमार्टम और पुलिस जांच के बाद ही मौत की परिस्थितियों को लेकर अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
घटना के बाद कॉलेज और हॉस्टल परिसर में सुरक्षा तथा विद्यार्थियों की स्थिति को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। ऐसे मामलों में विद्यार्थियों के साथ नियमित संवाद, उनकी परेशानियों को सुनना और जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेष रूप से दूर-दराज के राज्यों से आकर हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए कॉलेज प्रशासन और सहपाठियों के बीच बेहतर संवाद बेहद जरूरी है।
अभिषेक के परिवार के दुर्गापुर पहुंचने के बाद पुलिस की ओर से आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। फिलहाल परिवार और कॉलेज समुदाय के बीच शोक का माहौल है। एक युवा मेडिकल छात्र की अचानक हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब अब पुलिस जांच के बाद ही मिल सकेगा।
कांकसा थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। पुलिस की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और संबंधित लोगों से पूछताछ के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस दुखद घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच के परिणाम का इंतजार करना जरूरी है।






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