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आसनसोल-दुर्गापुर

दुर्गापुर में 108 कुमारी पूजा का भव्य आयोजन, 138 कन्याओं के पूजन से भक्तिमय हुआ माहौल

Moutushi · 20 October 2026, 6:49 PM

दुर्गापुर, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़: पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में दुर्गापूजा के पावन अवसर पर आस्था, भक्ति और शक्ति की उपासना का अनूठा दृश्य देखने को मिला। चंडीदास राजेंद्र प्रसाद सार्वजनिक दुर्गापूपश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में दुर्गापूजा के पावन अवसर पर आस्था, भक्ति और शक्ति की उपासना का अनूठा दृश्य देखने को मिला। चंडीदास राजेंद्र प्रसाद सार्वजनिक दुर्गापूजाजा कमेटी की ओर से पूजा के 66वें वर्ष में महानवमी के अवसर पर 108 कुमारी पूजा का आयोजन किया गया। इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। पूरे पूजा मंडप में भक्तिमय वातावरण के बीच कन्याओं को देवी दुर्गा के कुमारी स्वरूप में पूजने की परंपरा निभाई गई।

इस आयोजन में हिरण्मय महाराज, अच्युत हाजरा सहित कई विशिष्ट व्यक्ति उपस्थित रहे। पूजा कमेटी की इस पहल को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। कन्याओं के चरण धोने, उन्हें आलता लगाने और चांदी की पायल पहनाकर पूजा-अर्चना करने की रस्मों ने इस आयोजन को खास बना दिया। महानवमी के दिन आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में परंपरा और श्रद्धा का सुंदर संगम देखने को मिला।

66वें वर्ष में खास धार्मिक आयोजन

चंडीदास राजेंद्र प्रसाद सार्वजनिक दुर्गापूजा कमेटी इस वर्ष अपनी दुर्गापूजा के 66वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। इसी अवसर पर महानवमी के दिन 108 कुमारी पूजा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। दुर्गापूजा के दौरान महानवमी का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा की आराधना के साथ कई स्थानों पर कन्या पूजन की परंपरा भी निभाई जाती है।

कुमारी पूजा में छोटी कन्याओं को देवी शक्ति का प्रतीक मानकर उनका सम्मान किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कन्याओं में देवी के पवित्र स्वरूप का दर्शन किया जाता है। इसी भावना के साथ दुर्गापुर के चंडीदास स्थित पूजा मंडप में विशेष अनुष्ठान संपन्न हुआ।

आयोजन के दौरान कन्याओं को सम्मानपूर्वक पूजा स्थल पर बैठाया गया। इसके बाद उनके पैर धोए गए, आलता लगाया गया और चांदी की पायल पहनाई गई। फिर धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उनकी पूजा-अर्चना की गई। इन रस्मों के माध्यम से कन्याओं के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया गया।

108 कुमारी पूजा, लेकिन पूजन में शामिल हुईं 138 कन्याएं

इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि कमेटी की ओर से 108 कुमारी पूजा का आयोजन किया गया, जबकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुल 138 कन्याओं के चरण धोकर, उन्हें आलता लगाकर और चांदी की पायल पहनाकर पूजा की गई। कन्याओं की भागीदारी ने कार्यक्रम को और व्यापक स्वरूप दिया।

आमतौर पर दुर्गापूजा के अवसर पर विभिन्न पूजा मंडपों और घरों में कन्या पूजन किया जाता है। हालांकि, इस आयोजन में बड़ी संख्या में कन्याओं को शामिल करना और उनके सम्मान के लिए विशेष व्यवस्था करना इसे अलग पहचान देता है। पूजा मंडप में उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए यह धार्मिक अनुष्ठान आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा।

कन्याओं के पूजन के दौरान धार्मिक वातावरण बना रहा। आयोजन में शामिल लोगों ने इसे मां दुर्गा की शक्ति और मातृस्वरूप के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का अवसर माना। इस तरह महानवमी का उत्सव केवल पारंपरिक पूजा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कन्याओं के सम्मान और उनके प्रति आदर व्यक्त करने का संदेश भी देता नजर आया।

बेलूर मठ के बाद दुर्गापुर में इतने बड़े आयोजन का दावा

पूजा कमेटी के आयोजकों का दावा है कि बेलूर मठ के बाद संभवतः दुर्गापुर में पहली बार इतने बड़े स्तर पर 108 कुमारी पूजा का आयोजन किया गया। इस दावे ने कार्यक्रम को लेकर श्रद्धालुओं की उत्सुकता और बढ़ा दी।

हालांकि, इस संबंध में यह ध्यान रखना जरूरी है कि दुर्गापुर में पहली बार इतने बड़े स्तर पर इस तरह का आयोजन होने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे आयोजकों के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। फिर भी, 108 कुमारी पूजा के आयोजन और 138 कन्याओं की भागीदारी ने इस धार्मिक कार्यक्रम को स्थानीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई।

दुर्गापुर जैसे औद्योगिक शहर में दुर्गापूजा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मेलजोल का भी महत्वपूर्ण अवसर है। विभिन्न पूजा समितियां हर वर्ष अपनी परंपराओं, धार्मिक अनुष्ठानों और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से लोगों को जोड़ने का प्रयास करती हैं। चंडीदास राजेंद्र प्रसाद सार्वजनिक दुर्गापूजा कमेटी का यह आयोजन भी इसी परंपरा का हिस्सा रहा।

हिरण्मय महाराज और अच्युत हाजरा की उपस्थिति

इस विशेष अनुष्ठान में हिरण्मय महाराज और अच्युत हाजरा सहित कई विशिष्ट लोग मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व दिया। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की आराधना की और कन्याओं के पूजन में भाग लिया।

हालांकि, उपस्थित विशिष्ट व्यक्तियों के संबोधन या कार्यक्रम के दौरान दिए गए किसी विशेष संदेश का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उनके नाम और उपस्थिति से संबंधित जानकारी को ही इस समाचार में शामिल किया गया है।

पूजा कमेटी की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम ने महानवमी के अवसर पर धार्मिक आस्था को केंद्र में रखा। कन्याओं के चरण धोने और उन्हें पायल पहनाने जैसी परंपराओं ने पूजा की प्राचीन मान्यताओं को जीवंत रूप दिया।

कुमारी पूजा का धार्मिक और सामाजिक महत्व

कुमारी पूजा का संबंध देवी शक्ति की आराधना से है। हिंदू धार्मिक परंपरा में कन्याओं को देवी के स्वरूप के रूप में सम्मान देने की मान्यता प्रचलित है। नवरात्रि और दुर्गापूजा के दौरान कई जगहों पर कन्या पूजन किया जाता है। इसमें कन्याओं को आदरपूर्वक बैठाना, उनके चरण धोना, तिलक लगाना और भोजन या उपहार देना जैसी परंपराएं शामिल हो सकती हैं।

इस अनुष्ठान का व्यापक संदेश कन्याओं के प्रति सम्मान और आदर की भावना को मजबूत करना भी है। धार्मिक आस्था के साथ यदि समाज में बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और समान अवसरों को महत्व दिया जाए, तो ऐसे आयोजनों का सामाजिक संदेश और प्रभावशाली बन सकता है।

दुर्गापुर में आयोजित इस कुमारी पूजा ने भी श्रद्धालुओं को शक्ति की उपासना और कन्याओं के सम्मान से जुड़ी परंपरा से जोड़ने का अवसर दिया।

महानवमी पर श्रद्धा और परंपरा का संगम

चंडीदास राजेंद्र प्रसाद सार्वजनिक दुर्गापूजा कमेटी की 66वें वर्ष की दुर्गापूजा में आयोजित 108 कुमारी पूजा इस बार चर्चा का प्रमुख विषय बनी। 138 कन्याओं के पूजन, धार्मिक विधि-विधान और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन को यादगार बनाया।

महानवमी के अवसर पर संपन्न इस अनुष्ठान ने दुर्गापुर के दुर्गापूजा उत्सव में एक विशेष अध्याय जोड़ा। आयोजकों की पहल और श्रद्धालुओं की भागीदारी ने यह दिखाया कि धार्मिक परंपराएं आज भी लोगों को एक साथ जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कन्याओं के सम्मान और देवी शक्ति की आराधना के संदेश के साथ संपन्न यह कार्यक्रम स्थानीय दुर्गापूजा उत्सव का एक उल्लेखनीय आकर्षण रहा।

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