Wednesday, 21 October 2026
Advertisement
ब्रेकिंग न्यूज़
दुर्गापुर में 108 कुमारी पूजा का भव्य आयोजन, 138 कन्याओं के पूजन से भक्तिमय हुआ माहौल दुर्गापुर की आराध्या धीबर ने विश्व कप में जीता गोल्ड, 47 देशों के खिलाड़ियों के बीच भारत का बढ़ाया मान दुर्गापुर में दिल दहला देने वाला दोहरा हत्याकांड, पत्नी का सिर काटकर मंदिर में रखा, पिता की भी हत्या का आरोप 550 साल पुरानी है बंगाल की चंद्रपुली मिठाई? दुर्गापूजा के इस खास पकवान का इतिहास जानकर चौंक जाएंगे चोरबागान हादसे के बाद सख्त हुए मुख्यमंत्री, अस्थायी होमगार्डों की भूमिका पर उठाए सवाल दुर्गापूजा की सुरक्षा पर मुख्यमंत्री की नजर, आरक्षा भवन और लालबाजार के कंट्रोल रूम पहुंचे शुभेंदु अधिकारी दुर्गापुर में 108 कुमारी पूजा का भव्य आयोजन, 138 कन्याओं के पूजन से भक्तिमय हुआ माहौल दुर्गापुर की आराध्या धीबर ने विश्व कप में जीता गोल्ड, 47 देशों के खिलाड़ियों के बीच भारत का बढ़ाया मान दुर्गापुर में दिल दहला देने वाला दोहरा हत्याकांड, पत्नी का सिर काटकर मंदिर में रखा, पिता की भी हत्या का आरोप 550 साल पुरानी है बंगाल की चंद्रपुली मिठाई? दुर्गापूजा के इस खास पकवान का इतिहास जानकर चौंक जाएंगे चोरबागान हादसे के बाद सख्त हुए मुख्यमंत्री, अस्थायी होमगार्डों की भूमिका पर उठाए सवाल दुर्गापूजा की सुरक्षा पर मुख्यमंत्री की नजर, आरक्षा भवन और लालबाजार के कंट्रोल रूम पहुंचे शुभेंदु अधिकारी
आसनसोल-दुर्गापुर

दुर्गापुर की आराध्या धीबर ने विश्व कप में जीता गोल्ड, 47 देशों के खिलाड़ियों के बीच भारत का बढ़ाया मान

Moutushi · 20 October 2026, 6:44 PM

दुर्गापुर, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़ : कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और लक्ष्य हासिल करने का जुनून हो, तो आर्थिक कठिनाइयां भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर की आराध्या धीबर ने अपनी शानदार उपलब्धि से इस बात को सच साबित कर दिखाया है। उजबेकिस्तान में आयोजित किक बॉक्सिंग विश्व कप प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर आराध्या ने न केवल अपने परिवार, बल्कि दुर्गापुर और पूरे देश का नाम रोशन किया है। सीमित संसाधनों के बीच लगातार अभ्यास करने वाली इस खिलाड़ी की सफलता अब दूसरे युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बन गई है।

मंगलवार सुबह जब आराध्या स्वर्ण पदक जीतकर दुर्गापुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर चार पर पहुंचीं, तो वहां उनके स्वागत के लिए कोच और सहपाठी मौजूद थे। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर पहुंचे लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया। अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर परिवार और परिचितों में खुशी का माहौल है। स्टेशन पर मौजूद यात्रियों ने भी आराध्या की सफलता की कहानी जानकर उन्हें बधाई दी और उनके संघर्ष की सराहना की।

47 देशों के लगभग तीन हजार खिलाड़ियों के बीच शानदार प्रदर्शन

उजबेकिस्तान में आयोजित किक बॉक्सिंग विश्व कप में लगभग 47 देशों के करीब तीन हजार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में विभिन्न देशों के खिलाड़ियों के बीच मुकाबला करना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे प्रतिस्पर्धात्मक माहौल में आराध्या ने अपने प्रदर्शन के दम पर स्वर्ण पदक हासिल किया।

विश्व कप में मिली इस सफलता ने उनकी मेहनत और खेल के प्रति समर्पण को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों की बड़ी संख्या इस उपलब्धि के महत्व को और बढ़ाती है। आराध्या ने यह साबित किया कि छोटे शहरों से आने वाले खिलाड़ी भी सही प्रशिक्षण, निरंतर अभ्यास और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

हालांकि, उनके मुकाबलों के अलग-अलग चरणों, प्रतिद्वंद्वियों और अंक संबंधी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्वर्ण पदक जीतना अपने आप में उनकी खेल यात्रा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

आर्थिक तंगी के बीच जारी रखा संघर्ष

आराध्या की सफलता के पीछे केवल खेल का अभ्यास नहीं, बल्कि परिवार का संघर्ष भी जुड़ा हुआ है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आर्थिक कठिनाइयों के कारण उनके परिवार को बेटी के खेल को आगे बढ़ाने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनके पिता चिरंजीत धीबर और मां ने आराध्या के सपनों को पूरा करने के लिए आर्थिक सहायता जुटाने की काफी कोशिश की, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका।

खेल में आगे बढ़ने के लिए नियमित अभ्यास, प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं में भागीदारी और यात्रा जैसी जरूरतें होती हैं। सीमित आर्थिक संसाधनों वाले परिवारों के लिए इन खर्चों को संभालना अक्सर मुश्किल हो जाता है। ऐसे में खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा के साथ-साथ आर्थिक चुनौतियों से भी जूझना पड़ता है।

आराध्या ने इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी। माता-पिता के संघर्ष को अपनी ताकत बनाकर उन्होंने लक्ष्य की ओर बढ़ना जारी रखा। उनकी यह उपलब्धि बताती है कि प्रतिभा किसी आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती, लेकिन उसे आगे बढ़ाने के लिए अवसर और सहयोग बेहद जरूरी हैं।

स्वर्ण पदक लेकर लौटीं तो भावुक हुईं आराध्या

विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद दुर्गापुर लौटने पर आराध्या भावुक हो गईं। जिस उपलब्धि के लिए उन्होंने लंबे समय तक मेहनत की और कठिनाइयों का सामना किया, उसे हासिल करने के बाद उनकी भावनाएं शब्दों में व्यक्त नहीं हो सकीं। उनके कोच ईश्वर माझी भी इस सफलता से बेहद अभिभूत नजर आए।

मंगलवार सुबह दुर्गापुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर चार पर स्वागत के दौरान राष्ट्रीय ध्वज के साथ मौजूद कोच और सहपाठियों ने इस पल को यादगार बना दिया। यात्रियों ने भी आराध्या को बधाई दी। यह स्वागत केवल एक खिलाड़ी की जीत का उत्सव नहीं था, बल्कि उस संघर्ष और समर्पण का सम्मान भी था, जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक तक पहुंचाया।

आराध्या की इस उपलब्धि से दुर्गापुर के खेल प्रेमियों और युवा खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा जाए, तो सफलता की राह बनाई जा सकती है।

पिता ने सरकार से मांगी मदद

आराध्या के पिता चिरंजीत धीबर ने बेटी की सफलता पर खुशी जाहिर की। उनका कहना है कि उनकी बेटी ने परिवार के साथ-साथ देश का नाम भी रोशन किया है। उन्होंने सरकार से आराध्या जैसी प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को उचित सहयोग, बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की अपील की।

उनके अनुसार, कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी आर्थिक अभावों के बीच अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष करते हैं। यदि ऐसे खिलाड़ियों को समय पर आर्थिक सहायता और उचित अवसर मिलें, तो वे खेल के क्षेत्र में और बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

खिलाड़ियों के लिए प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर, प्रशिक्षण की निरंतरता और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले खिलाड़ियों के लिए सहयोग की जरूरत और बढ़ जाती है। आराध्या की सफलता के बाद यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि स्थानीय स्तर पर उभरती प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाने के लिए किस तरह की व्यवस्थाएं मजबूत की जा सकती हैं।

खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने पर जोर

दुर्गापुर पश्चिम के तीन नंबर मंडल अध्यक्ष तेजनारायण पांडे ने कहा कि नई सरकार खेल जगत को अधिक महत्व दे रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में बंगाल से आराध्या जैसी और प्रतिभाशाली खिलाड़ी सामने आएंगी।

आराध्या इससे पहले भी किक बॉक्सिंग प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं। इस बार विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी उपलब्धियों में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है। उनकी सफलता से यह उम्मीद बढ़ी है कि दुर्गापुर और आसपास के क्षेत्रों के युवा भी खेलों को गंभीरता से अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।

आराध्या की जीत बनी संघर्ष करने वाले युवाओं की प्रेरणा

दुर्गापुर की आराध्या धीबर की उपलब्धि केवल एक स्वर्ण पदक तक सीमित नहीं है। यह उन खिलाड़ियों के लिए उम्मीद का संदेश है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। आर्थिक कठिनाइयों के बीच अपने लक्ष्य पर टिके रहना और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक हासिल करना उनकी मेहनत की अहम पहचान है।

अब आवश्यकता है कि ऐसी प्रतिभाओं को नियमित प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और बेहतर खेल सुविधाएं मिलें। इससे न केवल आराध्या को भविष्य में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा, बल्कि दूसरे खिलाड़ियों को भी अपनी क्षमता साबित करने का मंच मिल सकेगा।

उजबेकिस्तान में मिली इस सफलता के साथ आराध्या ने दुर्गापुर का गौरव बढ़ाया है। उनकी कहानी आने वाले समय में उन युवाओं को प्रेरित कर सकती है, जो परिस्थितियों से हार मानने के बजाय अपने सपनों को सच करने के लिए लगातार मेहनत करना चाहते हैं।

Advertisement