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आसनसोल-दुर्गापुर

चोरबागान हादसे के बाद सख्त हुए मुख्यमंत्री, अस्थायी होमगार्डों की भूमिका पर उठाए सवाल

Moutushi · 20 October 2026, 11:14 AM

कोलकाता, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़ : उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गापूजा मंडप में हुई भगदड़ के बाद राज्य सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। रविवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने हादसे में घायल लोगों की स्थिति, मृतकों के पार्थिव शरीर परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था में कथित चूक को लेकर जानकारी दी। इस दुर्घटना में 19 लोगों की मौत हुई और 25 लोग घायल हुए।

मुख्यमंत्री ने अस्थायी होमगार्डों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके नामों की सूची मांगी है। साथ ही उन्होंने पूजा पंडालों में अलग वीआईपी कतार बंद करने और भीड़ वाले स्थानों पर तत्काल जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए। हादसे के कारणों की जांच जारी है और किसी व्यक्ति या समूह की जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

उच्चस्तरीय बैठक में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा

चोरबागान में सप्तमी की शाम हुई दुर्घटना के बाद मुख्यमंत्री अस्पताल पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने देर रात घटनास्थल पर स्थित पूजा मंडप का भी दौरा किया। रविवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्होंने राहत कार्यों, घायलों के उपचार और पूजा पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने बताया कि हादसे में घायल लोगों की स्थिति स्थिर है और मृतकों के पार्थिव शरीर उनके परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। घटना के बाद प्रशासन के सामने घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने, परिवारों को जानकारी देने और आगे ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा प्रबंध मजबूत करने की चुनौती है।

मुख्यमंत्री ने पूजा पंडालों का निरीक्षण करने के लिए विशेष टीम गठित करने का निर्देश भी दिया है। इस टीम के जरिए प्रमुख पूजा आयोजनों में प्रवेश और निकास के रास्तों, भीड़ नियंत्रण तथा सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा किए जाने की योजना है।

अस्थायी होमगार्डों की भूमिका जांच के दायरे में

पुलिस की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मृतकों के परिजनों से बातचीत के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि पुलिस ने कैब की व्यवस्था कर उन्हें अस्पताल पहुंचाया था। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से अस्थायी होमगार्डों के खिलाफ शिकायतें सामने आई हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार, संबंधित होमगार्ड पिछले दो वर्षों से ड्यूटी कर रहे थे और तीसरे वर्ष भी तैनात थे। उन्होंने इन कर्मियों के नामों की सूची मांगी है, ताकि उनकी भूमिका की जांच की जा सके। समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि इन होमगार्डों की नियुक्ति 2024 और 2025 में भी हुई थी।

हालांकि, केवल शिकायतों के आधार पर किसी कर्मचारी को दोषी नहीं माना जा सकता। हादसे के दौरान किसकी क्या जिम्मेदारी थी, ड्यूटी पर कौन तैनात था और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए गए थे, इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही मिल सकेगा।

बंगाली भाषा को लेकर भी मुख्यमंत्री ने किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने शनिवार रात की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि रात करीब डेढ़ बजे उनकी मुलाकात एक होमगार्ड से हुई थी। उनके अनुसार, उस होमगार्ड ने बंगाली में बात करने से इनकार किया और कहा कि वह बंगाली नहीं समझता।

मुख्यमंत्री ने इस प्रसंग का उल्लेख करते हुए संबंधित कर्मियों की नियुक्ति और ड्यूटी से जुड़े विवरणों की जानकारी मांगी है। यह उनका बताया हुआ घटनाक्रम है; संबंधित होमगार्ड की पहचान और उसके पक्ष का विवरण स्वतंत्र रूप से सामने आने पर ही इस दावे की पूरी पृष्ठभूमि स्पष्ट हो सकेगी।

बारिश और रस्सी छोड़े जाने का जिक्र

हादसे की परिस्थितियों पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि घटना प्रवेश और निकास के रास्तों के पास हुई थी। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान रस्सी पकड़कर भीड़ को नियंत्रित करने वाले लोगों ने रस्सी छोड़ दी थी, जिसके बाद भीड़ में दबाव की स्थिति पैदा हुई।

हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारणों और घटनाक्रम में अलग-अलग पक्षों की भूमिका का निर्धारण जांच के आधार पर ही होगा। भीड़भाड़ वाले आयोजनों में प्रवेश और निकास के रास्तों का सुरक्षित होना, भीड़ के प्रवाह को नियंत्रित करना और बारिश जैसी परिस्थितियों में वैकल्पिक व्यवस्था तैयार रखना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये की सहायता

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बिहार के परिवार को छोड़कर अन्य मृतकों के परिजनों से वह स्वयं मुलाकात करेंगे।

इस सहायता का उद्देश्य हादसे से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहारा देना है। हालांकि, किसी भी आर्थिक सहायता से परिवारों की व्यक्तिगत क्षति की भरपाई नहीं हो सकती। घटना के बाद परिजनों को पार्थिव शरीर सौंपने की प्रक्रिया और राहत संबंधी व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।

वीआईपी कतार बंद करने का निर्देश

मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया कि जहां भी भीड़ अधिक हो, वहां तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने पूजा पंडालों में अलग वीआईपी कतार बंद करने का भी निर्देश दिया। इस फैसले का उद्देश्य श्रद्धालुओं की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित बनाना और अलग-अलग प्रवेश व्यवस्थाओं से पैदा होने वाली संभावित कठिनाइयों को कम करना है।

बड़े पूजा आयोजनों में प्रवेश और निकास के रास्तों की स्पष्ट व्यवस्था, भीड़ की लगातार निगरानी और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई आवश्यक होती है। पूजा समितियों, सुरक्षा कर्मियों और प्रशासन के बीच समन्वय भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

जांच और सुरक्षा व्यवस्था पर सबकी नजर

चोरबागान की घटना ने दुर्गापूजा जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा तैयारियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मुख्यमंत्री ने अस्थायी होमगार्डों की भूमिका की जांच कराने, पूजा मंडपों का निरीक्षण करने और वीआईपी कतार बंद करने जैसे कदमों की घोषणा की है।

फिलहाल हादसे की जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच के निष्कर्षों का इंतजार है। प्रशासन के सामने सबसे महत्वपूर्ण काम घायलों का उपचार सुनिश्चित करना, प्रभावित परिवारों को सहायता देना और बाकी पूजा आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखना है। श्रद्धालुओं से भी अपील है कि वे पुलिस और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें तथा भीड़ वाले स्थानों पर धैर्य बनाए रखें।

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