आसनसोल: पश्चिम बंगाल और झारखंड की सीमा पर पुलिस ने पशु तस्करी की कथित एक बड़ी कोशिश को नाकाम करते हुए दो संदिग्ध ट्रकों को जब्त किया है। पुलिस की कार्रवाई में दोनों ट्रकों से कुल 28 पशु बरामद किए गए हैं। बरामद पशुओं में 15 गाय और 13 भैंस शामिल हैं। घटना के बाद सीमा क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह कुल्टी थाना क्षेत्र के चौरंगी फाड़ी अंतर्गत डुबुर्डिही चेकपोस्ट के पास पुलिस टीम नियमित जांच और निगरानी कर रही थी। इसी दौरान पुलिस की नजर दो ऐसे ट्रकों पर पड़ी, जिनकी गतिविधियां संदिग्ध बताई जा रही हैं। पुलिस को संदेह हुआ कि दोनों वाहन सामान्य मार्ग से जाने के बजाय कथित तौर पर रॉन्ग रूट का इस्तेमाल कर चेकिंग से बचकर निकलने की कोशिश कर रहे हैं।
संदेह बढ़ने पर पुलिस ने दोनों ट्रकों को रोक लिया। इसके बाद वाहनों की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान ट्रकों के अंदर बड़ी संख्या में पशु पाए गए। पुलिस के अनुसार, दोनों वाहनों से कुल 28 पशु बरामद किए गए, जिनमें 15 गाय और 13 भैंस शामिल हैं।
झारखंड से कोलकाता की ओर जा रहे थे ट्रक
प्रारंभिक पुलिस जांच के अनुसार, दोनों ट्रक झारखंड की ओर से पश्चिम बंगाल में प्रवेश करने के बाद कोलकाता की दिशा में जा रहे थे। सीमा क्षेत्र से गुजरते समय वाहनों की गतिविधि पुलिस को संदिग्ध लगी, जिसके बाद उन्हें रोककर जांच की गई।
पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान ट्रकों में मौजूद चालक और खलासियों से पशुओं के परिवहन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज मांगे गए। हालांकि, पुलिस का कहना है कि चालक और खलासियों की ओर से पशुओं के परिवहन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
दस्तावेज नहीं मिलने और ट्रकों में बड़ी संख्या में पशुओं के पाए जाने के बाद पुलिस ने दोनों वाहनों को जब्त कर लिया। साथ ही चालक और खलासियों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ शुरू की गई।
चेकपोस्ट पर पुलिस की सतर्कता से खुला मामला
सीमा क्षेत्र में स्थित चेकपोस्टों पर पुलिस की निगरानी के कारण यह कार्रवाई संभव हुई। डुबुर्डिही चेकपोस्ट पश्चिम बंगाल और झारखंड के बीच महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों में से एक है। इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन आवागमन करते हैं। ऐसे में वाहनों की जांच और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण चुनौती होती है।
शुक्रवार सुबह दो ट्रकों की गतिविधि पर संदेह होने के बाद पुलिस ने बिना किसी जल्दबाजी के पहले वाहनों को रोका और फिर तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान पशुओं की बरामदगी के बाद पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की जांच शुरू की गई।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बरामद पशुओं को कहां से लाया गया था, उन्हें कहां ले जाया जा रहा था और इस पूरे परिवहन के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि दोनों ट्रकों के मालिक कौन हैं और पशुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए किसी प्रकार की अनुमति या दस्तावेज मौजूद थे या नहीं।
चालक और खलासियों से पूछताछ जारी
दोनों ट्रकों के चालक और खलासियों को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि पशुओं को किस उद्देश्य से झारखंड से पश्चिम बंगाल की ओर लाया जा रहा था।
पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि क्या दोनों ट्रकों के बीच कोई आपसी संपर्क था और क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है। हालांकि, इस संबंध में फिलहाल पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
मामले में आगे की कार्रवाई बरामद पशुओं, वाहनों, दस्तावेजों और पूछताछ से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर किए जाने की संभावना है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है।
सीमा क्षेत्र में बढ़ाई गई निगरानी
घटना के बाद पश्चिम बंगाल-झारखंड सीमा पर पुलिस की निगरानी को और मजबूत किया गया है। विशेष रूप से चेकपोस्ट और ऐसे मार्गों पर नजर बढ़ाई जा रही है, जहां से भारी वाहनों की आवाजाही होती है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि संदिग्ध वाहनों की समय पर जांच करना अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए बेहद जरूरी है। सीमा क्षेत्र में नियमित जांच के साथ-साथ संदिग्ध वाहनों के मार्ग और दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
स्थानीय लोगों के बीच भी इस कार्रवाई की चर्चा है। लोगों का कहना है कि सीमा क्षेत्र से बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं, इसलिए पुलिस की सक्रिय निगरानी से अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।
28 पशुओं की बरामदगी से कई सवाल
एक ही कार्रवाई में 15 गाय और 13 भैंस समेत कुल 28 पशुओं की बरामदगी ने कई सवाल खड़े किए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में पशुओं को किन परिस्थितियों में और किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था। इसके अलावा परिवहन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज क्यों उपलब्ध नहीं थे, इसकी भी जांच की जा रही है।
पुलिस अब पूरे मामले में बरामद पशुओं, दोनों ट्रकों और हिरासत में लिए गए लोगों से जुड़ी जानकारी जुटा रही है। जांच के दौरान यदि किसी बड़े नेटवर्क या अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल डुबुर्डिही चेकपोस्ट के पास हुई इस कार्रवाई को सीमा क्षेत्र में पुलिस की महत्वपूर्ण सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। दो ट्रकों को जब्त कर 28 पशुओं को बरामद किए जाने के बाद अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। पुलिस की आगे की कार्रवाई और पूछताछ में सामने आने वाले तथ्यों से ही स्पष्ट होगा कि इस पूरे मामले के पीछे वास्तविक नेटवर्क क्या था और पशुओं को किस उद्देश्य से झारखंड से कोलकाता की ओर ले जाया जा रहा था।
पशु परिवहन और उससे जुड़े नियमों के पालन को लेकर भी यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सीमा क्षेत्र में पुलिस की सख्ती के बीच अब संदिग्ध वाहनों पर निगरानी और बढ़ने की संभावना है। पुलिस का कहना है कि किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।





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