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आसनसोल-दुर्गापुर

एसआईआर में कटे नाम अब फिर जुड़ेंगे! चुनाव आयोग ने शुरू की नई प्रक्रिया, ऐसे करें आवेदन

Moutushi · 7 October 2026, 2:41 PM

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से बाहर हुए लोगों के लिए बड़ी जानकारी सामने आई है। चुनाव आयोग ने एसआईआर के बाद मतदाता सूची में छूट गए पात्र लोगों को दोबारा शामिल करने के लिए विशेष अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत जिन पात्र मतदाताओं के नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों के कारण सूची से बाहर हो गए हैं, उनके नाम दोबारा शामिल करने के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके साथ ही पहली बार मतदान करने वाले पात्र युवाओं को भी मतदाता सूची में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है।

फॉर्म-6 के जरिए नाम जोड़ने का मौका

चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार पश्चिम बंगाल जैसे उन राज्यों में, जहां एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, पात्र मतदाताओं को लगातार अद्यतन प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। इसके लिए फॉर्म-6 का इस्तेमाल किया जा सकेगा। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को ऐसे लोगों की पहचान करने और उन्हें आवेदन की प्रक्रिया में सहायता देने के निर्देश दिए हैं।

मतदाता ऑनलाइन माध्यम से भी आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पश्चिम बंगाल की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध मतदाता संबंधी सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के माध्यम से भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। जरूरत पड़ने पर बूथ स्तर के अधिकारी यानी बीएलओ से संपर्क कर फॉर्म-6 जमा करने में सहायता ली जा सकती है।

घर-घर जाकर नामों की पहचान करेंगे बीएलओ

इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चुनाव आयोग ने बूथ स्तर के अधिकारियों को घर-घर जाकर ऐसे मतदाताओं की पहचान करने का निर्देश दिया है, जिनके नाम एसआईआर से पहले की मतदाता सूची में मौजूद थे, लेकिन वर्तमान सूची में नहीं हैं।

निर्देश के अनुसार बीएलओ वर्तमान मतदाता सूची की तुलना एसआईआर से पहले वाली सूची से करेंगे। इसके बाद पात्र पाए जाने वाले ऐसे मतदाताओं की सूची तैयार की जाएगी और उन्हें फॉर्म-6 के माध्यम से दोबारा नाम शामिल कराने में मदद की जाएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रत्येक बीएलओ को हर सप्ताह लगभग 20 से 25 ऐसे मतदाताओं को कवर करने और करीब एक महीने में यह प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य दिया गया है।

18 साल पूरे कर चुके युवाओं को भी मौका

यह अभियान केवल एसआईआर के दौरान नाम कटने वाले मतदाताओं तक सीमित नहीं है। पहली बार मतदाता बनने वाले पात्र युवाओं को भी इसका लाभ मिलेगा। जिन नागरिकों की उम्र 18 वर्ष पूरी हो चुकी है और वे मतदाता बनने की सभी जरूरी शर्तें पूरी करते हैं, वे भी फॉर्म-6 के जरिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

चुनाव आयोग की ओर से पश्चिम बंगाल सहित संबंधित राज्यों में ऐसे युवा और पहली बार मतदाता बनने वाले लोगों तक पहुंच बनाने पर भी जोर दिया गया है। इससे आने वाले चुनावों से पहले मतदाता सूची को अधिक व्यापक और अद्यतन बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

बंगाल में लाखों अपील अभी भी लंबित

हालांकि पश्चिम बंगाल में इस नई प्रक्रिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती पहले से लंबित अपीलों की है। एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर बड़ी संख्या में लोगों ने अपील और शिकायतें दर्ज कराई थीं।

चुनाव आयोग ने सितंबर में उच्चतम न्यायालय को बताया था कि पश्चिम बंगाल में नाम हटाने और मतदाता सूची में शामिल करने से संबंधित कुल 38.20 लाख अपीलें दायर हुई थीं, जिनमें से उस समय केवल करीब 1.02 लाख मामलों का निपटारा हुआ था। इससे बड़ी संख्या में लोगों के मामले लंबित रहने की स्थिति सामने आई थी।

इसी बीच एसआईआर से जुड़े अपीलीय न्यायाधिकरणों की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के पोर्टल को लेकर भी सवाल उठे हैं। कुछ न्यायाधीशों ने शिकायत की है कि डिजिटल व्यवस्था के जरिए नाम बहाल करने सहित कुछ जरूरी प्रक्रियाओं में तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही हैं।

फॉर्म-6 को लेकर भी हुई बहस

डिलीट हुए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 के इस्तेमाल को लेकर हाल में कानूनी और प्रशासनिक बहस भी सामने आई। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने इस पर सवाल उठाया था कि फॉर्म-6 सामान्य तौर पर नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए है। इसके जवाब में चुनाव आयोग के अधिकारियों ने पंजीकरण नियमों की संबंधित धाराओं का हवाला देते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 का इस्तेमाल किया जा सकता है।

वहीं, उच्चतम न्यायालय में फॉर्म-6 के बदले हुए प्रारूप को लेकर भी सवाल उठे हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि संशोधित प्रारूप को उच्चतम न्यायालय ने मंजूरी नहीं दी है। हालांकि चुनाव आयोग ने एसआईआर और सामान्य अवधि में इस्तेमाल होने वाले प्रारूपों के बीच अंतर स्पष्ट किया है।

मतदाताओं के लिए क्या जरूरी है?

जिन लोगों को आशंका है कि एसआईआर के दौरान उनका नाम मतदाता सूची से हट गया है, उन्हें सबसे पहले वर्तमान मतदाता सूची में अपना नाम जांचना चाहिए। नाम नहीं मिलने पर संबंधित चुनाव कार्यालय, बीएलओ या आधिकारिक ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए जानकारी प्राप्त की जा सकती है। पात्र होने की स्थिति में फॉर्म-6 के माध्यम से नाम शामिल कराने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

चुनाव आयोग की इस पहल का उद्देश्य एसआईआर के दौरान छूट गए पात्र मतदाताओं और नए पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करना है। ऐसे में मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे केवल आधिकारिक चुनावी माध्यमों से ही आवेदन करें और किसी अनधिकृत व्यक्ति या वेबसाइट को अपने दस्तावेज या निजी जानकारी न दें।

पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ मतदाता सूची में नाम की स्थिति को लेकर यह अभियान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देखना होगा कि विशेष अभियान के दौरान कितने पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा सूची में शामिल होते हैं और लंबित अपीलों का निपटारा किस गति से होता है।

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