नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर इंडिया गठबंधन ने अपना आंदोलन और तेज कर दिया है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाने वाले विपक्षी दल अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने भी अपनी शिकायतें रखना चाहते हैं। गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति भवन को पत्र भेजकर मुलाकात का समय मांगा है। इंडिया गठबंधन की ओर से प्रस्तावित प्रतिनिधिमंडल में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, उमर अब्दुल्ला, शरद पवार, एम. ए. बेबी और तेजस्वी यादव सहित कई प्रमुख नेता शामिल होना चाहते हैं।
राष्ट्रपति से मिलने के लिए भेजा गया पत्र
इंडिया गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने के लिए समय मांगा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर उनकी चिंताओं को संवैधानिक प्रमुख के सामने रखा जाना चाहिए।
गठबंधन की ओर से बुधवार से शुक्रवार के बीच मुलाकात का समय मांगे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, राष्ट्रपति भवन की ओर से पत्र का जवाब मिलने की जानकारी तत्काल सामने नहीं आई थी।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब इंडिया गठबंधन चुनाव आयोग के खिलाफ लगातार राजनीतिक और सार्वजनिक अभियान चला रहा है। गठबंधन के नेताओं ने एसआईआर की प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी लगातार दोहराई जा रही है।
एसआईआर को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
इंडिया गठबंधन के नेताओं का आरोप है कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका है। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी समेत कई विपक्षी नेताओं ने हाल के दिनों में चुनाव आयोग के खिलाफ अपना रुख कड़ा किया है। गठबंधन की ओर से एसआईआर को लेकर विभिन्न सवाल उठाए गए हैं और चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग की गई है।
हालांकि, चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। आयोग ने कहा है कि राजनीतिक दलों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी शिकायतें और प्रतिनिधिमंडल लेकर आना चाहिए। छह अक्टूबर के घटनाक्रम पर आयोग ने यह भी कहा कि शाम चार बजे तक किसी राजनीतिक दल की ओर से उसके सामने औपचारिक मुलाकात का अनुरोध नहीं आया था। बाद में आयोग को पुलिस के माध्यम से पता चला कि विपक्षी सांसदों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल मुलाकात करना चाहता है।
संसद से चुनाव आयोग तक मार्च
राष्ट्रपति से मिलने की तैयारी के बीच इंडिया गठबंधन के सांसदों ने छह अक्टूबर को संसद परिसर से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया। इस मार्च को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर से जुड़ी मांगों के समर्थन में आयोजित किया गया था।
नई दिल्ली में मार्च के दौरान पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड लगाए थे। जब विपक्षी सांसदों को आगे बढ़ने से रोका गया तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। राहुल गांधी ने बैरिकेड पर चढ़कर विरोध जताया और प्रदर्शनकारियों के बीच मौजूद रहे। इस दौरान कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी, महुआ मोइत्रा और डेरेक ओ’ब्रायन सहित कई नेताओं को भी पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी इस विरोध कार्यक्रम से जुड़े रहे।
चुनाव आयोग तक नहीं पहुंच सके तो आकाशवाणी भवन पहुंचे राहुल गांधी
मार्च के दौरान पुलिस की ओर से रास्ता रोके जाने के बाद घटनाक्रम ने अलग मोड़ ले लिया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कुछ कांग्रेस नेता आकाशवाणी भवन परिसर की ओर चले गए। वहां भी शुरुआत में प्रवेश को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी, लेकिन बाद में राहुल गांधी और अन्य नेता परिसर के अंदर पहुंच गए।
इसके बाद आकाशवाणी भवन परिसर में ही विपक्षी नेताओं का धरना शुरू हो गया। कई घंटे तक राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेता वहां बैठे रहे। प्रदर्शनकारियों की संख्या और पुलिस की मौजूदगी के कारण इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
रिपोर्टों के मुताबिक, यह धरना करीब नौ घंटे तक चला। इस दौरान विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी मांगें दोहराईं और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए।
देर शाम पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में लिया
लंबे धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने की कार्रवाई शुरू की। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, डेरेक ओ’ब्रायन, महुआ मोइत्रा और कई अन्य नेताओं को हिरासत में लिया गया। बाद में पुलिस ने राहुल गांधी और अन्य नेताओं को रिहा कर दिया।
इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। वहीं, भाजपा ने विपक्ष के प्रदर्शन की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। इस तरह पूरे घटनाक्रम को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई।
राष्ट्रपति से मुलाकात पर अब नजर
इंडिया गठबंधन की ओर से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए समय मांगना इस पूरे विवाद का अगला महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। गठबंधन के नेता चुनाव आयोग के कामकाज, एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े अपने सवाल राष्ट्रपति के सामने रखना चाहते हैं।
इंडिया गठबंधन पहले ही अक्टूबर महीने में चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा कर चुका है। इसमें चुनाव आयोग तक मार्च, देशभर में लोकतंत्र बचाओ कार्यक्रम और राष्ट्रपति से मुलाकात की कोशिश शामिल है।
अब निगाह राष्ट्रपति भवन के जवाब पर है। यदि प्रतिनिधिमंडल को समय मिलता है, तो राहुल गांधी, ममता बनर्जी और अन्य विपक्षी नेता एसआईआर से जुड़े मुद्दों तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की अपनी मांग राष्ट्रपति के सामने रख सकते हैं।
फिलहाल दिल्ली में चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ओर इंडिया गठबंधन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर रहा है, वहीं चुनाव आयोग अपनी निर्धारित प्रक्रियाओं और संवैधानिक भूमिका पर जोर दे रहा है। आने वाले दिनों में राष्ट्रपति से संभावित मुलाकात और एसआईआर से जुड़े आगे के कदम इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।




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