नई दिल्ली: चुनाव से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाते हुए लाखों मतदाताओं को बड़ी राहत दी है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर ट्रिब्यूनल चुनाव से दो दिन पहले तक किसी मतदाता का नाम सूची में शामिल करने की अनुमति देता है, तो वह व्यक्ति वोट डाल सकेगा।
⚖️ क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग करते हुए कहा—
👉 जिन मतदाताओं के आवेदन अभी विचाराधीन हैं,
👉 और ट्रिब्यूनल उनके नाम को मंजूरी देता है,
तो वे चुनाव से 2 दिन पहले तक भी मतदाता सूची में शामिल होकर वोट दे सकते हैं।
हालांकि, केवल आवेदन करना पर्याप्त नहीं होगा—
👉 ट्रिब्यूनल की मंजूरी अनिवार्य होगी।
🗳️ मतदान की तारीख और समयसीमा
राज्य में चुनाव दो चरणों में होंगे—
- पहला चरण: 23 अप्रैल
- जिनका नाम 21 अप्रैल तक मंजूर होगा, वे वोट डाल सकेंगे
- दूसरा चरण: 29 अप्रैल
- जिनका नाम 27 अप्रैल तक मंजूर होगा, वे मतदान कर सकेंगे
👉 जिन आवेदनों को ट्रिब्यूनल खारिज कर देगा, वे वोट नहीं डाल पाएंगे।
📊 लाखों मतदाताओं के लिए राहत
- कुल 60,06,675 मतदाता विचाराधीन थे
- इनमें से 27,16,393 नाम हटाए गए
- जबकि 32,68,119 नाम फिर से बहाल किए गए
👉 अब बचे हुए मतदाताओं के लिए यह फैसला नई उम्मीद लेकर आया है।
📱 आवेदन की प्रक्रिया आसान
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार—
मतदाता अब इन तरीकों से आवेदन कर सकते हैं:
- ईसीआईनेट मोबाइल ऐप के जरिए
- चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर
- जिला अधिकारी (डीएम) या उप-मंडल अधिकारी (एसडीओ) के कार्यालय में
👉 खास बात: आवेदन के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना जरूरी नहीं है।
👨⚖️ ट्रिब्यूनल की भूमिका
- इस प्रक्रिया के लिए 19 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की टीम बनाई गई है
- ये ट्रिब्यूनल सभी आवेदनों और दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं
- सही पाए जाने पर ही नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा
⚠️ क्यों खास है यह फैसला?
आमतौर पर—
👉 नामांकन की अंतिम तारीख के बाद मतदाता सूची फ्रीज कर दी जाती है
लेकिन इस बार—
👉 सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेष अधिकार का उपयोग करते हुए नियम में बदलाव किया
👉 यह फैसला लोकतंत्र में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
🔍 निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और समावेशिता को मजबूत करता है।
👉 लाखों मतदाताओं के लिए यह एक नई उम्मीद है,
👉 और यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी योग्य नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे।















