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आसनसोल-दुर्गापुर

अभिषेक बनर्जी के करीबी सुमित राय गिरफ्तार, सुप्रीम कोर्ट से राहत खत्म होते ही सीआईडी की कार्रवाई

Moutushi · 11 September 2026, 9:54 AM

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति और शालबनी जमीन मामले में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के आप्त सहायक सुमित राय को सीआईडी ने गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने और पहले मिली गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा हटाए जाने के कुछ ही समय बाद हुई। सीआईडी ने सुमित राय को कालीघाट स्थित उस परिसर से गिरफ्तार किया, जिसे अभिषेक बनर्जी के आवास के रूप में बताया गया है।

सुमित राय की गिरफ्तारी शालबनी में कथित सरकारी जमीन की अवैध बिक्री और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच के सिलसिले में हुई है। सुप्रीम कोर्ट में राज्य की ओर से सुमित पर जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया गया था। वहीं सुमित की ओर से उनके वकीलों ने इन आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया था कि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया है।

सुप्रीम कोर्ट में राहत खत्म, फिर हुई गिरफ्तारी

सुमित राय ने कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत नहीं दिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। शीर्ष अदालत ने पहले उन्हें अंतरिम सुरक्षा दी थी और जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था। 10 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी और पहले की गिरफ्तारी-रोधक राहत को हटा दिया।

अदालत में राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील रखी कि सुमित राय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। राज्य का कहना था कि जांच के दौरान सुमित कई सवालों के जवाब देने से बचते रहे और उनके कथित वित्तीय लेनदेन की जांच जरूरी है।

करीब 15 करोड़ रुपये के लेनदेन का दावा

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से सुमित राय से जुड़े बैंक खातों में लगभग 15 करोड़ रुपये की रकम जमा होने का दावा किया गया। राज्य ने इन लेनदेन के स्रोत और उनके मामले से संभावित संबंध की जांच की आवश्यकता बताई। रिपोर्टों के अनुसार, इसी वित्तीय पहलू को लेकर जांच एजेंसी ने सुमित से कई सवाल किए थे।

राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि पूछताछ के दौरान सुमित कथित तौर पर कई महत्वपूर्ण सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे थे। इसी आधार पर जांच एजेंसी ने उनकी हिरासत में पूछताछ की जरूरत बताई। हालांकि सुमित के वकीलों ने राज्य के इस दावे को चुनौती दी।

सुमित के वकीलों ने लगाया अलग आरोप

सुमित राय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपालशंकर नारायण और अधिवक्ता अयन भट्टाचार्य ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल ने जांच में सहयोग किया है। बचाव पक्ष के अनुसार, सुमित से कई घंटे तक पूछताछ हो चुकी है और पूछताछ की प्रक्रिया का रिकॉर्ड भी मौजूद है।

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि जांच के दौरान सुमित से ऐसे सवाल पूछे गए जो उनके खिलाफ दर्ज मामले से सीधे संबंधित नहीं थे। वकीलों ने आरोप लगाया कि उन्हें किसी दूसरे व्यक्ति या राजनीतिक गतिविधि से जोड़ने के उद्देश्य से पूछताछ की जा रही है। उन्होंने जांच को कथित रूप से ‘फिशिंग एंड रोविंग इंक्वायरी’ यानी बिना स्पष्ट आधार के अलग-अलग दिशाओं में जानकारी तलाशने वाली जांच बताया।

इस तरह मामले में दोनों पक्षों की दलीलें बिल्कुल अलग रही हैं। राज्य का कहना है कि वित्तीय लेनदेन और पूछताछ में कथित असहयोग के कारण हिरासत जरूरी है, जबकि बचाव पक्ष जांच में सहयोग का दावा कर रहा है।

पूछताछ के रिकॉर्ड भी बने महत्वपूर्ण आधार

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में सुमित राय से हुई पूछताछ के लिखित रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज भी महत्वपूर्ण रहे। अदालत ने पहले जांच के दौरान उनसे पूछे गए सवालों और उनके जवाबों से संबंधित रिकॉर्ड देखने की इच्छा जताई थी। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से संबंधित दस्तावेज अदालत के सामने रखे गए।

अदालत के समक्ष रखे गए इन रिकॉर्ड के आधार पर सुमित की ओर से जांच में सहयोग करने के दावे और राज्य की ओर से लगाए गए असहयोग के आरोपों पर विचार हुआ। अंततः शीर्ष अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया और गिरफ्तारी पर मिली अंतरिम सुरक्षा को समाप्त कर दिया।

कालीघाट में सीआईडी और एसटीएफ की कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सीआईडी और एसटीएफ की टीम कालीघाट पहुंची। रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारियों ने अभिषेक बनर्जी से जुड़े कालीघाट परिसर में पहुंचकर सुमित राय को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें पहले सीआईडी मुख्यालय भवानी भवन ले जाया गया। इसके बाद उनकी चिकित्सकीय जांच भी कराई गई।

अभिषेक बनर्जी उस समय देश में मौजूद नहीं थे और विदेश में इलाज के लिए गए होने की खबरें सामने आई हैं। गिरफ्तारी के बाद कालीघाट इलाके में सुरक्षा व्यवस्था भी चर्चा का विषय बनी रही।

शुक्रवार को अदालत में पेशी की तैयारी

गिरफ्तारी के बाद अब सुमित राय को अदालत में पेश किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, सीआईडी उनसे मामले में हिरासत में पूछताछ की मांग कर सकती है, ताकि कथित जमीन लेनदेन और उससे जुड़े वित्तीय रास्ते की जांच की जा सके।

शालबनी जमीन मामले में जांच एजेंसी सरकारी जमीन की कथित बिक्री और उससे जुड़े धन के लेनदेन की पड़ताल कर रही है। इसलिए सुमित राय की गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

सुमित राय की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी खेमे ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बताया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस से जुड़े नेताओं की ओर से मामले को राजनीतिक नजरिए से देखे जाने के आरोप पहले सामने आते रहे हैं।

हालांकि किसी भी आरोप की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। सुमित राय की गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। अब अदालत में आगे की सुनवाई और सीआईडी की जांच से यह स्पष्ट होगा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों में कौन-कौन से तथ्य प्रमाणित होते हैं।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत खारिज किए जाने, गिरफ्तारी पर अंतरिम सुरक्षा हटने और उसके तुरंत बाद कालीघाट से सुमित राय की गिरफ्तारी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। शालबनी जमीन मामले की जांच अब किस दिशा में जाती है और पूछताछ के दौरान कौन-कौन से नए तथ्य सामने आते हैं, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।

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