Thursday, 10 September 2026
Advertisement
ब्रेकिंग न्यूज़
₹20 हजार की रिश्वत लेते ईसीएल अधिकारी गिरफ्तार, सीबीआई की कार्रवाई से मचा हड़कंप आसनसोल में जोमैटो डिलीवरी कर्मचारियों का काम बंद, कम पेआउट को लेकर भड़का विरोध नियामतपुर में गूंजा भक्ति का जयकारा, श्याम दादी मंदिर की विशाल कलश यात्रा ने मोहा मन बागेश्वर बाबा के पोस्टर जलाने पर भड़का भाजपा युवा मोर्चा, आसनसोल में कांग्रेस के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन तेज बारिश में अनियंत्रित होकर पलटी मिनीबस, एक महिला और बच्चा घायल; नियामतपुर में मचा हड़कंप दुर्गापूजा से पहले आसनसोल को बड़ी राहत! भगत २ मोड़ से जुबली मोड़ तक सड़क की मरम्मत जल्द ₹20 हजार की रिश्वत लेते ईसीएल अधिकारी गिरफ्तार, सीबीआई की कार्रवाई से मचा हड़कंप आसनसोल में जोमैटो डिलीवरी कर्मचारियों का काम बंद, कम पेआउट को लेकर भड़का विरोध नियामतपुर में गूंजा भक्ति का जयकारा, श्याम दादी मंदिर की विशाल कलश यात्रा ने मोहा मन बागेश्वर बाबा के पोस्टर जलाने पर भड़का भाजपा युवा मोर्चा, आसनसोल में कांग्रेस के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन तेज बारिश में अनियंत्रित होकर पलटी मिनीबस, एक महिला और बच्चा घायल; नियामतपुर में मचा हड़कंप दुर्गापूजा से पहले आसनसोल को बड़ी राहत! भगत २ मोड़ से जुबली मोड़ तक सड़क की मरम्मत जल्द
आसनसोल-दुर्गापुर

आसनसोल में जोमैटो डिलीवरी कर्मचारियों का काम बंद, कम पेआउट को लेकर भड़का विरोध

Moutushi · 10 September 2026, 5:24 PM

आसनसोल: पश्चिम बर्दवान के आसनसोल में ऑनलाइन भोजन डिलीवरी सेवा से जुड़े कर्मचारियों के विरोध ने अचानक जोर पकड़ लिया। जोमैटो के कई डिलीवरी कर्मचारियों ने भुगतान यानी पेआउट कम किए जाने के आरोप में एक साथ काम बंद कर दिया। कर्मचारियों के सामूहिक रूप से काम रोकने के कारण शहर में जोमैटो की डिलीवरी सेवा प्रभावित होने की स्थिति बनी और ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। डिलीवरी कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मेहनत और काम के अनुपात में मिलने वाले भुगतान में कमी की गई है, जिससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है।

कर्मचारियों के अनुसार, डिलीवरी का काम करने वाले लोगों की कमाई काफी हद तक प्रत्येक डिलीवरी के बदले मिलने वाले भुगतान, दूरी, समय और काम की उपलब्धता पर निर्भर करती है। ऐसे में यदि भुगतान की दर में कमी होती है, तो इसका सीधा प्रभाव उनकी दैनिक और मासिक आय पर पड़ता है। इसी मुद्दे को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ी और उन्होंने सामूहिक रूप से काम बंद करने का फैसला किया।

कम पेआउट को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी

डिलीवरी कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कंपनी की ओर से पहले जिस दर पर उन्हें भुगतान मिलता था, उसमें कमी कर दी गई है। कर्मचारियों का कहना है कि ईंधन, वाहन के रखरखाव, मोबाइल फोन, इंटरनेट और अन्य रोजमर्रा के खर्चों के बीच कम भुगतान पर काम करना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है।

डिलीवरी कर्मचारी अपने निजी दोपहिया वाहनों के माध्यम से अलग-अलग इलाकों में ग्राहकों तक भोजन पहुंचाते हैं। इस दौरान उन्हें लगातार सड़क पर रहना पड़ता है। दूरी अधिक होने पर ईंधन का खर्च भी बढ़ता है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि प्रति डिलीवरी मिलने वाली राशि कम कर दी जाती है, तो केवल डिलीवरी की संख्या बढ़ाकर पहले जैसी कमाई करना भी आसान नहीं रहता।

इसी वजह से कर्मचारियों ने अपनी मांग को लेकर एकजुट होकर काम बंद करने का निर्णय लिया। अचानक बड़ी संख्या में डिलीवरी कर्मचारियों के काम से हटने का असर ऑनलाइन भोजन आपूर्ति व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा।

काम बंद होने से ग्राहकों की परेशानी बढ़ी

डिलीवरी कर्मचारियों के काम बंद करने के कारण जोमैटो की सेवा प्रभावित होने की बात सामने आई। ऑनलाइन भोजन मंगाने वाले ग्राहकों को डिलीवरी मिलने में देरी का सामना करना पड़ा। हालांकि हर क्षेत्र में इसका असर कितना रहा, यह अलग-अलग हो सकता है, लेकिन कर्मचारियों के सामूहिक विरोध ने शहर में डिलीवरी व्यवस्था को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी।

ऑनलाइन भोजन डिलीवरी अब शहरी जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। बड़ी संख्या में लोग घर, कार्यालय और अन्य स्थानों से मोबाइल ऐप के माध्यम से भोजन मंगाते हैं। ऐसी स्थिति में डिलीवरी कर्मचारियों की हड़ताल या काम बंद होने से पूरी आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। ग्राहक के मोबाइल ऐप पर ऑर्डर स्वीकार होने के बाद भोजन तैयार करने से लेकर उसे ग्राहक तक पहुंचाने की जिम्मेदारी डिलीवरी कर्मचारी की होती है। इसलिए कर्मचारियों की संख्या कम होने पर पूरी व्यवस्था पर असर पड़ना स्वाभाविक है।

कंपनी के अधिकारी मौके पर पहुंचे, बातचीत से समाधान की कोशिश

कर्मचारियों के अनुसार, उनके विरोध की जानकारी मिलने के बाद कंपनी की ओर से अधिकारी मौके पर पहुंचे और डिलीवरी कर्मचारियों से बातचीत की। इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी समस्याएं और भुगतान से जुड़ी मांगें अधिकारियों के सामने रखीं।

बताया गया कि कंपनी के अधिकारियों ने कर्मचारियों की मांगों पर विचार करने के लिए 48 घंटे का समय लिया है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने फिलहाल कंपनी को अपनी मांगों पर विचार करने का अवसर दिया है। अब उनकी नजर इस बात पर है कि निर्धारित समय के भीतर कंपनी की ओर से क्या कदम उठाया जाता है।

यह बातचीत इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कर्मचारियों का विरोध सीधे तौर पर उनकी आय और काम करने की परिस्थितियों से जुड़ा हुआ है। यदि बातचीत के माध्यम से समाधान निकलता है, तो डिलीवरी सेवा सामान्य हो सकती है। वहीं, यदि कर्मचारियों की मांगों पर सहमति नहीं बनती है, तो आंदोलन दोबारा तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

रविवार से फिर आंदोलन की चेतावनी

डिलीवरी कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं हुआ, तो वे रविवार से दोबारा आंदोलन शुरू करेंगे। यानी फिलहाल कंपनी को दिए गए समय के दौरान कर्मचारियों की निगाहें प्रबंधन के फैसले पर टिकी रहेंगी।

कर्मचारियों के इस रुख से साफ है कि मामला केवल एक दिन के विरोध तक सीमित नहीं रह सकता। यदि भुगतान से जुड़ा विवाद बातचीत के जरिए हल नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में आसनसोल में ऑनलाइन भोजन डिलीवरी सेवा पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

डिलीवरी कर्मचारियों की आय का मुद्दा बना केंद्र

इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू डिलीवरी कर्मचारियों की आय है। ऐप आधारित काम में भुगतान की संरचना में छोटे बदलाव का भी कर्मचारियों की कुल कमाई पर प्रभाव पड़ सकता है। डिलीवरी कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय तक सड़क पर काम करते हैं और इसके बावजूद यदि प्रति डिलीवरी भुगतान घटता है, तो उनकी वास्तविक कमाई कम हो जाती है।

दूसरी ओर, किसी भी डिजिटल डिलीवरी व्यवस्था में भुगतान, प्रोत्साहन और काम की उपलब्धता से जुड़े नियम कंपनी की व्यवस्था के अनुसार तय होते हैं। ऐसे में कर्मचारियों और कंपनी के बीच बातचीत के जरिए स्पष्टता आना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल कर्मचारियों द्वारा लगाए गए कम पेआउट के आरोप और कंपनी द्वारा इस पर लिया जाने वाला निर्णय इस विवाद के केंद्र में है।

अब 48 घंटे पर टिकी निगाहें

आसनसोल में जोमैटो डिलीवरी कर्मचारियों के काम बंद करने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगले 48 घंटे में कंपनी और कर्मचारियों के बीच क्या समाधान निकलता है। कर्मचारियों ने अपनी मांगों पर विचार के लिए कंपनी को समय दिया है, लेकिन साथ ही रविवार से फिर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी है।

यदि बातचीत सफल होती है और भुगतान से संबंधित कर्मचारियों की मांगों पर कोई रास्ता निकलता है, तो स्थिति सामान्य हो सकती है। लेकिन यदि समाधान नहीं निकलता है, तो दोबारा काम बंद होने से ग्राहकों, रेस्तरां और डिलीवरी व्यवस्था से जुड़े अन्य लोगों पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल आसनसोल में जोमैटो डिलीवरी कर्मचारियों का यह विरोध कम पेआउट के आरोप से शुरू होकर 48 घंटे की समय-सीमा और रविवार से संभावित दोबारा आंदोलन तक पहुंच गया है। अब सभी की निगाहें कंपनी के अगले कदम और कर्मचारियों के साथ होने वाली बातचीत के परिणाम पर टिकी हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर उचित फैसला नहीं होने की स्थिति में वे अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए मजबूर होंगे।

 

Advertisement