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आसनसोल-दुर्गापुर

बागेश्वर बाबा की तस्वीर जलाने पर कांग्रेस नेता गिरफ्तार, शुभेंदु के निर्देश के बाद मचा सियासी घमासान

Moutushi · 11 September 2026, 10:30 AM

कोलकाता: बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री, जिन्हें बागेश्वर बाबा के नाम से भी जाना जाता है, से जुड़े विवाद ने अब पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ले लिया है। भवानीपुर में उनके बयान के विरोध में प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर उनकी तस्वीर जलाने के मामले में कांग्रेस नेता अतनु दास को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस के महासचिव अतनु दास को गुरुवार रात उनके टॉलीगंज स्थित घर से गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई विधानसभा में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा पुलिस को कार्रवाई का निर्देश दिए जाने के कुछ ही घंटे बाद हुई।

गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस ने सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि राजनीतिक विरोध प्रदर्शन के दौरान तस्वीर या पुतला जलाने की घटनाएं पहले भी होती रही हैं, लेकिन हर मामले में इस तरह की कार्रवाई नहीं की गई। वहीं, सरकार का रुख स्पष्ट है कि सार्वजनिक रूप से किसी व्यक्ति की तस्वीर जलाने जैसी घटना को कानून-व्यवस्था के नजरिए से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

बागेश्वर बाबा के बयान से शुरू हुआ विवाद

पूरा विवाद बागेश्वर बाबा के हालिया पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान दिए गए एक बयान से शुरू हुआ। धीरेंद्र शास्त्री राज्य में कई कार्यक्रमों में शामिल हुए थे। इसी दौरान एक कार्यक्रम में उन्होंने दुर्गापूजा के दौरान बंगालियों के मांसाहारी भोजन करने की आदत पर टिप्पणी की थी।

बताया गया कि उनके बयान में मांसाहारी भोजन करने वाले लोगों को ‘पाखंडी’ और ‘ढोंगी’ जैसे शब्दों से संबोधित किया गया। इस टिप्पणी के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध शुरू हो गया। कांग्रेस समेत कई लोगों ने इसे बंगाली समाज की भावनाओं से जोड़ते हुए आपत्तिजनक बताया।

खास बात यह रही कि बागेश्वर बाबा के बयान से कुछ भाजपा नेताओं ने भी दूरी बनाई। भाजपा की ओर से स्पष्ट किया गया कि बाबा के व्यक्तिगत बयान से पार्टी का समर्थन या सहमति जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

भवानीपुर में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

बयान के विरोध में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भवानीपुर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान बागेश्वर बाबा की तस्वीर लेकर नारेबाजी की गई। इसी प्रदर्शन के दौरान उनकी तस्वीर जलाए जाने का आरोप सामने आया।

मामला यहीं नहीं रुका। तस्वीर जलाए जाने की घटना राजनीतिक विवाद का विषय बन गई और बाद में यह मुद्दा विधानसभा तक पहुंच गया। सरकार ने इसे कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला बताते हुए पुलिस कार्रवाई के संकेत दिए।

विधानसभा से शुभेंदु अधिकारी का पुलिस को निर्देश

गुरुवार को विधानसभा में इस मामले का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस अधिकारियों को कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, “मैंने कितने लोगों को देखा, भवानीपुर में थाने के सामने तस्वीर जलाई है। मैं यहां से सीपी को कह रहा हूं, उन लोगों को गिरफ्तार करना होगा। इस राज्य में यह सब नहीं चलेगा।”

मुख्यमंत्री के इस बयान के कुछ घंटों बाद ही भवानीपुर थाने की पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कांग्रेस नेता अतनु दास को उनके टॉलीगंज स्थित घर से गिरफ्तार कर लिया।

इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को और तेज कर दिया है। विपक्ष की ओर से सवाल उठाया जा रहा है कि क्या किसी राजनीतिक प्रदर्शन में तस्वीर जलाने की घटना के खिलाफ कार्रवाई का फैसला सरकार के निर्देश पर इतनी तेजी से किया जाना उचित है।

कांग्रेस ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

अतनु दास की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस नेता प्रदीप प्रसाद ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि बागेश्वर बाबा ने बंगाली समुदाय के बारे में टिप्पणी की थी और कांग्रेस ने उसी के विरोध में प्रदर्शन किया।

प्रदीप प्रसाद का कहना है कि यदि बंगाली समाज के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की जाती है तो जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों को उसका विरोध करने का अधिकार है। उनके मुताबिक, विरोध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पहले उस बयान पर चर्चा होनी चाहिए थी जिसके कारण प्रदर्शन हुआ।

उन्होंने पुराने राजनीतिक उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि अतीत में ज्योति बसु, बुद्धदेव भट्टाचार्य, अटल बिहारी वाजपेयी और ममता बनर्जी के पुतले तक जलाए गए हैं। उनके अनुसार, उन घटनाओं में इस तरह की कार्रवाई नहीं हुई थी।

प्रदीप प्रसाद ने कहा कि यदि तस्वीर जलाने के मामले में गिरफ्तारी की जाती है तो सरकार को सभी समान मामलों में एक जैसा कानून लागू करना चाहिए। उन्होंने पुलिस की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पुलिस हर मामले में समान तरीके से कार्रवाई नहीं करती।

सरकार और कांग्रेस के बीच बढ़ सकता है टकराव

अतनु दास की गिरफ्तारी ने कांग्रेस और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक टकराव को नया मुद्दा दे दिया है। कांग्रेस इसे अभिव्यक्ति और राजनीतिक विरोध से जोड़ रही है, जबकि सरकार इसे सार्वजनिक व्यवस्था और कानून के उल्लंघन के नजरिए से देख रही है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है, क्योंकि इसमें धार्मिक भावनाएं, बंगाली अस्मिता, राजनीतिक विरोध और कानून-व्यवस्था जैसे कई मुद्दे एक साथ जुड़ गए हैं।

तस्वीर जलाने की घटना पर कानूनी सवाल भी अहम

किसी सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति की तस्वीर या पुतला जलाने की घटना को लेकर परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग कानूनी पहलू सामने आ सकते हैं। यदि पुलिस को लगता है कि किसी घटना से कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई या किसी अन्य कानूनी प्रावधान का उल्लंघन हुआ, तो जांच के बाद कार्रवाई की जा सकती है।

हालांकि, इस मामले में अंतिम रूप से क्या आरोप लगाए गए हैं और तस्वीर जलाने की घटना में अतनु दास की कथित भूमिका क्या रही, इसका निर्धारण पुलिस जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया से होगा। गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।

बयान से गिरफ्तारी तक पहुंचा मामला

पूरे घटनाक्रम को देखें तो कुछ ही समय में मामला कई चरणों से गुजर चुका है। पहले बागेश्वर बाबा का बयान सामने आया, उसके बाद कांग्रेस की ओर से विरोध प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शन के दौरान तस्वीर जलाने का आरोप लगा। इसके बाद मामला विधानसभा में उठा और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस को कार्रवाई का निर्देश दिया। कुछ घंटों के भीतर कांग्रेस नेता अतनु दास की गिरफ्तारी हो गई।

अब कांग्रेस इस गिरफ्तारी को लेकर सरकार पर निशाना साध रही है, जबकि पुलिस मामले की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के दौरान पुलिस को क्या तथ्य मिलते हैं और क्या इस मामले में अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होती है।

फिलहाल बागेश्वर बाबा की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद गिरफ्तारी तक पहुंच चुका है। एक ओर कांग्रेस इसे बंगाली समाज के सम्मान से जोड़कर विरोध को जायज बता रही है, तो दूसरी ओर सरकार तस्वीर जलाने की घटना को कानून-व्यवस्था का विषय मान रही है। इस पूरे विवाद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोर्चा खोल दिया है और आने वाले दिनों में इसके और गरमाने के आसार हैं।

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