कोलकाता: पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और गायक इंद्रनील सेन से जुड़े ‘मास आर्ट’ मामले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक अहम वित्तीय लेनदेन का दावा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इंद्रनील सेन की कंपनी ‘ऑक्टेव रिकॉर्ड्स’ के बैंक खाते से तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खाते में करीब 30 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। ईडी ने गुरुवार को जारी विज्ञप्ति में इस लेनदेन का उल्लेख किया। पूछताछ के दौरान इंद्रनील सेन ने कथित तौर पर इस राशि को रॉयल्टी के रूप में दिया गया भुगतान बताया। इस मामले में उन्हें अगले सप्ताह फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
ईडी की ओर से सामने आई जानकारी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि एजेंसी ने फिलहाल इस लेनदेन का उल्लेख अपनी जांच के हिस्से के रूप में किया है। केवल बैंक खाते में रकम ट्रांसफर होने से किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध साबित नहीं होता। भुगतान की प्रकृति, उसका उद्देश्य और उससे जुड़े दस्तावेज जांच के महत्वपूर्ण विषय हैं।
इंद्रनील सेन और उनकी कंपनी के खातों में जमा हुए 3.8 करोड़ रुपये
ईडी के मुताबिक, इंद्रनील सेन के मंत्री रहने के दौरान उनके और उनकी स्वामित्व वाली कंपनी ‘ऑक्टेव रिकॉर्ड्स’ के बैंक खातों में कुल 3.8 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी जमा हुई थी। जांच एजेंसी ने इस रकम के स्रोत और उसके बाद हुए लेनदेन की पड़ताल की है। इसी वित्तीय जांच के दौरान कंपनी के खाते से ममता बनर्जी के बैंक खाते में करीब 30 लाख रुपये भेजे जाने की जानकारी सामने आई।
पूछताछ के दौरान जब इंद्रनील सेन से इस भुगतान के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे रॉयल्टी की राशि बताया। यानी उनके अनुसार, यह भुगतान किसी रॉयल्टी संबंधी लेनदेन के तहत किया गया था। अब जांच एजेंसी इस स्पष्टीकरण से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल कर सकती है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, ईडी ने अपनी विज्ञप्ति में इस भुगतान को अपने आप में आपराधिक लेनदेन घोषित नहीं किया है।
85 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी टेंडर भी जांच के दायरे में
इस मामले में ईडी की जांच केवल 30 लाख रुपये के लेनदेन तक सीमित नहीं है। एजेंसी ने इंद्रनील सेन के मंत्री रहते पर्यटन और संस्कृति विभाग की ओर से दिए गए कुछ टेंडरों पर भी सवाल उठाए हैं। ईडी का दावा है कि 85 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के कई टेंडर ध्रुवज्योति बोस और दीपेश राय से जुड़ी कंपनियों को दिए गए थे।
जांच एजेंसी के अनुसार, इन दोनों को इंद्रनील सेन का करीबी सहयोगी बताया जाता है। आरोप है कि संबंधित कंपनियों के बैंक खातों से बाद में इंद्रनील सेन के रिश्तेदारों की अलग-अलग कंपनियों में बड़ी रकम ट्रांसफर की गई। ईडी इन लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने और धन के अंतिम इस्तेमाल का पता लगाने में जुटी है।
इन आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही हो सकेगी। टेंडर जारी करने की प्रक्रिया, कंपनियों की पात्रता, भुगतान और उसके बाद हुए वित्तीय हस्तांतरण इस जांच के प्रमुख पहलू माने जा रहे हैं।
29 सितंबर को 15 ठिकानों पर हुई थी तलाशी
‘मास आर्ट’ मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच के तहत ईडी ने 29 सितंबर को कोलकाता में 15 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 17 के तहत की गई थी। तलाशी के दायरे में इंद्रनील सेन और उनसे जुड़े लोगों के आवास तथा कार्यालय भी शामिल थे।
ईडी का आरोप है कि ‘मास आर्ट’ नामक संस्था ने दुर्गापूजा के प्रीव्यू शो के आयोजन के दौरान वित्तीय अनियमितताएं कीं। एजेंसी के अनुसार, इंद्रनील सेन, उनकी पत्नी मधुचंदा सेन, ध्रुवज्योति बोस, सायंतन मैत्र और रंजन चट्टोपाध्याय सहित कुछ अन्य लोगों ने खुद को यूनेस्को से मान्यता प्राप्त संस्था के रूप में पेश किया था। आरोप है कि वर्ष 2022 से 2025 के बीच लोगों से बड़ी रकम जुटाई गई और बाद में उसका इस्तेमाल निजी हितों के लिए किया गया।
दुर्गापूजा के प्रीव्यू शो के नाम पर टिकट बेचने का आरोप
ईडी के अनुसार, वर्ष 2021 में कोलकाता की दुर्गापूजा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की मान्यता मिलने के बाद ‘मास आर्ट’ संस्था बनाई गई थी। संस्था पर आरोप है कि उसने कोलकाता के 24 चयनित दुर्गापूजा पंडालों के भ्रमण के लिए प्रीव्यू शो के नाम पर टिकट बेचे।
इन टिकटों की कीमत 1,749 रुपये से लेकर 5,499 रुपये तक बताई गई है। जांच एजेंसी का दावा है कि संस्था का यूनेस्को से कोई आधिकारिक संबंध नहीं था, लेकिन लोगों के बीच ऐसी छवि पेश करके टिकटों की बिक्री की गई। ईडी इस बात की भी जांच कर रही है कि संस्था ने टिकटों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया।
एजेंसी के मुताबिक, केवल 2023 और 2024 के दौरान ‘मास आर्ट’ ने एक लाख से अधिक टिकट बेचे थे। इन टिकटों से प्राप्त धन और उससे जुड़े बैंक लेनदेन की जांच की जा रही है। इस मामले में यूनेस्को के नाम और पहचान के कथित इस्तेमाल को भी जांच का अहम हिस्सा बनाया गया है।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच, अगली पूछताछ पर नजर
इस मामले में इंद्रनील सेन के खिलाफ जॉयदीप मुखोपाध्याय ने बोउबाजार थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। बाद में कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच ईडी ने अपने हाथ में ली।
अब तक की कार्रवाई में तलाशी, दस्तावेजों की जांच और पूछताछ के जरिए एजेंसी वित्तीय लेनदेन का पूरा विवरण जुटाने का प्रयास कर रही है। इंद्रनील सेन को अगले सप्ताह फिर पूछताछ के लिए बुलाए जाने की जानकारी सामने आई है। इस दौरान 30 लाख रुपये के भुगतान, 3.8 करोड़ रुपये से अधिक की जमा राशि और टेंडर से जुड़े आरोपों पर उनसे अतिरिक्त सवाल पूछे जा सकते हैं।
फिलहाल इस पूरे मामले में ईडी के दावों, इंद्रनील सेन के रॉयल्टी संबंधी स्पष्टीकरण और संबंधित कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड पर सबकी नजर है। जांच पूरी होने और दस्तावेजों की पुष्टि के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित वित्तीय अनियमितताओं में किन लोगों की क्या भूमिका रही और धन का वास्तविक इस्तेमाल किस प्रकार हुआ।




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