लेफ्ट बैंक: मानसून के बीच दामोदर वैली कॉरपोरेशन (डीवीसी) द्वारा चलाए जा रहे बुलडोज़र अभियान ने सैकड़ों परिवारों की ज़िंदगी को संकट में डाल दिया है। शनिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दो बुलडोज़रों की मदद से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई फिर से शुरू की गई, जिससे पूरे इलाके में भय और अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
🚨 फिर शुरू हुआ ध्वस्तीकरण अभियान
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस अभियान की शुरुआत 15 जून को हुई थी, जब शुरुआती चरण में पांच मकानों को तोड़ा गया था। इसके बाद स्थानीय लोगों के अनुरोध पर बाराबनी के विधायक अरिजीत रॉय ने डीवीसी अधिकारियों से बातचीत कर एक महीने की मोहलत दिलाई थी, ताकि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जा सके।
👉 लेकिन निर्धारित समय सीमा समाप्त होते ही डीवीसी ने फिर से सख्त कार्रवाई शुरू कर दी।
👮 भारी सुरक्षा के बीच कार्रवाई
शनिवार सुबह से ही इलाके में—
- राज्य पुलिस
- डीवीसी के सुरक्षा कर्मी
की भारी तैनाती की गई थी। सुरक्षा घेरे में एक-एक कर मकानों को गिराया गया।
👉 स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस दौरान कई पेड़ों को भी नुकसान पहुंचा, जिससे पर्यावरणीय चिंता भी बढ़ गई है।
🏠 110 मकान होंगे ध्वस्त
डीवीसी के एक डिप्टी जनरल मैनेजर (डीजीएम) ने जानकारी दी कि—
👉 लेफ्ट बैंक क्षेत्र में कुल 110 मकानों को हटाने का फैसला लिया गया है
👉 यह अभियान चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा
😢 22 साल पुराना बसेरा उजड़ने की कगार पर
स्थानीय निवासियों का कहना है कि—
👉 वे पिछले 22 वर्षों से यहां रह रहे हैं
👉 इस इलाके में 450 से अधिक परिवार बसे हुए हैं
उनका आरोप है कि राज्य में सरकार बदलने के बाद से ही उन्हें हटाने की कोशिशें तेज हो गई थीं।
⚠️ बारिश में बेघर होने का डर
मानसून के बीच मकान टूटने से लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
एक स्थानीय निवासी ने भावुक होकर कहा—
👉 “हम 22 साल से यहां रह रहे हैं। इतनी कम मोहलत में हमें बेघर कर दिया गया। अब हमारे परिवार के रहने की कोई व्यवस्था नहीं है।”
❗ मानवीय संकट की आशंका
इस कार्रवाई के बाद इलाके में—
- बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के सामने आश्रय का संकट
- भोजन और दैनिक जरूरतों की कमी का खतरा
मंडराने लगा है।
🔍 पुनर्वास की मांग तेज
प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से मांग की है कि—
👉 बिना वैकल्पिक आवास दिए इस तरह की कार्रवाई रोकी जाए
👉 पुनर्वास की स्पष्ट योजना बनाई जाए
🚨 आगे क्या?
फिलहाल ध्वस्तीकरण अभियान जारी है, लेकिन हालात को देखते हुए
👉 आंदोलन या विरोध प्रदर्शन की संभावना भी बढ़ रही है
👉 मानसून के इस मौसम में चलाया जा रहा यह अभियान अब सिर्फ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं, बल्कि एक बड़ा मानवीय मुद्दा बनता जा रहा है।

