आसनसोल: बारुईपुर कोर्ट में एक अधिवक्ता पर हुए कथित हमले के विरोध में सोमवार को आसनसोल कोर्ट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया गया। सैकड़ों की संख्या में काला कोट पहने अधिवक्ता कोर्ट परिसर के बाहर एकजुट हुए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने बारुईपुर की घटना में कथित रूप से शामिल लोगों की गिरफ्तारी और अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
प्रदर्शन का नेतृत्व वरिष्ठ अधिवक्ता सनातन धारा, शेखर कुंडू, राजेश्वर शर्मा और रेबल इस्लाम समेत अन्य अधिवक्ताओं ने किया। बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं के एक साथ सामने आने से कोर्ट परिसर में काफी हलचल देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अदालत में अपने मुवक्किलों की पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं को सुरक्षित वातावरण मिलना जरूरी है और कोर्ट परिसर में किसी भी तरह की हिंसा को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
जमानत मिलने के बाद वकील पर हमले का आरोप
प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं के मुताबिक, कुछ दिन पहले बारुईपुर कोर्ट में एक वकील अपने मुवक्किल की ओर से पैरवी करने पहुंचे थे। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने संबंधित मुवक्किल को जमानत दे दी। अधिवक्ताओं का आरोप है कि जमानत मिलने के बाद कोर्ट परिसर में ही पुलिस की मौजूदगी में कुछ लोगों ने संबंधित वकील पर कथित रूप से हमला कर दिया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि घटना उस स्थान पर हुई, जहां पुलिसकर्मी भी मौजूद थे। इस वजह से अधिवक्ताओं के बीच नाराजगी और बढ़ गई। उनका आरोप है कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने कथित हमलावरों को पकड़ने के बजाय उन्हें बचाने की कोशिश की। अधिवक्ताओं ने यह भी दावा किया कि पुलिस की ओर से वहां मौजूद वकीलों को अंदर चले जाने के लिए कहा गया।
घटना को लेकर अधिवक्ताओं ने वीडियो और टेलीविजन फुटेज सामने आने का भी दावा किया है। हालांकि, घटना के सभी पहलुओं और पुलिस की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
“वकील का कोई रंग नहीं होता”, बोले सनातन धारा
प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता सनातन धारा ने वकीलों की भूमिका और सुरक्षा को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वकील की कोई राजनीतिक पहचान नहीं होती और जब वह काला कोट पहनकर अदालत में काम करता है, तो उसकी पहचान सिर्फ एक अधिवक्ता की होती है।
सनातन धारा के अनुसार, अधिवक्ता का काम अपने मुवक्किल की ओर से कानूनी पैरवी करना है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने जिस व्यक्ति को उचित समझा, उसे जमानत दी। इसके बाद उसी मामले से जुड़े घटनाक्रम में कोर्ट परिसर के अंदर वकील पर कथित हमला होना गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना से अधिवक्ताओं के बीच भय का माहौल पैदा हुआ है। उन्होंने सरकार और पुलिस प्रशासन से मांग की कि मामले में शामिल लोगों की पहचान कर जल्द से जल्द गिरफ्तारी की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की जाए।
अधिवक्ताओं की सुरक्षा पर उठे सवाल
आसनसोल कोर्ट में हुए प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने कहा कि न्यायालय परिसर में अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी, मुवक्किल और आम लोग मौजूद रहते हैं। ऐसे स्थान पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही चिंता का विषय बन सकती है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अधिवक्ता कई बार संवेदनशील मामलों में अलग-अलग पक्षों की कानूनी पैरवी करते हैं। इसलिए उनके पेशेवर कार्य को किसी व्यक्तिगत विवाद या दबाव से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। अधिवक्ताओं ने प्रशासन से मांग की कि कोर्ट परिसर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाए तथा किसी भी शिकायत पर समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
आसनसोल कोर्ट की पुरानी घटना का भी किया जिक्र
प्रदर्शन के दौरान कुछ अधिवक्ताओं ने दावा किया कि इससे पहले आसनसोल कोर्ट में भी पुलिस की मौजूदगी में इसी तरह की एक घटना सामने आ चुकी है। उस समय भी संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की गई थी।
अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि ऐसी घटनाओं पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होती है, तो इससे अधिवक्ताओं के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है। इसी वजह से सोमवार के प्रदर्शन में बारुईपुर की घटना के साथ-साथ अधिवक्ताओं की व्यापक सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया।
प्रदर्शन समाप्त होने के बाद अधिवक्ताओं की ओर से पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से कथित हमले में शामिल लोगों की गिरफ्तारी, घटना की जांच और अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग रखी गई।
फिलहाल पेन डाउन आंदोलन नहीं करने का फैसला
अधिवक्ताओं ने फिलहाल पेन डाउन आंदोलन नहीं करने का फैसला लिया है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि वे न्यायिक कार्य बंद कर देते हैं, तो इसका सीधा असर उनके मुवक्किलों पर पड़ सकता है। कई लोग अपने मामलों की सुनवाई और कानूनी सहायता के लिए अधिवक्ताओं पर निर्भर रहते हैं।
इसी वजह से अधिवक्ताओं ने कहा कि वे अपना काम जारी रखते हुए अपने मुवक्किलों को न्याय दिलाने की कोशिश करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि मामले को नजरअंदाज किया जाएगा।
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि कथित हमले में शामिल लोगों के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं होती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। फिलहाल सभी की नजर पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।
सोमवार का प्रदर्शन इस बात का संकेत रहा कि बारुईपुर कोर्ट की घटना को लेकर आसनसोल के अधिवक्ताओं में गंभीर नाराजगी है। अब प्रशासन की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और अधिवक्ताओं की सुरक्षा को लेकर उनकी मांगों पर किस तरह प्रतिक्रिया दी जाती है।




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