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सत्ता परिवर्तन के बाद श्रद्धा का सैलाब—युवक ने दंडवत करते हुए माँ काली के दरबार में टेका माथा

Moutushi · 10 May 2026, 7:26 PM

आसनसोल: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद आस्था, विश्वास और संकल्प की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले सोमू भंडारी ने अपनी मन्नत पूरी होने पर लगभग दो किलोमीटर तक दंडवत यात्रा करते हुए घाघर बूढ़ी काली मंदिर पहुंचकर माँ काली के चरणों में शीश नवाया।

बताया जा रहा है कि सोमू भंडारी ने राज्य की राजनीतिक स्थिति को लेकर माँ काली से विशेष मन्नत मांगी थी। उनका कहना है कि वह राज्य में बढ़ती हिंसा, भ्रष्टाचार और स्थानीय स्तर पर दबंगई की घटनाओं से काफी व्यथित थे। इसी दौरान जब वह बराबनी क्षेत्र में अपने रिश्तेदार के यहां गए, तो वहां के हालात देखकर उनके मन में बदलाव की इच्छा और प्रबल हो गई।

इसके बाद उन्होंने घाघर बूढ़ी काली मंदिर पहुंचकर माँ काली से प्रार्थना की कि यदि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनती है, सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बनते हैं और अर्जित राय बराबनी विधानसभा से भाजपा विधायक चुने जाते हैं, तो वह दंडवत यात्रा करते हुए मंदिर में आकर पूजा-अर्चना करेंगे।

अब जब उनकी मन्नत पूरी हो गई, तो सोमू भंडारी ने बिना किसी संकोच के अपनी प्रतिज्ञा निभाई। उन्होंने अपने घर से मंदिर तक पूरे रास्ते दंडवत प्रणाम करते हुए यात्रा की, जो लगभग दो किलोमीटर लंबी थी। यह यात्रा आसान नहीं थी—कड़ी धूप, थकान और शारीरिक कष्ट के बावजूद उनकी आस्था अडिग रही।

मंदिर पहुंचने के बाद उन्होंने विधि-विधान के साथ विशेष पूजा की और माँ काली का आशीर्वाद लिया। इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद लोगों ने उनकी श्रद्धा को नमन किया।

इस अनोखी घटना के बाद पूरे इलाके में सोमू भंडारी की चर्चा जोरों पर है। स्थानीय लोग इसे अटूट आस्था, मजबूत संकल्प और धार्मिक विश्वास का जीवंत उदाहरण मान रहे हैं।

कई लोगों का कहना है कि आज के दौर में जहां लोग छोटी-छोटी बातों पर अपने वादे भूल जाते हैं, वहीं सोमू भंडारी ने अपनी कठिन तपस्या से यह साबित कर दिया कि सच्ची श्रद्धा में कितनी शक्ति होती है।

आसनसोल की इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि जब विश्वास और संकल्प मजबूत हो, तो इंसान किसी भी कठिन रास्ते को पार कर सकता है।

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