Monday, 7 September 2026
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आसनसोल-दुर्गापुर

शिक्षकों के सम्मान में आसनसोल में खास पहल, छह शिक्षकों को मिला ‘विद्या रत्न आइकन अवॉर्ड 2026’

Moutushi · 6 September 2026, 7:51 PM

आसनसोल: शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों के योगदान और उनके समर्पण को सम्मानित करने के लिए आसनसोल में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इंटरनेशनल इक्विटेबल ह्यूमन राइट्स सोशल काउंसिल की ओर से आयोजित इस सम्मान समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छह शिक्षकों को ‘विद्या रत्न आइकन अवॉर्ड 2026’ से सम्मानित किया गया। संस्था के आसनसोल स्थित कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को अंगवस्त्र और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।

कार्यक्रम में शिक्षकों के प्रति सम्मान के साथ-साथ शिक्षा के व्यापक सामाजिक महत्व पर भी चर्चा हुई। समारोह में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने या विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए तैयार करने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे नई पीढ़ी के विचार, व्यवहार, अनुशासन और व्यक्तित्व को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

छह शिक्षकों को मिला विशेष सम्मान

इंटरनेशनल इक्विटेबल ह्यूमन राइट्स सोशल काउंसिल की ओर से इस वर्ष पंकज कुमार चौरसिया, उदय भान चौबे, सुमन कुमारी प्रमाणिक, विनय रजक, आफरीन नासिर और संजीव कुमार को ‘विद्या रत्न आइकन अवॉर्ड 2026’ से सम्मानित किया गया।

संस्था के आसनसोल कार्यालय में आयोजित समारोह के दौरान मीडिया पर्सनैलिटी और संस्था के चेयरमैन संजय सिन्हा ने सभी चयनित शिक्षकों को अंगवस्त्र और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। सम्मान प्राप्त करने के बाद शिक्षकों में खासा उत्साह देखने को मिला। उन्होंने संस्था की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के सम्मान से शिक्षकों का मनोबल बढ़ता है और उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में और बेहतर काम करने की प्रेरणा मिलती है।

समारोह में शिक्षकों के योगदान को केवल उनके पेशे तक सीमित न रखते हुए समाज निर्माण से जोड़कर देखा गया। वक्ताओं ने कहा कि एक शिक्षक की मेहनत का प्रभाव केवल विद्यालय या कक्षा तक नहीं रहता, बल्कि उसका असर विद्यार्थियों के माध्यम से पूरे समाज पर पड़ता है।

‘शिक्षक केवल पढ़ाने वाले नहीं’

इस अवसर पर शिक्षकों को संबोधित करते हुए संस्था के चेयरमैन संजय सिन्हा ने शिक्षक की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पढ़ाने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण से लेकर समाज और राष्ट्र के निर्माण तक की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं।

संजय सिन्हा ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को केवल किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि उन्हें जीवन की दिशा भी दिखाते हैं। उनके अनुसार शिक्षक संस्कारों को आगे बढ़ाने, विद्यार्थियों में अनुशासन विकसित करने और नई पीढ़ी को जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस को केवल एक औपचारिक उत्सव के रूप में मनाने के बजाय इसे शिक्षकों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और आत्ममंथन के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। यह दिन समाज को यह सोचने का अवसर देता है कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और शिक्षकों को सम्मानजनक वातावरण देने के लिए किस तरह के प्रयास किए जाने चाहिए।

‘शिक्षक का व्यक्तित्व स्वयं एक पाठ’

संजय सिन्हा ने शिक्षक के आचरण और व्यक्तित्व के महत्व पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा और किताबों तक सीमित नहीं होती। विद्यार्थी अपने शिक्षक के व्यवहार, विचार, अनुशासन और संवेदनशीलता से भी बहुत कुछ सीखते हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षक जिस तरह अपने विद्यार्थियों के साथ व्यवहार करते हैं, समस्याओं को समझते हैं और परिस्थितियों का सामना करते हैं, उसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों के व्यक्तित्व पर पड़ता है। इसलिए शिक्षक का अपना व्यक्तित्व भी विद्यार्थियों के लिए एक तरह का जीवंत पाठ होता है।

उनके इस संदेश ने समारोह में मौजूद शिक्षकों और अन्य लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो समाज के प्रति संवेदनशील, जिम्मेदार और जागरूक हों।

सम्मान से बढ़ता है शिक्षकों का मनोबल

समारोह में सम्मानित शिक्षकों के चेहरे पर खुशी और उत्साह साफ दिखाई दिया। शिक्षकों ने संस्था द्वारा आयोजित सम्मान समारोह की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वालों के प्रयासों को सार्वजनिक रूप से पहचान मिलना उनके लिए गौरव की बात है।

उन्होंने माना कि शिक्षक का काम कई बार प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देता, लेकिन विद्यार्थियों के जीवन में उसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है। किसी विद्यार्थी की सफलता में शिक्षक की मेहनत, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन की बड़ी भूमिका होती है। ऐसे में शिक्षकों के योगदान को सम्मानित करना समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक संदेश भी देता है।

समारोह में मौजूद रहे कई पदाधिकारी

कार्यक्रम में संस्था के अन्य पदाधिकारी डॉक्टर हरे राम प्रसाद, अमित सिंह, कृष्णा प्रसाद और चंदन कुंडू सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने सम्मानित शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान शिक्षक दिवस की भावना को केंद्र में रखते हुए शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी पर विचार साझा किए गए। समारोह का उद्देश्य केवल पुरस्कार प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज में शिक्षकों के महत्व को रेखांकित करना भी रहा।

आसनसोल में आयोजित यह सम्मान समारोह इस संदेश के साथ समाप्त हुआ कि शिक्षक किसी भी समाज की मजबूत नींव होते हैं। उनके ज्ञान, अनुभव और संस्कारों से तैयार होने वाली पीढ़ी ही भविष्य के समाज और राष्ट्र की दिशा तय करती है। ऐसे में शिक्षकों का सम्मान केवल एक दिन की परंपरा नहीं, बल्कि उनके योगदान के प्रति निरंतर कृतज्ञता और सम्मान की भावना होनी चाहिए।

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