Monday, 7 September 2026
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आसनसोल-दुर्गापुर

बीजेपी में फिर सामने आई अंदरूनी कलह! स्वर्ण बाउरी का नाम हटने पर जिला कार्यालय के बाहर प्रदर्शन

Moutushi · 7 September 2026, 3:40 PM

आसनसोल: पश्चिम बर्धमान जिले में भारतीय जनता पार्टी के भीतर एक बार फिर संगठनात्मक विवाद सामने आया है। जामुड़िया मंडल-1 की महिला मोर्चा अध्यक्ष स्वर्ण बाउरी का नाम हटाए जाने को लेकर सोमवार को पार्टी के अंदर नाराजगी खुलकर सामने आ गई। इस मुद्दे को लेकर पार्टी के एक वर्ग के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने आसनसोल स्थित बीजेपी के जिला कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की और संगठनात्मक फैसले पर सवाल उठाए।

जानकारी के अनुसार, विवाद जामुड़िया मंडल-1 की महिला मोर्चा अध्यक्ष स्वर्ण बाउरी के नाम को लेकर है। प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं और समर्थकों का कहना है कि स्वर्ण बाउरी महिला मोर्चा अध्यक्ष के पद पर काम कर रही थीं, इसके बावजूद उनका नाम संगठनात्मक स्तर पर क्यों हटाया गया, इसकी स्पष्ट जानकारी उन्हें नहीं दी गई। इसी बात को लेकर कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा हुआ और उन्होंने जिला नेतृत्व के समक्ष अपनी बात रखने का फैसला किया।

जिला कार्यालय के बाहर जुटे कार्यकर्ता

सोमवार को बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक आसनसोल स्थित बीजेपी के जिला कार्यालय के सामने पहुंचे। यहां उन्होंने स्वर्ण बाउरी के समर्थन में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पार्टी संगठन से जुड़े मुद्दों को लेकर नारे लगाए और अपनी मांगों को सामने रखा।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि स्वर्ण बाउरी का नाम हटाने के पीछे संगठन के ही एक प्रभावशाली पदाधिकारी की भूमिका है। उनका दावा है कि जामुड़िया मंडल अध्यक्ष की कथित साजिश के कारण स्वर्ण बाउरी का नाम हटाया गया। हालांकि, यह आरोप प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष की ओर से इस आरोप पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही पूरे विवाद की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

‘बिना उचित कारण नाम क्यों हटाया गया?’

प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं का मुख्य सवाल यही रहा कि यदि स्वर्ण बाउरी को महिला मोर्चा अध्यक्ष के पद से संबंधित संगठनात्मक सूची से हटाया गया है, तो इसकी वजह क्या है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि संगठन में किसी पदाधिकारी के नाम में बदलाव किया जाता है तो उसके पीछे स्पष्ट कारण और उचित प्रक्रिया होनी चाहिए।

कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि यदि संगठनात्मक स्तर पर कोई बदलाव किया गया है, तो स्थानीय कार्यकर्ताओं को भी इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने जिला नेतृत्व के सामने अपनी नाराजगी दर्ज कराई।

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, उनका उद्देश्य पार्टी के खिलाफ जाना नहीं, बल्कि संगठन के भीतर अपनी बात को नेतृत्व तक पहुंचाना है। उनका कहना है कि वे चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष समीक्षा हो और स्वर्ण बाउरी का नाम हटाए जाने के कारणों को स्पष्ट किया जाए।

पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी ने खड़े किए सवाल

बीजेपी जैसी राजनीतिक पार्टी में मंडल और महिला मोर्चा स्तर के पद संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में किसी पदाधिकारी के नाम को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच विवाद सामने आने से संगठनात्मक गतिविधियों पर भी चर्चा शुरू हो जाती है।

जामुड़िया मंडल-1 से जुड़े इस विवाद ने भी पार्टी के स्थानीय संगठन में मतभेद को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, यह विवाद कितना व्यापक है और इसमें पार्टी के कितने कार्यकर्ता शामिल हैं, इसका आकलन फिलहाल करना जल्दबाजी होगा। सोमवार को हुए प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने अपनी नाराजगी जरूर खुलकर जाहिर की।

स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खासकर ऐसे समय में जब राजनीतिक दल अपने संगठन को बूथ और मंडल स्तर तक मजबूत करने में जुटे हैं, उस दौरान पदाधिकारियों के चयन और नामों में बदलाव को लेकर उठने वाले सवाल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

जिला नेतृत्व ने दिया बातचीत का भरोसा

प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने बीजेपी के जिला नेतृत्व के समक्ष अपनी शिकायत रखी। बताया गया कि जिला नेतृत्व की ओर से प्रदर्शनकारियों की बात सुनी गई और बातचीत के माध्यम से समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया गया।

नेतृत्व की ओर से दिए गए इस आश्वासन के बाद फिलहाल प्रदर्शन समाप्त हुआ। हालांकि, प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं की नाराजगी पूरी तरह समाप्त हुई है या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि पार्टी नेतृत्व स्वर्ण बाउरी के नाम से जुड़े विवाद पर क्या निर्णय लेता है।

संगठनात्मक फैसले पर टिकी नजर

स्वर्ण बाउरी प्रकरण में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पार्टी के आधिकारिक स्तर से नाम हटाए जाने के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में प्रदर्शनकारियों के आरोपों और संगठन के वास्तविक फैसले के बीच अंतर को समझना जरूरी है।

राजनीतिक दलों में संगठनात्मक फेरबदल सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन जब किसी बदलाव को लेकर कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा होता है, तो नेतृत्व के सामने उसे संभालने की चुनौती भी बढ़ जाती है। जामुड़िया मंडल-1 के इस मामले में भी अब यही देखना होगा कि जिला नेतृत्व किस तरह विवाद को सुलझाता है।

दूसरी ओर, प्रदर्शन के दौरान लगाए गए आरोपों को लेकर मंडल नेतृत्व की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। यदि संबंधित पदाधिकारी या संगठन की ओर से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण दिया जाता है, तो विवाद की वास्तविक वजह को समझने में मदद मिल सकती है।

क्या जल्द सुलझेगा बीजेपी का यह विवाद?

फिलहाल स्वर्ण बाउरी का नाम हटाए जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद पार्टी के जिला कार्यालय तक पहुंच चुका है। कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है और जिला नेतृत्व ने बातचीत के माध्यम से समाधान का भरोसा दिया है।

अब सवाल यह है कि क्या बातचीत के जरिए यह विवाद जल्द समाप्त हो पाएगा या आने वाले दिनों में मामला और तूल पकड़ेगा। क्या स्वर्ण बाउरी के नाम को लेकर संगठन कोई नया फैसला करेगा, या पार्टी अपने मौजूदा निर्णय पर कायम रहेगी—इन सवालों के जवाब आने वाले समय में मिल सकते हैं।

फिलहाल बीजेपी के जिला नेतृत्व के आश्वासन के बाद स्थिति शांत है, लेकिन जामुड़िया मंडल-1 में महिला मोर्चा अध्यक्ष स्वर्ण बाउरी के नाम को लेकर उठे विवाद ने पार्टी के अंदरूनी संगठनात्मक समीकरणों पर चर्चा जरूर तेज कर दी है। अब सभी की नजर जिला नेतृत्व के अगले कदम और मामले में होने वाली बातचीत के नतीजे पर टिकी हुई है।

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