Friday, 9 October 2026
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आसनसोल-दुर्गापुर

आसनसोल में रेलवे कोयला वैगन सुरक्षा कर्मियों का प्रदर्शन, 12 घंटे से अधिक ड्यूटी कराने का आरोप

Moutushi · 9 October 2026, 4:19 PM

आसनसोल, पश्चिम बर्दवान: रेलवे के कोयला वैगन की सुरक्षा व्यवस्था में कार्यरत सुरक्षा कर्मियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आसनसोल स्थित कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी कर्मियों ने प्रबंधन पर निर्धारित समय से अधिक ड्यूटी कराने, कार्य से संबंधित नया समझौता नहीं करने और कर्मचारियों की तैनाती में बदलाव किए जाने जैसे मुद्दों पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि काम की मौजूदा व्यवस्था के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा कि आगे की व्यवस्था रेलवे की ओर से दिए गए निर्देशों के अनुसार की जाएगी।

इस विरोध प्रदर्शन के बाद सुरक्षा कर्मियों के काम के घंटे, पुराने समझौते की स्थिति और ड्यूटी पर कर्मचारियों की संख्या को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों ने प्रबंधन से उनकी मांगों पर ध्यान देने और कामकाज से जुड़ी समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की है।

आठ घंटे की जगह 12 घंटे से अधिक काम कराने का आरोप

प्रदर्शन कर रहे सुरक्षा कर्मियों का सबसे प्रमुख आरोप है कि उनसे निर्धारित आठ घंटे की जगह 12 घंटे से भी अधिक समय तक काम कराया जाता है। उनका कहना है कि ड्यूटी के घंटों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियों और काम के समय की जानकारी पहले से मिल सके।

सुरक्षा कर्मियों के अनुसार, लगातार लंबे समय तक ड्यूटी करने से उनके दैनिक जीवन और आराम के समय पर असर पड़ता है। उनका मानना है कि काम के घंटे और ड्यूटी की शर्तें स्पष्ट रहने से कर्मचारियों तथा प्रबंधन, दोनों के लिए व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना आसान होगा।

हालांकि, निर्धारित समय से अधिक ड्यूटी कराने के आरोपों पर प्रबंधन की ओर से विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि वास्तविक ड्यूटी समय क्या निर्धारित है और कर्मचारियों से कितने घंटे काम लिया जा रहा है। इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और दोनों पक्षों के आधिकारिक पक्ष से ही मिल सकेगा।

वर्ष 2017 में समझौता समाप्त होने का दावा

सुरक्षा कर्मियों ने कार्य से संबंधित समझौते को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि उनके काम से जुड़ा समझौता वर्ष 2017 में ही समाप्त हो गया था, लेकिन इसके बाद अब तक नया समझौता नहीं किया गया है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय तक नया समझौता नहीं होने से काम की शर्तों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वे चाहते हैं कि प्रबंधन इस विषय पर स्पष्ट जानकारी दे और कर्मचारियों के कार्य से जुड़ी शर्तों को औपचारिक रूप से तय किया जाए।

किसी भी कार्य समझौते में ड्यूटी का समय, कर्मचारियों की जिम्मेदारियां, तैनाती की व्यवस्था और भुगतान से जुड़े प्रावधान महत्वपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे में पुराने समझौते की स्थिति और नए समझौते की आवश्यकता पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत से समाधान निकलना जरूरी माना जा रहा है।

हालांकि, वर्ष 2017 में समझौता समाप्त होने और उसके बाद नया समझौता नहीं किए जाने की बात फिलहाल प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का दावा है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित समझौते और आधिकारिक अभिलेखों की जानकारी सामने आना आवश्यक है।

छह की जगह चार कर्मचारियों की तैनाती का मुद्दा

प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मियों ने ड्यूटी पर कर्मचारियों की संख्या में बदलाव को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि पहले एक स्थान पर छह लोगों की ड्यूटी होती थी, जबकि अब चार कर्मचारियों से ही काम चलाने की बात कही जा रही है।

कर्मचारियों के अनुसार, तैनाती की संख्या कम होने से ड्यूटी का दबाव बढ़ने की आशंका है। उनका सवाल है कि यदि किसी स्थान पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पहले अधिक कर्मचारियों की तैनाती होती थी, तो अब संख्या कम करने का आधार क्या है और इससे काम की जिम्मेदारियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

दूसरी ओर, कर्मचारियों की तैनाती आवश्यकता के अनुसार तय किए जाने की बात कार्यालय के एक अधिकारी ने कही है। अधिकारी के मुताबिक, रेलवे की ओर से जिस तरह के निर्देश दिए जाएंगे, उसी के अनुसार आगे की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि सुरक्षा गार्डों की तैनाती भी जरूरत को ध्यान में रखकर की जाएगी।

ऐसे में कर्मचारियों की वास्तविक आवश्यकता, ड्यूटी के स्वरूप और सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों का आकलन इस विवाद के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

‘नो वर्क, नो पे’ व्यवस्था पर भी नाराजगी

सुरक्षा कर्मियों ने यह भी आरोप लगाया कि यहां पहले से ही ‘नो वर्क, नो पे’ यानी काम नहीं तो वेतन नहीं का प्रावधान लागू है। प्रदर्शनकारियों ने इसी व्यवस्था और अन्य कार्य संबंधी मुद्दों को लेकर प्रबंधन के प्रति नाराजगी व्यक्त की।

उनका कहना है कि वे अपनी ड्यूटी और जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था चाहते हैं। कर्मचारियों की मांग है कि काम के घंटे, भुगतान संबंधी शर्तों और तैनाती से जुड़े विषयों पर स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद पैदा न हो।

हालांकि, ‘नो वर्क, नो पे’ के प्रावधान के वास्तविक नियम, उसके लागू होने की परिस्थितियां और कर्मचारियों पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इस विषय पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित नियमों और कार्य समझौते की जांच आवश्यक होगी।

प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच समाधान की उम्मीद

आसनसोल कार्यालय के सामने हुए प्रदर्शन से स्पष्ट है कि सुरक्षा कर्मी अपनी मांगों को लेकर प्रबंधन का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। उनके मुख्य मुद्दे लंबे कार्य घंटे, वर्ष 2017 में समझौता समाप्त होने का दावा, कर्मचारियों की संख्या में संभावित कमी और ‘नो वर्क, नो पे’ की व्यवस्था हैं।

दूसरी ओर, अधिकारी ने रेलवे के निर्देशों के अनुसार आगे की व्यवस्था किए जाने की बात कही है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रबंधन कर्मचारियों की शिकायतों पर क्या कदम उठाता है और क्या दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए कोई सहमति बन पाती है।

फिलहाल, प्रदर्शनकारी सुरक्षा कर्मियों की मांगों और प्रबंधन के रुख को लेकर मामला चर्चा में है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि काम के घंटों, पुराने समझौते और कर्मचारियों की तैनाती से जुड़े सवालों पर आधिकारिक तौर पर क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है। यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित होता है, तो विवाद के समाधान और कार्य व्यवस्था में स्पष्टता आने की संभावना बन सकती है।

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