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आसनसोल-दुर्गापुर

आसनसोल में 200 महिलाओं ने सीखे आत्मरक्षा के गुर, अब दूसरी महिलाओं को भी देंगी कलरीपयट्टू का प्रशिक्षण

Moutushi · 11 October 2026, 2:05 PM

आसनसोल: महिलाओं की सुरक्षा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आसनसोल में आयोजित दस दिवसीय आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर का समापन हो गया। इस शिविर में करीब 200 महिलाओं ने हिस्सा लिया और केरल से आई प्रशिक्षकों की टीम से पारंपरिक मार्शल आर्ट कलरीपयट्टू सहित आत्मरक्षा की विभिन्न तकनीकें सीखीं। इस पहल की खास बात यह है कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाएं अब केवल खुद तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि दूसरी महिलाओं को भी आत्मरक्षा के गुर सिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

आयोजकों के अनुसार, यह शिविर महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। योजना है कि इस अभियान को नियमित रूप से आगे बढ़ाया जाए, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं आत्मरक्षा की तकनीकों से परिचित हों और जरूरत पड़ने पर अपनी सुरक्षा के लिए सही कदम उठा सकें।

दस दिवसीय शिविर में महिलाओं ने सीखी आत्मरक्षा की तकनीकें

आसनसोल में आयोजित इस विशेष शिविर में करीब 200 महिलाओं ने दस दिनों तक प्रशिक्षण लिया। केरल से आए प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को कलरीपयट्टू के विभिन्न अभ्यासों और आत्मरक्षा से जुड़ी तकनीकों से परिचित कराया। कलरीपयट्टू भारत की पारंपरिक युद्ध कलाओं में से एक है, जिसका संबंध केरल से माना जाता है।

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को शारीरिक रूप से सक्षम बनाने के साथ उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना भी है। रोजमर्रा की जिंदगी में महिलाओं को पढ़ाई, नौकरी, ट्यूशन और अन्य जरूरी कामों के लिए घर से बाहर निकलना पड़ता है। ऐसे में आत्मरक्षा की बुनियादी जानकारी उनके लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

शिविर के समापन समारोह में आसनसोल उत्तर के विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी, जिलाधिकारी एस. पोन्नंबलम, भाजपा जिला अध्यक्ष देवतनु भट्टाचार्य, उद्योगपति एवं समाजसेवी पवन गुटगुटिया तथा भाजपा नेता अपूर्व हजरा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

हर छह महीने में आयोजित होगा आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर

विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने बताया कि महिलाओं को आत्मरक्षा में प्रशिक्षित करने का अभियान आगे भी जारी रखा जाएगा। इसके तहत हर छह महीने में प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की योजना है, ताकि अलग-अलग बैच में अधिक महिलाओं को इसका लाभ मिल सके।

उन्होंने बताया कि इस पहल की शुरुआत आसनसोल गर्ल्स कॉलेज से की गई है। इसके अलावा बीसी कॉलेज और शहर के कई महिला विद्यालयों में भी प्रशिक्षण शुरू किया गया है। शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से इस अभियान को आगे बढ़ाने का उद्देश्य छात्राओं और युवतियों तक आत्मरक्षा का प्रशिक्षण पहुंचाना है।

नियमित शिविर आयोजित होने से महिलाओं को प्रशिक्षण प्राप्त करने के नए अवसर मिल सकते हैं। साथ ही, इस पहल के जरिए आत्मरक्षा को केवल एक बार होने वाली गतिविधि के बजाय निरंतर अभ्यास का हिस्सा बनाने की कोशिश की जा रही है।

अब प्रशिक्षित महिलाएं बनेंगी दूसरी महिलाओं की प्रशिक्षक

इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि पहले बैच में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली करीब 200 महिलाएं अब अन्य महिलाओं को भी आत्मरक्षा के गुर सिखाने में योगदान देंगी। दस दिवसीय प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे अपनी सहेलियों, रिश्तेदारों और आसपास रहने वाली महिलाओं तक सीखी गई तकनीकों की जानकारी पहुंचाएंगी।

इसके लिए उसी स्टेडियम में सप्ताह में दो दिन अभ्यास की व्यवस्था करने की योजना बनाई गई है। इससे प्रशिक्षित महिलाओं को सीखी गई तकनीकों का नियमित अभ्यास करने और अपने कौशल को बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा।

इस व्यवस्था का एक उद्देश्य प्रशिक्षण को अधिक लोगों तक पहुंचाना भी है। जब प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाएं अपने आसपास की दूसरी महिलाओं को जागरूक करेंगी, तो अभियान का दायरा बढ़ सकता है। हालांकि, आत्मरक्षा की तकनीकों को सही तरीके से सिखाने के लिए नियमित अभ्यास और योग्य प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन का महत्व भी बना रहेगा।

पांच वर्षों में 20 हजार महिलाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य

आयोजकों ने आने वाले पांच वर्षों में बड़े स्तर पर महिलाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत आसनसोल शहर की 10 हजार महिलाओं और पूरे पश्चिम बर्दवान जिले की अन्य 10 हजार महिलाओं को प्रशिक्षित करने की योजना है। इस प्रकार कुल 20 हजार महिलाओं तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नियमित प्रशिक्षण शिविर, शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी और पहले से प्रशिक्षित महिलाओं की मदद महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रशिक्षण की निरंतरता, पर्याप्त प्रशिक्षकों और महिलाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान देना होगा।

विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने महिला सशक्तिकरण के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “महिला जहां शक्तिशाली होगी, वहां समाज शक्तिशाली होगा, राज्य शक्तिशाली होगा और देश शक्तिशाली होगा।”

उन्होंने कहा कि महिलाओं को आत्मरक्षा में सक्षम बनाना जरूरी है, ताकि वे ट्यूशन, नौकरी और अन्य गतिविधियों से घर लौटते समय अधिक आत्मविश्वास महसूस कर सकें।

केरल से पहली बार आसनसोल पहुंची प्रशिक्षकों की टीम

भाजपा जिला अध्यक्ष देवतनु भट्टाचार्य ने बताया कि केंद्र सरकार महिला सशक्तिकरण पर जोर दे रही है और इसी सोच के तहत आसनसोल में यह पहल की गई है। उनके अनुसार, करीब साढ़े चार हजार वर्ष पुरानी पारंपरिक मार्शल आर्ट कलरीपयट्टू का प्रशिक्षण देने के लिए पहली बार केरल से प्रशिक्षकों की टीम को आसनसोल लाया गया।

दस दिनों के प्रशिक्षण के बाद महिलाओं के प्रदर्शन पर उन्होंने संतोष व्यक्त किया और इस पहल को महत्वपूर्ण बताया। आयोजकों को उम्मीद है कि प्रशिक्षण से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा और आत्मरक्षा के प्रति जागरूकता का विस्तार होगा।

आत्मविश्वास और जागरूकता बढ़ाने की दिशा में पहल

महिला सुरक्षा केवल किसी एक प्रशिक्षण शिविर तक सीमित विषय नहीं है। इसके लिए जागरूकता, सामाजिक सहयोग, सुरक्षित वातावरण और जरूरत पड़ने पर समय पर सहायता उपलब्ध होना भी जरूरी है। आत्मरक्षा का प्रशिक्षण महिलाओं को संभावित जोखिमों के प्रति सजग रहने, परिस्थितियों को समझने और आपात स्थिति में प्रतिक्रिया देने की तैयारी में मदद कर सकता है।

आसनसोल में शुरू की गई यह पहल इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि इसमें प्रशिक्षण के साथ आगे दूसरी महिलाओं को सिखाने की योजना भी शामिल है। यदि हर छह महीने में शिविर आयोजित करने और सप्ताह में दो दिन अभ्यास की व्यवस्था को नियमित रूप से लागू किया जाता है, तो अधिक महिलाओं तक इसका लाभ पहुंच सकता है।

अब इस अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशिक्षण की निरंतरता कितनी बनी रहती है और पांच वर्षों में 20 हजार महिलाओं को प्रशिक्षित करने के लक्ष्य की दिशा में कितनी प्रगति होती है। फिलहाल, करीब 200 महिलाओं का पहला बैच प्रशिक्षण पूरा कर चुका है और अब उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे आत्मरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगी।

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