Saturday, 10 October 2026
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आसनसोल-दुर्गापुर

आसनसोल के दामोदर घाट पर तर्पण के साथ देवी पक्ष की शुरुआत, पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने उमड़े लोग

Moutushi · 10 October 2026, 4:51 PM

आसनसोल: पश्चिम बंगाल के आसनसोल में शनिवार सुबह महालय के अवसर पर दामोदर नदी के घाट पर आस्था और श्रद्धा का विशेष माहौल देखने को मिला। पितरों के स्मरण और तर्पण के साथ देवी पक्ष की शुरुआत हुई। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए दामोदर घाट पहुंचने लगे। नदी के किनारे लोगों ने धार्मिक विधि-विधान के अनुसार तर्पण किया और अपने पितृपुरुषों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

महालय बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में विशेष महत्व रखता है। यह दिन पितरों के स्मरण के साथ-साथ मां दुर्गा के आगमन की प्रतीक्षा से भी जुड़ा हुआ है। इसी कारण आसनसोल के दामोदर घाट पर सुबह से ही भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने पवित्र मंत्रों के उच्चारण के बीच अपने पूर्वजों को याद किया। वहीं, घाट पर लोगों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

महालय पर पूर्वजों को तर्पण देने पहुंचे लोग

महालय के अवसर पर दामोदर घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। कई लोग परिवार के सदस्यों के साथ घाट पर पहुंचे और अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तर्पण के माध्यम से पितरों का स्मरण किया जाता है और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट की जाती है।

घाट पर श्रद्धालुओं ने अपनी परंपरा और धार्मिक विश्वास के अनुसार तर्पण की रस्म पूरी की। मंत्रोच्चार और पूजा-पाठ के बीच लोगों ने अपने पितृपुरुषों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान नदी के किनारे धार्मिक गतिविधियां चलती रहीं और पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक माहौल दिखाई दिया।

महालय के दिन तर्पण करने की परंपरा बंगाल सहित देश के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित है। अनेक परिवार इस दिन अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनकी स्मृति में धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। दामोदर घाट पर जुटी भीड़ भी इसी आस्था और परंपरा की झलक पेश कर रही थी।

पितृपक्ष की समाप्ति और देवी पक्ष का शुभारंभ

हिंदू धार्मिक परंपरा में महालय को पितृपक्ष के समापन और देवी पक्ष के आगमन से जोड़कर देखा जाता है। पितृपक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं। महालय के साथ ही दुर्गा पूजा को लेकर उत्सुकता भी बढ़ने लगती है। बंगाल में इस दिन का विशेष सांस्कृतिक महत्व है, क्योंकि मां दुर्गा के आगमन की प्रतीक्षा का भाव जनजीवन में दिखाई देने लगता है।

आसनसोल के दामोदर घाट पर भी तर्पण के साथ देवी पक्ष की शुरुआत का धार्मिक महत्व महसूस किया गया। श्रद्धालुओं के लिए यह दिन अपने पूर्वजों को याद करने और आने वाले दुर्गोत्सव के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर बना।

महालय के बाद विभिन्न इलाकों में दुर्गा पूजा की तैयारियां तेज हो जाती हैं। पूजा पंडालों, प्रतिमाओं और धार्मिक आयोजनों को लेकर लोगों की व्यस्तता बढ़ने लगती है। हालांकि, दामोदर घाट पर शनिवार सुबह का मुख्य आकर्षण पितरों के प्रति श्रद्धा और तर्पण की परंपरा रही।

सुरक्षा व्यवस्था पर पुलिस की निगरानी

महालय के अवसर पर घाट पर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने को ध्यान में रखते हुए पुलिस की ओर से निगरानी रखी गई थी। नदी के किनारे श्रद्धालुओं की आवाजाही के दौरान सुरक्षा बनाए रखना महत्वपूर्ण था। लोगों की भीड़ के बीच किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान दिया गया।

दामोदर नदी में नाव के जरिए डीएमजी समूह के सदस्यों ने भी निगरानी की। नदी में नाव के माध्यम से निगरानी का उद्देश्य घाट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखना और स्थिति को नियंत्रित बनाए रखने में सहयोग करना था।

नदी के घाटों पर धार्मिक अवसरों के दौरान भीड़ बढ़ने से सावधानी की जरूरत होती है। खासकर नदी के पानी के पास लोगों को सतर्क रहना चाहिए। बच्चों को अकेले पानी के किनारे नहीं जाने देना, सुरक्षित स्थानों पर रहना और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करना जरूरी होता है।

महालय जैसे अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के एकत्र होने के कारण पुलिस और संबंधित सुरक्षा दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। दामोदर घाट पर भी निगरानी की व्यवस्था इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए की गई।

दामोदर घाट पर दिखा आस्था और परंपरा का संगम

आसनसोल के दामोदर घाट पर महालय की सुबह धार्मिक आस्था और सामाजिक परंपरा का संगम देखने को मिला। अलग-अलग परिवारों से आए श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों को याद किया और तर्पण के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच घाट का वातावरण भक्तिमय बना रहा।

महालय का महत्व केवल एक धार्मिक तिथि तक सीमित नहीं है। यह परिवारों को अपने पूर्वजों और पारिवारिक विरासत का स्मरण करने का अवसर भी देता है। कई लोगों के लिए तर्पण की रस्म पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है, जिसे वे श्रद्धा के साथ निभाते हैं।

बंगाल में महालय के साथ दुर्गा पूजा के आगमन की अनुभूति और गहरी हो जाती है। मां दुर्गा की आराधना से पहले पितरों का स्मरण करने की परंपरा अनेक लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है। यही वजह है कि इस अवसर पर नदी के घाटों और धार्मिक स्थलों पर लोगों की उपस्थिति देखने को मिलती है।

देवी पक्ष की शुरुआत के साथ दुर्गोत्सव की प्रतीक्षा तेज

शनिवार सुबह दामोदर घाट पर तर्पण के साथ देवी पक्ष का शुभारंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों को याद करते हुए धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए, जबकि सुरक्षा कर्मियों ने घाट और नदी के आसपास निगरानी बनाए रखी।

महालय के साथ ही आसनसोल सहित पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों में दुर्गा पूजा को लेकर उत्साह बढ़ने लगता है। आने वाले दिनों में पूजा की तैयारियां, धार्मिक कार्यक्रम और सांस्कृतिक आयोजन लोगों के जीवन में विशेष स्थान ग्रहण करेंगे।

दामोदर घाट पर जुटे श्रद्धालुओं के लिए यह सुबह अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और देवी पक्ष का स्वागत करने का अवसर बनी। तर्पण, मंत्रोच्चार और सुरक्षा व्यवस्था के बीच महालय का यह आयोजन आसनसोल की धार्मिक परंपरा और जनआस्था की एक महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करता है।

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