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बंगाल उपचुनाव में भाजपा की बड़ी जीत: नंदीग्राम में रिकॉर्ड मतों से हासिरानी रथ विजयी, रेजीनगर में भी खिला कमल

Moutushi · 10 October 2026, 9:52 AM

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 9 अक्टूबर को घोषित विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने नई चर्चा छेड़ दी है। भारतीय जनता पार्टी ने नंदीग्राम और रेजीनगर, दोनों सीटों पर बड़ी जीत दर्ज की। नंदीग्राम में भाजपा उम्मीदवार हासिरानी रथ ने कांग्रेस के मिलन प्रधान को 1,22,753 मतों के विशाल अंतर से हराया। वहीं, मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर सीट पर भाजपा के शंखराव सरकार ने आम जनता उन्नयन पार्टी के उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद को 75,816 मतों से पराजित किया। इन नतीजों के बाद दोनों क्षेत्रों में भाजपा की राजनीतिक स्थिति और अल्पसंख्यक बहुल इलाके में उसके प्रदर्शन को लेकर बहस तेज हो गई है।

इन उपचुनावों को केवल दो विधानसभा सीटों के परिणाम के रूप में नहीं देखा जा रहा है। नंदीग्राम का राजनीतिक महत्व लंबे समय से रहा है, जबकि रेजीनगर में भाजपा की जीत इसलिए चर्चा में है क्योंकि इस क्षेत्र में मुस्लिम आबादी बड़ी संख्या में है और यहां आम जनता उन्नयन पार्टी तथा तृणमूल कांग्रेस की राजनीति भी प्रभावशाली रही है।

नंदीग्राम में हासिरानी रथ की रिकॉर्ड जीत

नंदीग्राम विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार हासिरानी रथ को कुल 1,64,427 मत मिले। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान 41,674 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। दोनों के बीच जीत का अंतर 1,22,753 मत रहा, जिसे इस सीट पर बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

हासिरानी रथ की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के अंतर से कहीं अधिक अंतर दर्ज किया। पिछले चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार उपचुनाव में भाजपा ने और बड़े अंतर से सीट अपने पास बरकरार रखी।

हासिरानी रथ का संबंध भी इस चुनाव को भावनात्मक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। वह सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी रहे दिवंगत चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद उनके परिवार को लेकर राज्य की राजनीति में चर्चा हुई थी। ऐसे माहौल में हासिरानी रथ की जीत को भाजपा के लिए महत्वपूर्ण परिणाम माना जा रहा है।

फालता का रिकॉर्ड टूटा

नंदीग्राम में जीत का अंतर पश्चिम बंगाल की पिछली विधानसभा चुनावी जीतों के रिकॉर्ड से तुलना का विषय भी बन गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इससे पहले फालता में भाजपा उम्मीदवार ने 1,09,021 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। नंदीग्राम में हासिरानी रथ की 1,22,753 मतों की जीत ने उस अंतर को पीछे छोड़ दिया।

यह परिणाम भाजपा के लिए केवल सीट बचाने की सफलता नहीं है, बल्कि नंदीग्राम में पार्टी के चुनावी आधार के विस्तार का संकेत भी माना जा रहा है। हालांकि, किसी एक उपचुनाव के परिणाम से पूरे राज्य में मतदाताओं के रुझान के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। स्थानीय उम्मीदवार, चुनावी परिस्थितियां, विपक्षी दलों की रणनीति और मतदाताओं के अलग-अलग मुद्दे परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।

रेजीनगर में शंखराव सरकार की बड़ी जीत

मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार शंखराव सरकार ने 1,29,914 मत प्राप्त किए। आम जनता उन्नयन पार्टी के उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद को 54,098 मत मिले। इस तरह भाजपा उम्मीदवार ने 75,816 मतों के अंतर से जीत हासिल की। गुलाम नबी आजाद आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर के बेटे हैं।

रेजीनगर के नतीजे इसलिए विशेष चर्चा में हैं क्योंकि यह मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्र है। लंबे समय से यहां अल्पसंख्यक मतदाताओं की भूमिका चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण रही है। ऐसे क्षेत्र में भाजपा की बड़ी जीत ने राजनीतिक दलों को अपने चुनावी समीकरणों, उम्मीदवारों और प्रचार रणनीतियों पर नए सिरे से विचार करने का अवसर दिया है।

हालांकि, भाजपा की जीत को सीधे तौर पर यह प्रमाण नहीं माना जा सकता कि क्षेत्र के सभी या अधिकांश मुस्लिम मतदाताओं ने एक ही पार्टी का समर्थन किया। मतगणना के आधिकारिक आंकड़े उम्मीदवारों को मिले कुल मत बताते हैं, लेकिन किसी विशेष धर्म या समुदाय के मतदाताओं ने किसे वोट दिया, यह केवल परिणामों से निश्चित रूप से नहीं जाना जा सकता।

अल्पसंख्यक मतदाताओं को लेकर राजनीतिक बहस

रेजीनगर में भाजपा की जीत के बाद अल्पसंख्यक मतदाताओं के रुझान को लेकर बयानबाजी भी तेज हुई है। भाजपा नेताओं का दावा है कि पार्टी को विभिन्न समुदायों के लोगों का समर्थन मिला। दूसरी ओर, चुनावी नतीजों का विश्लेषण करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि मतदाताओं के निर्णय के पीछे स्थानीय समस्याएं, विकास, रोजगार, सुरक्षा, उम्मीदवार की छवि और राजनीतिक दलों के प्रति विश्वास जैसे कई कारण हो सकते हैं।

भाजपा के लिए रेजीनगर का परिणाम इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी ने ऐसे क्षेत्र में जीत दर्ज की जहां उसे लंबे समय से मजबूत प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता रहा है। यह जीत विपक्षी दलों के लिए भी आत्ममंथन का विषय बन सकती है। हालांकि, वास्तविक मतदाता व्यवहार को समझने के लिए बूथवार आंकड़ों, मतदान के पिछले रुझानों और स्थानीय मुद्दों का विस्तृत अध्ययन जरूरी होगा।

सुवेंदु अधिकारी ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने रेजीनगर में भाजपा की जीत को लेकर दावा किया कि मतदाताओं के बीच भाजपा के सत्ता में आने पर बांग्लादेश भेजे जाने या नजरबंदी केंद्रों में रखे जाने जैसी आशंकाएं फैलाई गई थीं। उनके अनुसार, लोगों ने इन आशंकाओं को स्वीकार नहीं किया और बिना भेदभाव के भाजपा को समर्थन दिया।

यह बयान भाजपा की ओर से चुनावी नतीजों की राजनीतिक व्याख्या का हिस्सा है। इसे मुख्यमंत्री का दावा मानकर ही देखा जाना चाहिए। मतदाताओं ने किस मुद्दे को कितना महत्व दिया, यह जानने के लिए स्वतंत्र सर्वेक्षण, स्थानीय प्रतिक्रिया और विस्तृत चुनावी आंकड़ों की आवश्यकता होगी।

दोनों सीटों पर नतीजों का राजनीतिक संदेश

नंदीग्राम और रेजीनगर की जीत से भाजपा को पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बढ़त मिली है। नंदीग्राम में रिकॉर्ड अंतर से जीत और रेजीनगर में बड़ी विजय ने पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया है। वहीं, विपक्षी दलों के सामने अपनी रणनीति, उम्मीदवारों के चयन और मतदाताओं से संवाद को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

फिलहाल, इन नतीजों का सबसे स्पष्ट संदेश यही है कि दोनों सीटों पर मतदाताओं ने भाजपा उम्मीदवारों को निर्णायक समर्थन दिया। आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्वाचित प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर क्या काम करते हैं।

चुनावी जीत राजनीतिक दलों के लिए उपलब्धि जरूर होती है, लेकिन मतदाताओं की अपेक्षाओं पर खरा उतरना निर्वाचित प्रतिनिधियों की अगली बड़ी जिम्मेदारी होती है। नंदीग्राम और रेजीनगर के परिणामों के बाद अब इन दोनों क्षेत्रों की जनता की नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव के दौरान उठाए गए मुद्दों पर कितनी प्रगति होती है।

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