नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के प्रमुख के रूप में लगातार 25 वर्ष का नेतृत्व पूरा कर लिया है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए एक विशेष प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव में उनके लंबे राजनीतिक सफर, प्रशासनिक अनुभव और ‘देश पहले, नागरिक पहले’ की नीति के तहत किए गए कार्यों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरुआत से लेकर देश के प्रधानमंत्री के रूप में लगातार तीन लोकसभा चुनावों में जीत तक के सफर को प्रस्ताव में विशेष उपलब्धि के तौर पर रेखांकित किया गया है।
7 अक्टूबर 2001 से शुरू हुआ 25 साल का सफर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सरकार के प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली थी। वह 22 मई 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद उन्होंने देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। इस तरह मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उनका लगातार नेतृत्व 25 वर्षों तक जारी रहा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रस्ताव में गुजरात में लगातार तीन बार मिले जनसमर्थन और उसके बाद लगातार तीन लोकसभा चुनावों में मिली सफलता का भी उल्लेख किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, यह लंबे समय तक जनता के विश्वास और राजनीतिक समर्थन को दर्शाता है।
गुजरात के प्रयोगों को देशभर में लागू करने का दावा
प्रस्ताव में गुजरात में शुरू किए गए कई प्रशासनिक और विकास संबंधी प्रयोगों को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का उल्लेख किया गया है। नागरिकों की शिकायतों को सीधे सुनने और उनके समाधान की व्यवस्था के लिए शुरू किए गए ‘स्वागत’ कार्यक्रम को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। वर्ष 2010 में इस कार्यक्रम को संयुक्त राष्ट्र का पब्लिक सर्विस अवॉर्ड मिलने की बात भी प्रस्ताव में कही गई है।
इसी अनुभव से प्रेरणा लेकर बाद में ‘प्रगति’ कार्यक्रम शुरू किया गया। इसके जरिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने, लंबित परियोजनाओं की समस्याओं को दूर करने और विकास कार्यों की गति तेज करने पर जोर दिया गया।
कृषि क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए गुजरात की ‘ज्योतिग्राम’ योजना के अनुभव को भी राष्ट्रीय स्तर पर विकास के मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
गरीबों और कमजोर वर्गों के लिए योजनाओं पर जोर
केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रस्ताव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गरीबों के प्रति दृष्टिकोण और उनके व्यक्तिगत अनुभवों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें घर, पेयजल, बैंकिंग और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने वाली योजनाओं को प्रमुखता दी गई है।
प्रस्ताव के अनुसार, देश में करीब 60 करोड़ जनधन खाते खोले गए हैं, जबकि चार करोड़ से अधिक घर बनाए गए हैं। करीब 25 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर निकलने का भी इसमें उल्लेख किया गया है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए ‘लखपति दीदी’ योजना का जिक्र करते हुए कहा गया कि करीब 3.5 करोड़ महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हुई हैं। इसके अलावा महिलाओं को विधानसभाओं में आरक्षण देने से जुड़े ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को भी महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
युवाओं, किसानों और जनजातीय समुदायों पर फोकस
प्रस्ताव में स्टार्टअप, कौशल विकास और शिक्षा सुधारों के माध्यम से युवाओं के लिए नए अवसर तैयार होने की बात कही गई है। किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत अब तक चार लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि बैंक खातों में भेजे जाने का उल्लेख किया गया है।
विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विकास के लिए शुरू की गई ‘पीएम-जनमन’ योजना को भी सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया है।
सुधारों से लेकर आत्मनिर्भर भारत तक
केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रस्ताव में वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी लागू करने, सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत करने और औपनिवेशिक दौर के कई कानूनों में बदलाव जैसे सुधारों का उल्लेख किया गया है।
इसके साथ ही स्वच्छता, डिजिटल लेनदेन और देश में बने उत्पादों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की अपील को भी विकास की व्यापक सोच से जोड़ा गया है।
बुनियादी ढांचे और उत्पादन क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए प्रस्ताव में कहा गया है कि सरकारी पूंजीगत व्यय दो लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार, रेलवे विद्युतीकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन, रक्षा निर्माण और सेमीकंडक्टर उद्योग को भी आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
तकनीक और अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ी भारत की क्षमता
प्रस्ताव में जनधन, आधार और मोबाइल के माध्यम से सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाने तथा यूपीआई को डिजिटल भुगतान में बड़े बदलाव के रूप में प्रस्तुत किया गया है। कोविड-19 के दौरान भारत में वैक्सीन निर्माण और चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल लैंडिंग को देश की वैज्ञानिक क्षमता के उदाहरण के तौर पर रखा गया है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी के विस्तार के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक और जैव प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती क्षमता का भी उल्लेख किया गया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक मंच पर भारत
प्रस्ताव में 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक और 2025 के ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में किया गया है। अनुच्छेद 370 हटाने, वन रैंक वन पेंशन लागू करने और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद बनाने जैसे फैसलों को भी इसमें शामिल किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जी20 और ब्रिक्स जैसे मंचों पर भारत की भूमिका, ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज उठाने और अफ्रीकी संघ को जी20 में शामिल कराने का उल्लेख किया गया है। ‘वैक्सीन मैत्री’ के जरिए दूसरे देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले 36 देशों के सम्मानों को भी भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव से जोड़ा गया है।
विरासत, पर्यावरण और विकसित भारत का लक्ष्य
प्रस्ताव में विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन पर भी जोर दिया गया है। नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन से निपटने की पहल, योग और श्रीअन्न के प्रचार के साथ काशी विश्वनाथ धाम के पुनर्निर्माण तथा अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का भी उल्लेख किया गया है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अंत में 2047 तक भारत को समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के लिए सामूहिक प्रयास की प्रतिबद्धता जताई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के लगातार नेतृत्व को इसी लंबी विकास यात्रा की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में प्रस्ताव में प्रस्तुत किया गया है।




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