आसनसोल, पश्चिम बर्धमान: महिलाओं और छात्राओं को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक बनाने तथा उनमें आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती विकसित करने के उद्देश्य से आसनसोल में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। पोलो मैदान स्थित इंडोर स्टेडियम में 10 दिवसीय कलरीपायट्टु प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है। इस शिविर में पश्चिम बंगाल के अलग-अलग क्षेत्रों के अलावा पुरुलिया और झारखंड सहित अन्य स्थानों से भी प्रतिभागी हिस्सा लेने पहुंचे हैं। आयोजकों के अनुसार, इस पहल को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है और लगभग 180 प्रतिभागी प्रशिक्षण ले रहे हैं।
आसनसोल उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी की पहल पर आयोजित इस शिविर का उद्देश्य केवल एक पारंपरिक मार्शल आर्ट सिखाना नहीं है, बल्कि महिलाओं और लड़कियों को अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना भी है। आयोजकों का मानना है कि आत्मरक्षा का प्रशिक्षण महिलाओं को विपरीत परिस्थितियों में सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठाने का व्यावहारिक ज्ञान दे सकता है।
पंजीकरण के लक्ष्य से अधिक दिखा प्रतिभागियों का उत्साह
आयोजकों के मुताबिक, शिविर की शुरुआत में लगभग 160 प्रतिभागियों के पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन प्रशिक्षण को लेकर लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ती गई और करीब 200 से 250 लोगों ने पंजीकरण कराया। फिलहाल लगभग 180 प्रतिभागी शिविर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। अलग-अलग क्षेत्रों से महिलाओं और छात्राओं की भागीदारी इस बात को दर्शाती है कि आत्मरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।
प्रशिक्षण के लिए केरल से करीब 10 प्रशिक्षकों की टीम आसनसोल पहुंची है। यह टीम प्रतिभागियों को कलरीपायट्टु की विभिन्न तकनीकों और अभ्यासों से परिचित करा रही है। दस दिनों तक चलने वाले इस शिविर में प्रतिभागियों को नियमित अभ्यास के माध्यम से इस पारंपरिक युद्धकला की बुनियादी जानकारी देने की योजना है।
उद्घाटन समारोह में कई गणमान्य लोग हुए शामिल
प्रशिक्षण शिविर के उद्घाटन कार्यक्रम में पश्चिम बर्धमान के जिला शासक एस. पन्नमबलम, आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस कमिश्नर प्रणव कुमार, आसनसोल राइफल क्लब के पप्पू ढल और आसनसोल महिला कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. स्वाति चक्रवर्ती सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इस अवसर पर जिला शासक एस. पन्नमबलम ने कलरीपायट्टु को केरल की प्राचीन और पारंपरिक मार्शल आर्ट बताते हुए कहा कि इसका अभ्यास लंबे समय से किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि आसनसोल इंडोर स्टेडियम में लड़कियों के लिए इस तरह का प्रशिक्षण आयोजित होना उपयोगी पहल है। उनके अनुसार, आत्मरक्षा का प्रशिक्षण छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करने में सहायक हो सकता है।
उन्होंने इस तरह की गतिविधियों को महिलाओं और छात्राओं के शारीरिक विकास के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व निर्माण से भी जोड़कर देखा। प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी क्षमताओं को पहचानने और नियमित अभ्यास के महत्व को समझने का अवसर मिलता है।
हर छह महीने में शिविर आयोजित करने की योजना
विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने बताया कि महिला सशक्तिकरण और आत्मरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। उनका कहना है कि महिलाओं और लड़कियों को ऐसी तकनीकों का ज्ञान होना चाहिए, जिनसे जरूरत पड़ने पर वे अपनी सुरक्षा के लिए स्वयं प्रयास कर सकें।
उन्होंने बताया कि यह पहला प्रशिक्षण सत्र है और भविष्य में प्रत्येक छह महीने पर इस तरह के शिविर आयोजित करने की योजना बनाई गई है। अगले छह महीने में आयोजित होने वाले प्रशिक्षण शिविर की तारीख 10 अक्टूबर को घोषित की जाएगी। इस योजना के माध्यम से अधिक से अधिक महिलाओं और छात्राओं तक आत्मरक्षा प्रशिक्षण पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
विधायक के अनुसार, कलरीपायट्टु का प्रशिक्षण केवल शारीरिक तकनीक सीखने तक सीमित नहीं है। इसके नियमित अभ्यास से प्रतिभागियों में अनुशासन, एकाग्रता, मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास विकसित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उनका मानना है कि आत्मरक्षा का ज्ञान महिलाओं को अधिक जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है।
प्रतिभागियों से नहीं लिया जा रहा कोई शुल्क
इस शिविर की एक विशेष बात यह है कि इसमें शामिल होने वाले प्रतिभागियों से किसी प्रकार का प्रशिक्षण शुल्क नहीं लिया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, शिविर को आसनसोल स्पोर्ट्स क्लब एसोसिएशन की ओर से प्रायोजित किया गया है। इससे आर्थिक कारणों से प्रशिक्षण से वंचित रह जाने वाली इच्छुक महिलाओं और छात्राओं को भी इसमें भाग लेने का अवसर मिल रहा है।
आयोजकों का कहना है कि इस तरह के कार्यक्रमों का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचना चाहिए। इसलिए प्रशिक्षण को निःशुल्क रखा गया है, ताकि अलग-अलग आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि से आने वाली प्रतिभागी भी इसमें शामिल हो सकें।
आसनसोल महिला कॉलेज में भी शुरू हुआ प्रशिक्षण
महिलाओं के बीच कलरीपायट्टु को लोकप्रिय बनाने की दिशा में आसनसोल महिला कॉलेज में भी पहल की गई है। कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. स्वाति चक्रवर्ती ने बताया कि सितंबर महीने से कॉलेज की छात्राओं के लिए कलरीपायट्टु प्रशिक्षण शुरू किया गया है। कॉलेज के जीबी प्रेसिडेंट विधान मुखर्जी और पश्चिम बर्धमान के विधायक के सहयोग से परिसर में यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
डॉ. स्वाति चक्रवर्ती के अनुसार, महिला सुरक्षा वर्तमान समय का महत्वपूर्ण विषय है। आत्मरक्षा के साथ इस तरह के प्रशिक्षण से छात्राओं में साहस, शारीरिक सक्रियता और मानसिक मजबूती विकसित करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि छात्राओं को पढ़ाई के साथ ऐसी गतिविधियों में भी हिस्सा लेना चाहिए, जो उनके व्यक्तित्व विकास में योगदान दें।
मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एकाग्रता पर भी ध्यान
डॉ. स्वाति चक्रवर्ती ने विद्यार्थियों के बीच मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए कहा कि स्कूल और कॉलेज के छात्रों का काफी समय मोबाइल पर बीत रहा है। ऐसे में मार्शल आर्ट जैसी गतिविधियां उन्हें नियमित शारीरिक अभ्यास से जोड़ सकती हैं। इससे अनुशासन और एकाग्रता विकसित करने में भी सहायता मिल सकती है।
कलरीपायट्टु के अभ्यास में शारीरिक संतुलन, समन्वय, लचीलापन और विभिन्न शारीरिक तकनीकों पर ध्यान दिया जाता है। नियमित अभ्यास के दौरान प्रशिक्षुओं को निर्देशों का पालन करना, शरीर की गतिविधियों पर नियंत्रण रखना और ध्यान केंद्रित करना सीखना पड़ता है। उन्होंने छात्राओं से ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आगे बढ़कर हिस्सा लेने की अपील की।
प्रशिक्षण के बाद अन्य महिलाओं को भी जागरूक करने की पहल
आयोजकों की योजना है कि प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रतिभागियों को भविष्य में अन्य महिलाओं और छात्राओं को भी आत्मरक्षा की तकनीकों से परिचित कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे प्रशिक्षण का लाभ केवल शिविर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका संदेश व्यापक स्तर पर पहुंच सकेगा।
आसनसोल में शुरू हुआ यह 10 दिवसीय शिविर महिला सुरक्षा, शारीरिक सक्रियता और पारंपरिक मार्शल आर्ट के प्रति जागरूकता बढ़ाने की एक पहल है। यदि हर छह महीने पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होते हैं, तो अधिक संख्या में महिलाओं और छात्राओं को इससे जुड़ने का अवसर मिल सकता है। फिलहाल इंडोर स्टेडियम में प्रतिभागी केरल से आए प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में कलरीपायट्टु के गुर सीख रहे हैं।




Leave a Reply