आसनसोल: पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग यानी पीएचई से जुड़े ठेकेदारों के बकाया भुगतान का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। आसनसोल में पश्चिम बंगाल ठेकेदार पीएचई यूनियन की ओर से पत्रकार वार्ता आयोजित कर लंबे समय से लंबित राशि के भुगतान की मांग उठाई गई। पत्रकार वार्ता के दौरान यूनियन के प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याओं को सामने रखते हुए राज्य सरकार से बकाया राशि का जल्द से जल्द भुगतान करने की अपील की।
यूनियन का कहना है कि लंबे समय से विभिन्न कार्यों की राशि लंबित रहने के कारण ठेकेदारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि काम पूरा करने के बावजूद भुगतान समय पर नहीं मिलने से निर्माण कार्यों से जुड़े खर्च, मजदूरों का भुगतान, सामग्री की लागत और अन्य वित्तीय जिम्मेदारियों को पूरा करना मुश्किल होता जा रहा है।
लंबे समय से भुगतान का इंतजार
पत्रकार वार्ता के दौरान पश्चिम बंगाल ठेकेदार पीएचई यूनियन की ओर से कहा गया कि बकाया राशि के भुगतान को लेकर संबंधित स्तर पर कई बार आवेदन और आग्रह किया जा चुका है। इसके बावजूद अभी तक उनकी पूरी बकाया राशि का भुगतान नहीं हो पाया है।
ठेकेदारों का कहना है कि किसी भी सरकारी परियोजना को पूरा करने में बड़ी मात्रा में धनराशि खर्च होती है। निर्माण सामग्री खरीदने से लेकर श्रमिकों और कर्मचारियों को भुगतान करने तक कई तरह के खर्च ठेकेदारों को पहले उठाने पड़ते हैं। ऐसे में यदि काम पूरा होने के बाद लंबे समय तक भुगतान अटका रहता है तो ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ता है।
यूनियन ने कहा कि बकाया राशि केवल कागज पर दर्ज रकम नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ी संख्या में मजदूरों, कर्मचारियों, आपूर्तिकर्ताओं और छोटे कारोबारियों का आर्थिक हित जुड़ा हुआ है।
सरकार से तत्काल भुगतान की मांग
पश्चिम बंगाल ठेकेदार पीएचई यूनियन ने पत्रकार वार्ता के माध्यम से राज्य सरकार से स्पष्ट रूप से मांग की कि लंबे समय से लंबित भुगतान की प्रक्रिया को तेज किया जाए। यूनियन का कहना है कि बकाया राशि का जल्द भुगतान होने से ठेकेदारों को राहत मिलेगी और वे अपने वित्तीय दायित्वों को पूरा कर सकेंगे।
यूनियन प्रतिनिधियों के अनुसार, सरकार से उनकी मांग कोई नई नहीं है। बकाया भुगतान को लेकर पहले भी कई बार संबंधित अधिकारियों और विभागीय स्तर पर अपनी समस्याएं रखी गई हैं। लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने के कारण ठेकेदारों को बार-बार अपनी मांग उठानी पड़ रही है।
पत्रकार वार्ता के दौरान यूनियन ने सरकार से आग्रह किया कि लंबित बिलों और भुगतान से जुड़े मामलों की समीक्षा कर जल्द से जल्द राशि जारी की जाए।
काम करने वाले ठेकेदारों पर बढ़ता आर्थिक दबाव
सरकारी परियोजनाओं में काम करने वाले ठेकेदारों को कई बार परियोजना पूरी करने से पहले ही विभिन्न मदों में खर्च करना पड़ता है। मजदूरों की मजदूरी, निर्माण सामग्री, परिवहन, मशीनरी, ईंधन और अन्य खर्च लगातार चलते रहते हैं।
ऐसे में भुगतान में देरी होने पर नकदी का दबाव बढ़ सकता है। छोटे और मध्यम स्तर के ठेकेदारों के लिए यह स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है। यूनियन का कहना है कि लंबे समय तक भुगतान लंबित रहने से ठेकेदारों के सामने अपने कामकाज को जारी रखने की समस्या खड़ी हो रही है।
ठेकेदारों के मुताबिक, यदि बकाया राशि समय पर मिलती रहे तो नई परियोजनाओं में भी काम को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने में आसानी होती है। लेकिन भुगतान में देरी से वित्तीय चक्र प्रभावित होता है और उसका असर कई स्तरों पर दिखाई देता है।
मजदूरों और आपूर्तिकर्ताओं पर भी असर
यूनियन ने यह भी संकेत दिया कि भुगतान में देरी का असर केवल ठेकेदारों तक सीमित नहीं रहता। किसी परियोजना से जुड़े मजदूर, सामग्री आपूर्तिकर्ता, वाहन मालिक और अन्य छोटे कारोबारी भी भुगतान की प्रक्रिया से जुड़े होते हैं।
यदि ठेकेदार को समय पर भुगतान नहीं मिलता है तो उसके लिए इन सभी पक्षों को समय पर भुगतान करना कठिन हो सकता है। यही वजह है कि यूनियन बकाया राशि के भुगतान को लेकर लगातार आवाज उठा रही है।
ठेकेदारों का कहना है कि वे सरकारी योजनाओं और परियोजनाओं को पूरा करने में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। इसलिए उनके द्वारा किए गए कार्यों की निर्धारित राशि का भुगतान भी समय पर होना जरूरी है।
पत्रकार वार्ता के जरिए सरकार तक पहुंचाई आवाज
आसनसोल में आयोजित पत्रकार वार्ता का मुख्य उद्देश्य अपनी समस्या को सार्वजनिक रूप से सामने रखना और सरकार का ध्यान बकाया भुगतान के मुद्दे की ओर आकर्षित करना था। यूनियन ने कहा कि वे बातचीत और आवेदन के माध्यम से अपनी समस्या का समाधान चाहते हैं।
यूनियन की ओर से सरकार से अपील की गई कि बकाया भुगतान के मामले को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाए। जिन ठेकेदारों के कार्य पूरे हो चुके हैं और जिनके बिल भुगतान के लिए लंबित हैं, उनकी प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए।
पत्रकार वार्ता के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि ठेकेदारों की मांग का उद्देश्य किसी तरह का विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और किए गए कार्य की लंबित राशि प्राप्त करना है।
बकाया भुगतान को लेकर आगे क्या?
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार और संबंधित विभाग की ओर से ठेकेदारों की मांग पर क्या कदम उठाया जाता है। यदि लंबित भुगतान की प्रक्रिया तेज होती है तो इससे लंबे समय से आर्थिक दबाव झेल रहे ठेकेदारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
वहीं, यदि भुगतान में और देरी होती है तो यूनियन की ओर से आगे की रणनीति पर विचार किए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, फिलहाल यूनियन ने सरकार से बातचीत और तत्काल भुगतान की मांग को ही प्रमुखता दी है।
ठेकेदारों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद
पश्चिम बंगाल ठेकेदार पीएचई यूनियन की पत्रकार वार्ता के बाद बकाया भुगतान का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। ठेकेदारों का कहना है कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी के तहत काम किया है और अब सरकार से उनके लंबित भुगतान को जारी करने की उम्मीद है।
आसनसोल में उठी यह आवाज आने वाले दिनों में कितना असर डालती है, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल यूनियन की सबसे बड़ी मांग यही है कि लंबे समय से अटकी बकाया राशि का जल्द भुगतान किया जाए, ताकि ठेकेदारों पर बना आर्थिक दबाव कम हो और वे अपने काम तथा उससे जुड़े लोगों के भुगतान की जिम्मेदारियों को सुचारू रूप से पूरा कर सकें।
कुल मिलाकर, आसनसोल में हुई इस पत्रकार वार्ता के माध्यम से पश्चिम बंगाल ठेकेदार पीएचई यूनियन ने सरकार के सामने अपना आर्थिक संकट रखा है। अब उम्मीद की जा रही है कि संबंधित विभाग मामले की समीक्षा कर लंबित भुगतान को लेकर जल्द कोई ठोस कदम उठाएगा।




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