बंगाल में बड़ा प्रशासनिक धमाका! 33 आईपीएस-डब्ल्यूबीपीएस अधिकारियों का तबादला

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 33 आईपीएस और डब्ल्यूबीपीएस अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी कर दिया है। इस बड़े फेरबदल को प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और कथित भ्रष्टाचार के मामलों की जांच को तेज करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

इस तबादले में कई बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। पूर्व कोलकाता पुलिस आयुक्त और सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारी सुप्रतिम सरकार को उनके पद से हटाकर दूरसंचार विभाग में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) के पद पर नियुक्त किया गया है। इसे प्रशासनिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

सबसे अहम नियुक्ति 1997 बैच के आईपीएस अधिकारी के. जयरमण की मानी जा रही है, जिन्हें डायरेक्टरेट ऑफ इकोनॉमिक ऑफेंसेज (आर्थिक अपराध विंग) का नया प्रमुख बनाया गया है। माना जा रहा है कि उनकी नियुक्ति से आर्थिक अपराध और भ्रष्टाचार के मामलों में जांच की रफ्तार तेज होगी। इससे पहले भी के. जयरमण कई चर्चित मामलों में सख्त कार्रवाई के लिए जाने जाते रहे हैं।

राज्य सरकार ने कथित संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विश्वजीत बसु की अध्यक्षता में एक विशेष जांच आयोग का गठन किया है। इस आयोग में के. जयरमण को सदस्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

इसी फेरबदल के तहत आईपीएस अधिकारी नटराजन रमेश बाबू को सीआईडी का महानिदेशक (डीजी) नियुक्त किया गया है। साथ ही उन्हें जेल विभाग के डीजी का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है, जिससे कानून-व्यवस्था पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

अन्य बदलावों की बात करें तो अतीश विश्वास को बारुईपुर पुलिस जिले में नई जिम्मेदारी दी गई है। वहीं अमित कुमार राठौर को बिधाननगर का नया पुलिस आयुक्त बनाया गया है। बिधाननगर के पूर्व पुलिस आयुक्त त्रिपुरारी अथर्व का तबादला ट्रैफिक और सड़क सुरक्षा विभाग में किया गया है।

इसके अलावा एसटीएफ में तैनात प्रवीण त्रिपाठी को स्थानांतरित कर होमगार्ड का आईजी नियुक्त किया गया है।

👉 राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यह व्यापक फेरबदल राज्य में प्रशासनिक ढांचे को चुस्त-दुरुस्त बनाने के साथ-साथ जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आने वाले समय में इसका असर कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।

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