Wednesday, 4 November 2026
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आसनसोल-दुर्गापुर

बंगाल के कॉलेजों में अब वैदिक गणित और चाणक्य नीति की पढ़ाई! उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव की तैयारी

Moutushi · 4 November 2026, 9:57 AM

कोलकाता, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़ : पश्चिम बंगाल की उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी चल रही है। राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम में अब प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को अधिक स्थान देने की योजना बनाई जा रही है। प्रस्ताव के अनुसार, गणित के पाठ्यक्रम में वैदिक गणित और राजनीति विज्ञान में चाणक्य नीति को शामिल किया जा सकता है। यदि यह योजना लागू होती है, तो विद्यार्थियों को आधुनिक विषयों के साथ-साथ भारतीय इतिहास, शास्त्रीय ज्ञान और प्राचीन चिंतन की परंपराओं से भी परिचित होने का अवसर मिलेगा।

यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था में पाठ्यक्रम संबंधी बदलाव करने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा बताई जा रही है। इसके लिए राज्य सरकार ने एक टास्क फोर्स का गठन किया है, जो विश्वविद्यालयों के लिए मॉडल पाठ्यक्रम और आवश्यक दिशानिर्देश तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।

वैदिक गणित और चाणक्य नीति को मिलेगी जगह

प्रस्तावित बदलाव में सबसे अधिक चर्चा गणित और राजनीति विज्ञान के विषयों को लेकर हो रही है। योजना के तहत गणित के विद्यार्थियों को वैदिक गणित से जुड़ी पद्धतियों और प्राचीन भारतीय गणितीय ज्ञान से परिचित कराया जा सकता है। वहीं, राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम में चाणक्य नीति तथा प्राचीन भारतीय राजनीतिक विचारों को शामिल करने की तैयारी है।

वैदिक गणित को आम तौर पर गणना की कुछ पारंपरिक तकनीकों और सूत्रों के संदर्भ में जाना जाता है। इसके माध्यम से संख्यात्मक गणनाओं को अलग-अलग तरीकों से समझने का अवसर मिल सकता है। दूसरी ओर, चाणक्य नीति में शासन, प्रशासन, कूटनीति, नेतृत्व, अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवहार से जुड़े विचारों का अध्ययन किया जाता है।

हालांकि, इन विषयों को किस स्तर पर और कितने विस्तार से पढ़ाया जाएगा, यह अंतिम पाठ्यक्रम और विश्वविद्यालयों के लिए तैयार होने वाले दिशानिर्देशों पर निर्भर करेगा।

एम. जगदीश कुमार के नेतृत्व में टास्क फोर्स

जानकारी के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के लिए गठित टास्क फोर्स का नेतृत्व विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर एम. जगदीश कुमार कर रहे हैं। कल्याणी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर कल्लोल पाल भी इस टास्क फोर्स के सदस्य हैं।

टास्क फोर्स का उद्देश्य राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए ऐसा मॉडल और दिशानिर्देश तैयार करना है, जिसके आधार पर भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों को उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सके। इसमें वैदिक ज्ञान, प्राचीन भारतीय शास्त्रीय साहित्य और पारंपरिक बौद्धिक उपलब्धियों से संबंधित पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।

प्रोफेसर कल्लोल पाल के अनुसार, राज्य के विश्वविद्यालयों के लिए मॉडल पाठ्यक्रम और दिशानिर्देश तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का पूरी तरह पालन करते हुए वैदिक और शास्त्रीय ज्ञान से जुड़े उन्हीं पहलुओं को शामिल करने पर विचार होगा, जो वर्तमान समय के अनुरूप हों।

आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का समन्वय

इस प्रस्ताव के पीछे मुख्य विचार यह है कि उच्च शिक्षा में आधुनिक विषयों के अध्ययन के साथ भारत की प्राचीन बौद्धिक विरासत को भी समझने का अवसर मिले। भारत में गणित, खगोल विज्ञान, दर्शन, राजनीति, चिकित्सा और साहित्य के क्षेत्रों में लंबे समय से ज्ञान परंपरा रही है। ऐसे में इन विषयों के ऐतिहासिक विकास और योगदान को विश्वविद्यालय स्तर पर पढ़ाना विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो सकता है।

हालांकि, किसी भी पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा में शामिल करते समय उसकी विषयवस्तु, प्रमाणिकता और वर्तमान उपयोगिता का अकादमिक मूल्यांकन भी महत्वपूर्ण होगा। विशेषकर गणित और विज्ञान जैसे विषयों में ऐतिहासिक उपलब्धियों के अध्ययन के साथ आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति और प्रमाण आधारित शिक्षा को बनाए रखना जरूरी है।

शिक्षाविदों की राय अलग-अलग, आधुनिक विज्ञान पर भी जोर

प्रस्तावित बदलाव को लेकर शिक्षाविदों के बीच अलग-अलग विचार सामने आए हैं। जादवपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अभिजीत चक्रवर्ती ने इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि आधुनिक विज्ञान और यूरोपीय विज्ञान के साथ प्राचीन विज्ञान को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा सकता है। उनके अनुसार, इससे देश की ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक विरासत को उचित स्थान मिलेगा।

वहीं, जादवपुर विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नंदिनी मुखोपाध्याय ने इस विषय पर संतुलित दृष्टिकोण रखने की बात कही है। उनका मानना है कि प्राचीन गणित और ज्ञान परंपरा को इतिहास के रूप में पढ़ाने में कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में आधुनिक गणित, विज्ञान और तकनीक की प्रगति पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए।

दोनों शिक्षाविदों की राय से स्पष्ट है कि प्रस्ताव केवल पाठ्यक्रम में नए विषय जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ यह बहस भी जुड़ी है कि प्राचीन ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक शिक्षा के बीच संतुलन किस तरह बनाया जाए।

विश्वविद्यालयों में लागू होने से पहले तैयार होंगे दिशानिर्देश

फिलहाल पश्चिम बंगाल की उच्च शिक्षा व्यवस्था में इन बदलावों को लागू करने के लिए मॉडल पाठ्यक्रम और दिशानिर्देश तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। अभी वैदिक गणित और चाणक्य नीति को शामिल करने का प्रस्ताव सामने आया है, लेकिन इसे कब से लागू किया जाएगा, किन विश्वविद्यालयों में किस रूप में पढ़ाया जाएगा और परीक्षा व्यवस्था में इसका क्या स्वरूप होगा, इस संबंध में अंतिम जानकारी सामने आना बाकी है।

यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो राज्य के विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं को समझने का नया अवसर मिल सकता है। अब निगाहें टास्क फोर्स की सिफारिशों और राज्य सरकार के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।

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