दुर्गापुर, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़: स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने, ग्रामीणों के साथ कंपनी प्रबंधन के व्यवहार में सुधार करने और आसपास के गांवों के विकास की मांग को लेकर दुर्गापुर के इछापुर और हेतेडोबा इलाके में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। मंगलवार सुबह से ही ईस्ट इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड (ईआईएचपीएल) के गेट नंबर-1 के सामने स्थानीय ग्रामीण शांतिपूर्ण धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी प्रबंधन के सामने तीन सूत्री मांगें रखी हैं और स्पष्ट किया है कि केवल आश्वासन देने से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा। ग्रामीण चाहते हैं कि कंपनी उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुने और मांगों को पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाए।
ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी लंबे समय से इलाके में अपना कारोबार संचालित कर रही है, लेकिन आसपास के गांवों के लोगों को उसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। रोजगार के अवसरों से लेकर बुनियादी नागरिक सुविधाओं तक कई मुद्दों को लेकर स्थानीय निवासियों में असंतोष है। इसी नाराजगी को सामने रखने के लिए ग्रामीणों ने कंपनी के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने धरना शुरू किया।
स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की प्रमुख मांग
प्रदर्शनकारियों की सबसे प्रमुख मांग है कि कंपनी में स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर दिए जाएं। ग्रामीणों का सवाल है कि जब उनके इलाके में उद्योग और व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो आसपास के गांवों के शिक्षित और योग्य युवाओं को नौकरी पाने में प्राथमिकता क्यों नहीं मिलनी चाहिए?
उनका कहना है कि स्थानीय युवा रोजगार की तलाश में दूसरे क्षेत्रों का रुख करने को मजबूर हैं, जबकि उनके आसपास ही कंपनी का कारोबार चल रहा है। ऐसे में यदि कंपनी योग्य स्थानीय युवाओं को अवसर देती है, तो इससे आसपास के परिवारों को आर्थिक सहारा मिल सकता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए और रोजगार के उपलब्ध अवसरों की जानकारी पारदर्शी तरीके से साझा की जाए।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने से केवल एक व्यक्ति को नौकरी नहीं मिलेगी, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि रोजगार का मुद्दा इस आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
मैनेजर के कथित दुर्व्यवहार से ग्रामीण नाराज
ग्रामीणों की दूसरी शिकायत कंपनी के एक मैनेजर के कथित व्यवहार को लेकर है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि संबंधित मैनेजर स्थानीय लोगों के साथ ठीक तरीके से पेश नहीं आते और बातचीत के दौरान अशालीन भाषा का इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी में कामकाज और स्थानीय निवासियों के बीच संवाद के दौरान सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।
उनकी मांग है कि कंपनी प्रबंधन इस शिकायत की जांच करे और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो उचित कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का मानना है कि किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान के लिए आसपास के लोगों के साथ बेहतर संबंध बनाए रखना जरूरी है। स्थानीय निवासियों की समस्याओं को सुनना और उनके साथ सम्मानपूर्वक बातचीत करना कंपनी की सामाजिक जिम्मेदारी का भी हिस्सा है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ व्यक्तिगत लड़ाई नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के सम्मान और बेहतर व्यवहार की मांग से जुड़ा है।
सड़क, पेयजल और स्ट्रीट लाइट को लेकर भी उठाई आवाज
तीसरी मांग क्षेत्र के विकास और बुनियादी सुविधाओं से संबंधित है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी लंबे समय से इलाके में कारोबार कर रही है, लेकिन आसपास के गांवों के विकास में उसकी कोई उल्लेखनीय भूमिका दिखाई नहीं देती। सड़क, पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसी जरूरी सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है।
उनका कहना है कि गांवों में रहने वाले लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में इन सुविधाओं की जरूरत पड़ती है। बेहतर सड़कें आवागमन को आसान बनाती हैं, स्वच्छ पेयजल लोगों की बुनियादी आवश्यकता है और स्ट्रीट लाइट से रात के समय आवाजाही में सुविधा मिलती है। ग्रामीण चाहते हैं कि कंपनी प्रबंधन आसपास के क्षेत्रों की समस्याओं को समझे और विकास से जुड़े कार्यों में सहयोग करे।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, किसी भी कंपनी का आसपास के क्षेत्र से संबंध केवल कारोबार तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जिस इलाके में कंपनी अपनी गतिविधियां संचालित करती है, वहां के लोगों की समस्याओं और जरूरतों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
तीन सूत्री मांगों पर अड़े ग्रामीण, प्रबंधन के जवाब का इंतजार
मंगलवार सुबह से गेट नंबर-1 के सामने शुरू हुआ धरना इन तीन प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित है। ग्रामीणों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे हैं और कंपनी प्रबंधन से बातचीत के जरिए समाधान चाहते हैं। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। मांगों को पूरा करने के लिए स्पष्ट निर्णय और ठोस पहल जरूरी है।
दूसरी ओर, ग्रामीणों के आरोपों और धरना-प्रदर्शन को लेकर ईआईएचपीएल प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए कंपनी का पक्ष और आंदोलन को लेकर उसका रुख स्पष्ट नहीं हो पाया है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि कंपनी प्रबंधन ग्रामीणों की तीन सूत्री मांगों पर क्या कदम उठाता है। यदि बातचीत के जरिए रोजगार, व्यवहार और क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनती है, तो विवाद का समाधान निकल सकता है। फिलहाल इछापुर और हेतेडोबा के ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर कंपनी के गेट नंबर-1 के सामने धरने पर बैठे हैं।




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