Tuesday, 3 November 2026
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आसनसोल-दुर्गापुर

ट्यूशन पढ़ने गई मासूम के साथ मारपीट का आरोप, सालानपुर में शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग

Moutushi · 3 November 2026, 10:23 AM

सालानपुर, बिकाश चंद्र, : पश्चिम बर्दवान जिले के बाराबनी विधानसभा क्षेत्र के सालानपुर ब्लॉक में ट्यूशन पढ़ने गई एक मासूम बच्ची के साथ कथित तौर पर मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद बच्ची के माता-पिता में काफी नाराजगी देखी जा रही है। मामले को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी प्रतिक्रिया सामने आई है। भाजपा नेता अभिजीत राय ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए संबंधित शिक्षक के खिलाफ निष्पक्ष जांच और आरोप साबित होने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा देने की जिम्मेदारी संभालने वाले किसी भी व्यक्ति को बच्चों के साथ हिंसा करने का अधिकार नहीं है।

घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर बच्चों की सुरक्षा और ट्यूशन संस्थानों में शिक्षकों के व्यवहार पर सवाल उठने लगे हैं। अभिभावकों के लिए अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए किसी शिक्षक के पास भेजना विश्वास से जुड़ा मामला होता है। ऐसे में यदि किसी बच्चे के साथ मारपीट का आरोप सामने आता है, तो यह स्वाभाविक रूप से परिवार और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय बन जाता है।

ट्यूशन पढ़ने गई बच्ची के साथ मारपीट का आरोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बाराबनी विधानसभा क्षेत्र के सालानपुर ब्लॉक में एक मासूम बच्ची ट्यूशन पढ़ने गई थी। इसी दौरान शिक्षक द्वारा कथित तौर पर उसके साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है। घटना की जानकारी सामने आने के बाद बच्ची के माता-पिता ने नाराजगी जताई है।

हालांकि, अभी तक घटना से जुड़ी सभी परिस्थितियों और मारपीट के कथित कारणों की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। संबंधित शिक्षक का पक्ष और मामले में प्रशासनिक स्तर पर की गई कार्रवाई की जानकारी भी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जा रही है, ताकि वास्तविक तथ्यों का पता चल सके।

बच्चों को पढ़ाई के लिए ट्यूशन भेजने वाले अभिभावक शिक्षकों पर भरोसा करते हैं कि वे उनके बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा देंगे। इसलिए इस तरह के आरोप सामने आने पर अभिभावकों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।

भाजपा नेता अभिजीत राय ने जताई कड़ी नाराजगी

इस मामले पर भाजपा नेता अभिजीत राय ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कथित घटना को बेहद निंदनीय और शर्मनाक बताते हुए कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल बच्चों को किताबों का ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उन्हें सही मार्गदर्शन देना, अनुशासन सिखाना और उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सहयोग करना भी है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक का स्थान बेहद महत्वपूर्ण होता है। बच्चे अपने शिक्षकों से सीखते हैं और उनके व्यवहार से प्रभावित होते हैं। ऐसे में यदि किसी शिक्षक पर मासूम बच्चे के साथ मारपीट करने का आरोप लगता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

अभिजीत राय ने कहा कि बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। शिक्षा के नाम पर बच्चों को डराना, धमकाना या शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं है।

निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग

भाजपा नेता ने संबंधित मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि बच्ची के साथ वास्तव में क्या हुआ था और घटना के पीछे की परिस्थितियां क्या थीं। जांच के दौरान बच्ची और उसके परिवार की बातों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी मांग की कि यदि जांच में शिक्षक के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उनके अनुसार, इस तरह के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए, क्योंकि मामला एक मासूम बच्चे की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा को सामान्य अनुशासन का हिस्सा बताकर उचित नहीं ठहराया जा सकता। शिक्षक और अभिभावक दोनों की जिम्मेदारी है कि बच्चों को ऐसा वातावरण मिले, जहां वे बिना किसी डर के पढ़ाई कर सकें।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ी

सालानपुर की इस घटना ने एक बार फिर निजी ट्यूशन और कोचिंग व्यवस्था में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज कर दी है। आज बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल के अलावा निजी शिक्षकों के पास पढ़ने भेजते हैं। ऐसे में शिक्षक का व्यवहार, पढ़ाई का वातावरण और बच्चों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण विषय बन जाते हैं।

अभिभावकों को भी चाहिए कि वे बच्चों से नियमित रूप से उनकी पढ़ाई और ट्यूशन के अनुभव के बारे में बातचीत करें। यदि बच्चा किसी शिक्षक के व्यवहार से असहज महसूस करता है या किसी तरह की परेशानी बताता है, तो उसकी बात को गंभीरता से सुनना जरूरी है।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि बच्चों को अनुशासित करने के लिए सकारात्मक तरीके अपनाए जाने चाहिए। शारीरिक दंड से बच्चों के मन में डर और असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है। शिक्षा का उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास और सीखने की रुचि विकसित करना होना चाहिए।

अब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें

फिलहाल सालानपुर में ट्यूशन शिक्षक पर मासूम बच्ची के साथ मारपीट के आरोप का मामला चर्चा में है। भाजपा नेता अभिजीत राय की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो गया है। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और आरोपों की सच्चाई सामने आने के बाद क्या कार्रवाई की जाती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्ची की सुरक्षा, सम्मान और मानसिक स्थिति को प्राथमिकता दी जाए। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। शिक्षा के नाम पर बच्चों के साथ हिंसा के लिए किसी भी स्तर पर कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

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