ब्लास्टिंग से कांप उठा गांव! न्यू केंदा ओसीपी बंद, पुनर्वास की मांग पर आदिवासियों का बड़ा आंदोलन

single balaji

जामुड़िया, पश्चिम बर्धमान:
ईसीएल केंदा एरिया के अंतर्गत आने वाले न्यू केंदा ओसीपी कुआरी तीन में गुरुवार को बड़ा हंगामा देखने को मिला। पुनर्वास, पानी की समस्या और ब्लास्टिंग से हो रही परेशानियों को लेकर स्थानीय खेपाडांगा आदिवासी गांव के ग्रामीणों ने खदान का काम पूरी तरह बंद करा दिया।

सुबह से ही बड़ी संख्या में आदिवासी महिला और पुरुष ओसीपी परिसर में पहुंच गए और वहां चल रही सभी मशीनों को बंद करा दिया। इसके साथ ही कोयला ढोने वाली ट्रांसपोर्टिंग गाड़ियों को भी रोक दिया गया, जिससे खदान का पूरा कामकाज ठप हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) केंदा एरिया की सुरक्षा टीम और सीआईएसएफ के जवान मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने का प्रयास किया। हालांकि ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर डटे रहे।

“ब्लास्टिंग से लगता है जैसे भूकंप आ गया हो”

स्थानीय निवासी कृष्ण मुर्मू ने बताया कि गांव के बिल्कुल पास ओपन कास्ट खदान चलने के कारण रोजाना होने वाली ब्लास्टिंग से ग्रामीणों को भारी परेशानी हो रही है।

उन्होंने कहा कि धमाकों की वजह से गांव के कई घरों की छतों और दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। ब्लास्टिंग के समय ऐसा लगता है मानो इलाके में भूकंप आ गया हो। इससे खासकर महिलाओं और छोटे बच्चों में डर और अफरा-तफरी मच जाती है।

कृष्ण मुर्मू ने कहा कि कोयला उत्पादन जरूरी है, लेकिन लोगों की सुरक्षा उससे भी ज्यादा जरूरी है। इसलिए ईसीएल प्रबंधन को सबसे पहले गांव के लोगों का सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास करना चाहिए।

पानी का संकट भी बना बड़ी समस्या

ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी शुरू होने से पहले ही गांव के तालाब और कुएं सूखने लगे हैं। आने वाले दिनों में गंभीर जल संकट की आशंका है, लेकिन ईसीएल प्रबंधन की ओर से पानी की समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

वहीं रीता बाउरी, अंजलि मड़ी और कल्पना मुर्मू ने कहा कि ब्लास्टिंग के कारण आदिवासी पाड़ा में रहना मुश्किल हो गया है। गांव में पानी की भारी समस्या है और एकमात्र तालाब भी सूखने के कगार पर पहुंच गया है।

उन्होंने साफ कहा कि पहले गांव के लोगों का सुरक्षित जगह पर पुनर्वास किया जाए, उसके बाद ईसीएल चाहे जितना कोयला खनन करे।

सुबह से ठप पड़ा खदान का काम

ग्रामीणों के इस प्रदर्शन के कारण गुरुवार सुबह से ही न्यू केंदा ओसीपी कुआरी तीन में कोयला उत्पादन और अन्य गतिविधियां पूरी तरह बंद पड़ी हुई हैं।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यदि जल्द ही ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।

फिलहाल प्रशासन और ईसीएल प्रबंधन स्थिति को शांत करने और ग्रामीणों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि औद्योगिक विकास और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के बीच स्थानीय लोगों की सुरक्षा और अधिकारों को कितना महत्व दिया जा रहा है

ghanty

Leave a comment