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बंगाल

तृणमूल कांग्रेस के तीन खातों पर रोक, 440 करोड़ रुपये फंसे—पार्टी में बढ़ा अंदरूनी विवाद

Moutushi · 20 June 2026, 12:57 PM

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा मोड़ तब आया जब तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों में सभी तरह के लेनदेन पर रोक लगा दी गई। पुलिस के निर्देश के बाद संबंधित निजी बैंक ने इन खातों से धन निकासी और किसी भी वित्तीय गतिविधि पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, इन खातों में करीब 440 करोड़ रुपये जमा हैं।

बताया जा रहा है कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के मुख्य खाते में लगभग 260 करोड़ रुपये मौजूद हैं, जबकि त्रिपुरा और गोवा इकाइयों के खातों में करीब 180 करोड़ रुपये जमा हैं। इस पूरे मामले की शुरुआत दक्षिण 24 परगना के एक तृणमूल विधायक द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से हुई है।

अंदरूनी खींचतान आई सामने

आरोप लगाया गया है कि ऋतब्रत बंद्योपाध्याय समर्थक गुट इन खातों पर नियंत्रण हासिल करना चाहता है। इसी विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है और पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

पार्टी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने भी इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जिन नेताओं को ‘विद्रोही’ कहा जा रहा है, उन्होंने इन्हीं खातों के पैसे से चुनाव लड़ा था। अगर अब उन खातों पर आपत्ति है, तो उस समय उस धन का उपयोग क्यों किया गया?

पूर्व कोषाध्यक्ष की भूमिका पर चर्चा

इस पूरे घटनाक्रम में पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास की भूमिका भी चर्चा में है। जानकारी के अनुसार, उन्होंने संभावित कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए बैंक को पत्र लिखकर खातों को फ्रीज करने का अनुरोध किया था। हालांकि हाल ही में संगठनात्मक बदलाव के बाद शुभाशीष चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष बनाया गया है, लेकिन बैंक रिकॉर्ड में अभी भी अरूप विश्वास का नाम दर्ज है।

साइबर थाने में शिकायत, जांच शुरू

दक्षिण 24 परगना के विधायक ने विधाननगर साइबर थाने में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि इन खातों में अवैध तरीके से प्राप्त धन जमा है। शिकायत में यह भी कहा गया कि डिजिटल बैंकिंग के माध्यम से इन खातों का संचालन किया जाता है और समय रहते कार्रवाई नहीं होने पर सबूत मिटाए जा सकते हैं।

पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि खाताधारकों के नाम स्पष्ट रूप से सामने नहीं आए हैं, लेकिन पहले चुनाव आयोग को दी गई जानकारी के अनुसार ये खाते पार्टी और उसकी राज्य इकाइयों से जुड़े बताए जा रहे हैं।

राजनीतिक हलचल तेज

इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। 675 करोड़ रुपये के कुल पार्टी फंड में से 440 करोड़ रुपये पर रोक लगने से संगठन के भीतर वित्तीय और राजनीतिक संकट गहरा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक ढांचे पर असर डाल सकता है। फिलहाल सभी की नजर पुलिस जांच और पार्टी नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी है।

बड़ा सवाल

क्या यह सिर्फ वित्तीय जांच का मामला है या फिर तृणमूल कांग्रेस के भीतर गहराते मतभेदों का संकेत? आने वाले दिनों में इस सवाल का जवाब साफ हो सकता है।

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