अंडाल, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़: पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले के अंडाल क्षेत्र में बच्चों को दिए जाने वाले पोषाहार की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खांद्रा ग्राम पंचायत के अंतर्गत सिदुली स्थित आईसीडीएस केंद्र संख्या 240 में बच्चों के भोजन के लिए उपलब्ध कराए गए चावल और दाल में कीड़े मिलने का आरोप सामने आया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ गई है। मामले को लेकर आसनसोल जिला भाजपा के मंडल-3 अध्यक्ष इंद्र सेन भी केंद्र पहुंचे और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की।
चावल और दाल में कीड़े मिलने का आरोप
आईसीडीएस केंद्रों का उद्देश्य छोटे बच्चों को पोषण संबंधी सहायता उपलब्ध कराना और उनके स्वास्थ्य एवं विकास में सहयोग देना है। ऐसे में सिदुली के केंद्र में बच्चों के भोजन के लिए रखे गए चावल और दाल में कथित तौर पर कीड़े मिलने की शिकायत ने खाद्य सामग्री के भंडारण और गुणवत्ता जांच की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्र संख्या 240 में बच्चों के भोजन के लिए उपलब्ध कराए गए चावल और दाल में कीड़े दिखाई दिए। मामला सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा कि बच्चों के लिए भेजी जाने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की जाती है और केंद्र तक पहुंचने से पहले उसकी स्थिति की पड़ताल की गई थी या नहीं।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि खाद्य सामग्री की आपूर्ति कब की गई थी, चावल और दाल में कीड़े किस स्तर पर लगे तथा सामग्री के भंडारण में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं। इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग की जांच के बाद ही मिल सकेगा।
केंद्र पहुंचकर इंद्र सेन ने मांगा जवाब
घटना की जानकारी मिलने के बाद आसनसोल जिला भाजपा के मंडल-3 अध्यक्ष इंद्र सेन संबंधित आईसीडीएस केंद्र पहुंचे। वहां उन्होंने बच्चों के भोजन में कथित तौर पर कीड़े मिलने के मामले को लेकर जानकारी मांगी।
आरोप है कि जब केंद्र की सहायिका से खाद्य सामग्री की स्थिति के बारे में सवाल किया गया, तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं। इस घटनाक्रम के बाद केंद्र में उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
इंद्र सेन ने कहा कि घटना से संबंधित वीडियो आईसीडीएस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजकर मामले की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने मांग की कि बच्चों के भोजन के लिए कीड़े लगी खाद्य सामग्री कैसे पहुंची, इसकी जांच होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है, तो जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
सहायिका ज्योत्स्ना बाउरी ने क्या बताया?
केंद्र की सहायिका ज्योत्स्ना बाउरी ने बताया कि केंद्र की शिक्षिका अक्सर नहीं आती हैं और ऐसे में उन्हें ही काम संभालना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले चावल और दाल की गुणवत्ता के बारे में उन्हें विशेष जानकारी नहीं है।
ज्योत्स्ना बाउरी के अनुसार, संबंधित दिन चावल और दाल में कीड़े दिखाई दिए थे। इसी वजह से किसी भी बच्चे को वह भोजन नहीं दिया गया। उनका यह बयान सामने आने के बाद बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था के साथ-साथ केंद्र के दैनिक संचालन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
हालांकि, शिक्षिका की अनुपस्थिति के संबंध में सहायिका द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस बारे में संबंधित शिक्षिका का पक्ष भी सामने नहीं आया है। इसलिए इन आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए विभागीय स्तर पर जानकारी जुटाना आवश्यक होगा।
बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को लेकर चिंता
छोटे बच्चों के लिए संतुलित और सुरक्षित भोजन बेहद महत्वपूर्ण होता है। शुरुआती उम्र में पर्याप्त पोषण मिलने से बच्चों के शारीरिक विकास, सीखने की क्षमता और सामान्य स्वास्थ्य को सहायता मिलती है। इसी उद्देश्य से आईसीडीएस व्यवस्था के तहत पात्र बच्चों को पोषण संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
ऐसे में यदि किसी केंद्र में भोजन के लिए उपलब्ध कराई गई सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं, तो मामले को गंभीरता से लेना जरूरी हो जाता है। कीड़े लगी खाद्य सामग्री का सेवन स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। हालांकि, सिदुली के इस मामले में किसी बच्चे के ऐसा भोजन खाने या बीमार पड़ने की सूचना उपलब्ध नहीं है।
सहायिका के अनुसार, कीड़े दिखाई देने के कारण उस दिन बच्चों को भोजन नहीं दिया गया। यदि यह जानकारी सही है, तो भोजन परोसने से पहले सामग्री की स्थिति देखना महत्वपूर्ण कदम रहा। इसके बावजूद यह जांचना आवश्यक है कि सामग्री केंद्र तक किस स्थिति में पहुंची और भविष्य में ऐसी शिकायतों को रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जा सकती है।
खाद्य सामग्री की जांच और भंडारण पर उठे सवाल
इस घटना ने खाद्य सामग्री की खरीद, आपूर्ति, भंडारण और वितरण की प्रक्रिया पर ध्यान आकर्षित किया है। चावल और दाल जैसी खाद्य सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए उचित भंडारण, नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता की निगरानी जरूरी होती है।
अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित सामग्री की आपूर्ति किस एजेंसी या व्यवस्था के माध्यम से की गई थी, उसे कितने समय से केंद्र में रखा गया था और क्या उसकी गुणवत्ता की जांच के रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। साथ ही, केंद्र में भोजन तैयार करने और बच्चों को परोसने से पहले सामग्री की जांच करने की जिम्मेदारी किसकी है, इसकी भी स्पष्टता जरूरी है।
यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन फिलहाल किसी व्यक्ति या संस्था को जिम्मेदार ठहराने से पहले तथ्यों की पुष्टि आवश्यक है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया का इंतजार
इस मामले में संबंधित केंद्र की शिक्षिका से संपर्क नहीं हो सका। वहीं, प्रशासन या आईसीडीएस विभाग की ओर से भी अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि विभाग ने शिकायत का संज्ञान लिया है या खाद्य सामग्री की जांच के लिए कोई कदम उठाया गया है।
स्थानीय स्तर पर अब यह मांग उठ रही है कि चावल और दाल के नमूनों की जांच कराई जाए तथा केंद्र में उपलब्ध खाद्य सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। साथ ही, बच्चों को नियमित रूप से सुरक्षित और निर्धारित मानकों के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराने के लिए निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए।
जांच से स्पष्ट होगी लापरवाही की वास्तविक स्थिति
सिदुली के आईसीडीएस केंद्र संख्या 240 से जुड़ा यह मामला बच्चों के पोषण कार्यक्रमों में गुणवत्ता नियंत्रण के महत्व को सामने लाता है। बच्चों के लिए निर्धारित भोजन की सामग्री सुरक्षित हो, उसका सही तरीके से भंडारण किया जाए और नियमित रूप से उसकी जांच हो—यह सुनिश्चित करना संबंधित व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि आईसीडीएस विभाग और स्थानीय प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं। खाद्य सामग्री की जांच, संबंधित कर्मचारियों के बयान और आपूर्ति से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चावल और दाल में कीड़े मिलने की वजह क्या थी और क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी।




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