Wednesday, 16 September 2026
Advertisement
ब्रेकिंग न्यूज़
वोट-बाद हिंसा के आरोप में सालानपुर के तृणमूल प्रधान श्रीकांत पातर गिरफ्तार, पुलिस ने मांगी 7 दिन की रिमांड आसनसोल में नगर निगम आयुक्त का औचक निरीक्षण, उषाग्राम-कालिपहाड़ी में कचरा फैलाने वालों पर नजर करीब सात दिन बाद जेल से बाहर आए कांग्रेस नेता अरूप मुखर्जी, रिहाई पर समर्थकों में खुशी आसनसोल में टोटो-मिनीबस विवाद पर लगा विराम, प्रशासन की मध्यस्थता के बाद हड़ताल खत्म आसनसोल नगर निगम गेट के सामने बड़ा हादसा, साइकिल से टक्कर के बाद सड़क पर पलटा टोटो; कई यात्री घायल दुर्गा पूजा से पहले आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट अलर्ट, सुरक्षा को लेकर बड़ी बैठक वोट-बाद हिंसा के आरोप में सालानपुर के तृणमूल प्रधान श्रीकांत पातर गिरफ्तार, पुलिस ने मांगी 7 दिन की रिमांड आसनसोल में नगर निगम आयुक्त का औचक निरीक्षण, उषाग्राम-कालिपहाड़ी में कचरा फैलाने वालों पर नजर करीब सात दिन बाद जेल से बाहर आए कांग्रेस नेता अरूप मुखर्जी, रिहाई पर समर्थकों में खुशी आसनसोल में टोटो-मिनीबस विवाद पर लगा विराम, प्रशासन की मध्यस्थता के बाद हड़ताल खत्म आसनसोल नगर निगम गेट के सामने बड़ा हादसा, साइकिल से टक्कर के बाद सड़क पर पलटा टोटो; कई यात्री घायल दुर्गा पूजा से पहले आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट अलर्ट, सुरक्षा को लेकर बड़ी बैठक
आसनसोल-दुर्गापुर

वोट-बाद हिंसा के आरोप में सालानपुर के तृणमूल प्रधान श्रीकांत पातर गिरफ्तार, पुलिस ने मांगी 7 दिन की रिमांड

Moutushi · 16 September 2026, 5:01 PM

सालानपुर: पश्चिम बर्धमान जिले के सालानपुर इलाके में चुनाव बाद हिंसा के आरोपों को लेकर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। सालानपुर ब्लॉक अंतर्गत कल्या ग्राम पंचायत के तृणमूल प्रधान श्रीकांत पातर को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात सालानपुर थाने की रूपनारायणपुर चौकी की पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर चयनपुर स्थित उनके आवास पर छापेमारी कर उन्हें गिरफ्तार किया। बुधवार को उन्हें आसनसोल अदालत में पेश किया गया, जहां पुलिस की ओर से पूछताछ के लिए सात दिनों की रिमांड की मांग की गई।

श्रीकांत पातर की गिरफ्तारी के बाद सालानपुर क्षेत्र की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। उनके खिलाफ चुनाव परिणाम आने के बाद हिंसा, मारपीट और तोड़फोड़ से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

शिकायत के आधार पर पुलिस की कार्रवाई

पुलिस सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, बादल पातर नामक व्यक्ति की ओर से दर्ज कराई गई लिखित शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई। शिकायत में मारपीट और तोड़फोड़ सहित गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के सिलसिले में श्रीकांत पातर की गिरफ्तारी की गई है।

बताया जा रहा है कि हालिया विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद इलाके में हुई कुछ घटनाओं को लेकर श्रीकांत पातर का नाम सामने आया था। आरोपों के बाद उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की बात सामने आई और वह कथित तौर पर पुलिस की पकड़ से बाहर थे। इसके बाद पुलिस ने उनके ठिकाने की जानकारी मिलने पर कार्रवाई की।

अब अदालत में पेशी के दौरान पुलिस ने सात दिनों की रिमांड मांगी है। रिमांड मिलने पर पुलिस मामले से जुड़े घटनाक्रम, शिकायत में लगाए गए आरोपों और अन्य संभावित पहलुओं को लेकर पूछताछ कर सकती है।

कल्या पंचायत की राजनीति में प्रभावशाली चेहरा

श्रीकांत पातर कल्या ग्राम पंचायत के प्रधान हैं। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्थानीय प्रशासनिक जानकारी में भी कल्या ग्राम पंचायत के प्रधान के रूप में उनका नाम दर्ज दिखाई देता है।

स्थानीय स्तर पर उनकी पहचान सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस से जुड़े प्रभावशाली राजनीतिक चेहरे के रूप में बताई जाती रही है। उनके राजनीतिक प्रभाव और पंचायत की गतिविधियों को लेकर इलाके में पहले भी चर्चा होती रही है।

स्थानीय स्तर पर आयोजित सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में सक्रियता के कारण भी उनका नाम सामने आता रहा है। अब गिरफ्तारी के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका और क्षेत्र में उनके प्रभाव को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

संपत्ति को लेकर भी स्थानीय स्तर पर उठते रहे सवाल

श्रीकांत पातर की गिरफ्तारी के बाद उनके आर्थिक और राजनीतिक सफर को लेकर स्थानीय स्तर पर लगाए जाने वाले पुराने आरोप भी चर्चा में आ गए हैं। कुछ ग्रामीणों का दावा है कि राजनीति में प्रभाव बढ़ने से पहले उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में था। स्थानीय लोगों के अनुसार, उनके पिता पकौड़े की दुकान चलाते थे और श्रीकांत पातर खुद ठेला चलाने का काम करते थे।

इसके बाद राजनीतिक प्रभाव बढ़ने के साथ उनकी संपत्ति में कथित रूप से काफी वृद्धि होने का दावा किया जाता है। स्थानीय लोगों की ओर से कोयला, बालू और पत्थर से जुड़े कथित अवैध कारोबार, जमीन और झारखंड में कथित साझेदारियों को लेकर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि इस समय उपलब्ध नहीं है। इसलिए संपत्ति या कथित अवैध कारोबार से जुड़े आरोपों को जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता। यदि जांच एजेंसियों की ओर से इन मामलों में कोई अलग कार्रवाई या आधिकारिक जानकारी सामने आती है, तभी इन आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जमीन के बदले नौकरी के आरोप भी चर्चा में

स्थानीय स्तर पर श्रीकांत पातर पर जमीन से जुड़े मामलों में लोगों को कथित रूप से प्रभावित करने और कोलियरी में नौकरी से संबंधित आरोप भी लगाए जाते रहे हैं। कुछ ग्रामीणों का दावा है कि जमीन के बदले मिलने वाली नौकरियों के मामलों में भी उनका प्रभाव रहा है।

हालांकि, इन आरोपों के संबंध में भी किसी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष या आधिकारिक जांच रिपोर्ट की जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इन दावों को केवल स्थानीय आरोपों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

राजनीतिक संरक्षण के आरोपों ने बढ़ाई चर्चा

श्रीकांत पातर की गिरफ्तारी के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में उनके कथित राजनीतिक संरक्षण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ जानकारों और विरोधी राजनीतिक खेमों का दावा है कि लंबे समय तक स्थानीय राजनीति में प्रभाव बनाए रखने के लिए उन्हें प्रभावशाली नेताओं का समर्थन प्राप्त रहा।

हालांकि, राजनीतिक संरक्षण से जुड़े इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की मौजूदा कार्रवाई मुख्य रूप से दर्ज शिकायत और उससे जुड़े आरोपों की जांच पर केंद्रित है।

अब सभी की नजर पुलिस रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ पर है। जांच में यदि चुनाव बाद हिंसा की घटनाओं, मारपीट और तोड़फोड़ के संबंध में नए तथ्य सामने आते हैं, तो पुलिस आगे की कार्रवाई कर सकती है।

रिमांड में पूछताछ से खुलेंगे कई राज?

श्रीकांत पातर को अदालत में पेश किए जाने के बाद पुलिस की सात दिनों की रिमांड मांग ने मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है। रिमांड के दौरान पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों के अलावा घटनाओं के क्रम, कथित सहयोगियों और अन्य संबंधित पहलुओं की जांच कर सकती है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पुलिस की पूछताछ के बाद मामले में और कितने लोगों के नाम सामने आते हैं या जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि अदालत रिमांड की मांग पर क्या आदेश देती है।

सालानपुर में श्रीकांत पातर की गिरफ्तारी के बाद जहां उनके समर्थकों और राजनीतिक सहयोगियों की प्रतिक्रिया पर नजर है, वहीं स्थानीय लोगों के बीच भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज है। चुनाव बाद हिंसा से जुड़े आरोपों की जांच के साथ-साथ उनकी संपत्ति और कथित कारोबार को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की सच्चाई भी आने वाले समय में जांच का विषय बन सकती है।

फिलहाल पुलिस कार्रवाई का केंद्र दर्ज शिकायत और उससे जुड़े आरोप हैं। श्रीकांत पातर के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में विचाराधीन हैं और दोष सिद्ध होने से पहले उन्हें आरोपित व्यक्ति के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और अदालत की कार्रवाई से इस पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

Advertisement