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पूजा से पहले रोजवैली के जमाकर्ताओं को बड़ी राहत! 500 करोड़ लौटाने की तैयारी, हाई कोर्ट ने 6 महीने का दिया लक्ष्य

Moutushi · 18 September 2026, 9:20 AM

कोलकाता: रोजवैली चिटफंड मामले में लंबे समय से अपनी जमा राशि वापस मिलने का इंतजार कर रहे जमाकर्ताओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। कलकत्ता हाई कोर्ट में गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान एसेट्स डिस्पोजल कमेटी की ओर से बताया गया कि दुर्गापूजा से पहले जमाकर्ताओं को करीब 500 करोड़ रुपये और लौटाने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। हालांकि अदालत ने साफ कर दिया कि केवल 500 करोड़ रुपये की वापसी पर्याप्त नहीं होगी। रोजवैली की जब्त संपत्तियों को जल्द से जल्द बेचकर सभी पात्र जमाकर्ताओं की रकम लौटाने की प्रक्रिया को गति देने पर जोर दिया गया है।

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राजश्री भारद्वाज और न्यायमूर्ति सुदीप्त देव की डिवीजन बेंच के समक्ष एसेट्स डिस्पोजल कमेटी ने रकम लौटाने की प्रक्रिया को लेकर जानकारी दी। अदालत ने कमेटी को केवल एक चरण में 500 करोड़ रुपये लौटाने तक सीमित नहीं रहने और रोजवैली से जुड़ी संपत्तियों के निपटारे में तेजी लाने को कहा। अदालत की ओर से पूरी प्रक्रिया को अगले छह महीने के भीतर पूरा करने का प्रयास करने पर जोर दिया गया है।

पूजा से पहले 500 करोड़ रुपये लौटाने की तैयारी

सुनवाई के दौरान एसेट्स डिस्पोजल कमेटी की ओर से बताया गया कि दुर्गापूजा से पहले जमाकर्ताओं को 500 करोड़ रुपये लौटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। लंबे समय से अपनी जमा राशि के लिए इंतजार कर रहे लोगों के बीच इस खबर से उम्मीद बढ़ी है।

हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि 500 करोड़ रुपये की रकम लौटाना अंतिम लक्ष्य नहीं है। रोजवैली की जब्त और उपलब्ध संपत्तियों को बेचकर उससे प्राप्त रकम का इस्तेमाल पात्र जमाकर्ताओं को भुगतान के लिए किया जाना चाहिए। अदालत ने पूरी प्रक्रिया में तेजी लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इसका अर्थ यह है कि आने वाले समय में केवल एक भुगतान चरण पर निर्भर रहने के बजाय संपत्तियों के मूल्यांकन, बिक्री और उससे मिलने वाली रकम को जमाकर्ताओं तक पहुंचाने की प्रक्रिया को तेज करने की कोशिश की जाएगी।

जब्त संपत्तियों की बिक्री से होगी रकम की व्यवस्था

रोजवैली मामले में जांच के दौरान समूह से जुड़ी विभिन्न चल और अचल संपत्तियों पर कार्रवाई की गई थी। इन संपत्तियों को निपटाने और बिक्री से प्राप्त रकम को जमाकर्ताओं तक पहुंचाने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट की निगरानी में एसेट्स डिस्पोजल कमेटी काम कर रही है।

ईडी की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रोजवैली समूह से जुड़े मामले में हजारों करोड़ रुपये मूल्य की चल-अचल संपत्तियां जांच के दौरान कुर्क की गई हैं। ईडी ने यह भी बताया था कि कमेटी के माध्यम से पहले से ही कई चरणों में जमाकर्ताओं को रकम लौटाई जा चुकी है।

जुलाई 2025 में ईडी ने बताया था कि आठ चरणों में कुल 72,760 पीड़ितों को लगभग 55.45 करोड़ रुपये लौटाए जा चुके थे। इसके बाद अगस्त 2025 की ईडी जानकारी में बताया गया कि दस चरणों तक 94,627 निवेशकों या पीड़ितों को कुल 72.76 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका था।

इससे स्पष्ट है कि रकम वापसी की प्रक्रिया पहले से चल रही है, लेकिन बड़ी संख्या में जमाकर्ताओं के दावे और बड़ी मात्रा में संपत्तियों के निपटारे के कारण पूरी प्रक्रिया अभी लंबी है।

लाखों जमाकर्ताओं के दावे जुड़े हैं

रोजवैली मामला केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहा। समूह से जुड़ी निवेश योजनाओं में पश्चिम बंगाल के अलावा ओडिशा, असम और अन्य राज्यों के लोगों ने भी पैसा लगाया था। ईडी की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक एसेट्स डिस्पोजल कमेटी के समक्ष 31 लाख से अधिक निवेशकों ने अपने दावे प्रस्तुत किए थे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उस समय तक करीब 1.5 लाख पीड़ित निवेशकों को 538 करोड़ रुपये बाजार मूल्य की संपत्तियों की बहाली सफलतापूर्वक कराई जा चुकी थी।

इसलिए हाई कोर्ट का ताजा निर्देश उन हजारों-लाखों लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके दावे अभी भुगतान की प्रक्रिया में हैं।

2015 में हुई थी गौतम कुंडू की गिरफ्तारी

रोजवैली चिटफंड मामले की जांच के दौरान कंपनी के प्रमुख गौतम कुंडू की मार्च 2015 में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने गिरफ्तारी की थी। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और समूह से जुड़ी विभिन्न संपत्तियों तथा वित्तीय लेनदेन की जांच की गई।

ईडी ने बाद में रोजवैली समूह से जुड़े धन संग्रह और संपत्तियों को लेकर कई कार्रवाई की। आधिकारिक जांच के अनुसार, समूह पर जनता से निवेश के नाम पर बड़ी रकम जुटाने और निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का भरोसा देने से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए थे। ईडी की 2025 की एक प्रेस विज्ञप्ति में समूह द्वारा लगभग 17,520 करोड़ रुपये जुटाने और करीब 6,666 करोड़ रुपये की रकम निवेशकों को वापस नहीं किए जाने का उल्लेख किया गया था। ये आंकड़े जांच एजेंसी के निष्कर्षों के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं और संबंधित आपराधिक कार्यवाही अपने कानूनी चरणों के अधीन है।

मामले में शुभ्रा कुंडू समेत अन्य लोगों के खिलाफ भी जांच और कानूनी कार्रवाई हुई है। हालांकि किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप और अदालत में दोषसिद्धि को अलग-अलग कानूनी स्थिति के रूप में देखना जरूरी है।

एसेट्स डिस्पोजल कमेटी की भूमिका अहम

रोजवैली मामले में जमाकर्ताओं को रकम लौटाने के लिए एसेट्स डिस्पोजल कमेटी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश पर गठित यह कमेटी जब्त संपत्तियों की पहचान, बिक्री और उससे प्राप्त रकम के वितरण की प्रक्रिया से जुड़ी है।

अदालत के पुराने आदेशों में भी संपत्तियों को सार्वजनिक नीलामी के जरिए बेचने और बिक्री से प्राप्त रकम को निर्धारित प्रक्रिया के तहत निवेशकों तक पहुंचाने की व्यवस्था पर जोर दिया गया था।

अब ताजा सुनवाई में छह महीने के भीतर पूरी रकम वापसी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर जोर दिए जाने से मामले में तेजी आने की उम्मीद बढ़ी है।

जमाकर्ताओं की नजर अब अगले कदम पर

रोजवैली में पैसा लगाने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनके दावे की जांच कब पूरी होगी और भुगतान कब उनके खाते तक पहुंचेगा। हाई कोर्ट की ताजा सुनवाई के बाद 500 करोड़ रुपये की अगली वापसी प्रक्रिया को लेकर उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन प्रत्येक जमाकर्ता को कब और कितनी रकम मिलेगी, यह उनके दावे की पात्रता, सत्यापन और उपलब्ध परिसंपत्तियों से प्राप्त रकम पर निर्भर करेगा।

फिलहाल अदालत का संदेश स्पष्ट है कि केवल 500 करोड़ रुपये की वापसी के बाद प्रक्रिया को धीमा नहीं किया जाना चाहिए। रोजवैली की संपत्तियों को तेजी से निपटाकर जमाकर्ताओं की रकम लौटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगा। ऐसे में दुर्गापूजा से पहले प्रस्तावित 500 करोड़ रुपये की वापसी और अगले छह महीनों में पूरी प्रक्रिया को गति देने की कोशिश रोजवैली के जमाकर्ताओं के लिए इस लंबे मामले में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है।

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