नई दिल्ली: देश में लगातार बढ़ती जल जरूरतों, वर्षा जल के संरक्षण और भविष्य के जल संकट से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों ने अब साझा रणनीति पर जोर देना शुरू कर दिया है। जल शक्ति मंत्रालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय सम्मेलन में देशभर के जल मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने जल प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। सम्मेलन के समापन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संरक्षण को सरकारी योजनाओं तक सीमित रखने के बजाय इसे देशव्यापी जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने देशभर में ‘जल उत्सव’ आयोजित करने का सुझाव देते हुए कहा कि पानी बचाने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की है। उन्होंने वर्षा की हर बूंद को सहेजने पर जोर देते हुए ‘जहां पानी गिरे, वहीं उसका संचय करें’ के मंत्र को आगे बढ़ाने की बात कही। इसके साथ ही मई २०२७ तक देशभर में २ करोड़ नए जल संरक्षण ढांचे तैयार करने का लक्ष्य सामने रखा गया है।
जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत जैसे विशाल देश में जल सुरक्षा केवल योजनाएं बनाने से सुनिश्चित नहीं हो सकती। इसके लिए सरकार, स्थानीय निकाय, किसान, उद्योग, सामाजिक संगठन और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने के लिए स्थानीय स्तर पर अभियान चलाने और लोगों को सीधे इससे जोड़ने की जरूरत है।
‘जल उत्सव’ का विचार इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके माध्यम से जल स्रोतों की सफाई, वर्षा जल संचयन, पुराने तालाबों और जलाशयों के संरक्षण तथा लोगों के बीच पानी की बचत को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।
मई २०२७ तक २ करोड़ नए जल संरक्षण ढांचे
सम्मेलन में देशभर में जल संरक्षण की क्षमता बढ़ाने को लेकर बड़ा लक्ष्य रखा गया। मई २०२७ तक २ करोड़ नए जल संरक्षण ढांचे तैयार करने की दिशा में काम करने की बात कही गई। इनमें स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तालाब, जल संचयन संरचनाएं, वर्षा जल संग्रहण व्यवस्था और अन्य उपयोगी ढांचे शामिल हो सकते हैं।
इस पहल का उद्देश्य बारिश के दौरान बहकर निकल जाने वाले पानी को स्थानीय स्तर पर रोकना और भूजल स्तर को मजबूत करना है। जल संरक्षण के साथ-साथ ऐसे ढांचे ग्रामीण क्षेत्रों में खेती और पेयजल की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में भी सहायक हो सकते हैं।
चार प्रमुख क्षेत्रों पर बनी रणनीति
दो दिवसीय सम्मेलन में जल क्षेत्र से जुड़े चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। इनमें जल अवसंरचना परियोजनाओं को समय पर पूरा करना, वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देना, पेयजल के प्राकृतिक और कृत्रिम स्रोतों को सुरक्षित रखना तथा जल जीवन मिशन २.० के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार और गुणवत्तापूर्ण नल जल उपलब्ध कराने के लिए संचालन एवं रखरखाव व्यवस्था मजबूत करना शामिल है।
प्रधानमंत्री ने राज्यों से एक-दूसरे के सफल जल संरक्षण मॉडल को अपनाने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उन्हें लागू करने की अपील की। सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने राज्य के जल संरक्षण मॉडल को प्रस्तुत किया।
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि राज्यों के मंत्री, अधिकारी और किसान दूसरे राज्यों के अध्ययन दौरे करें। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में अपनाए गए सफल प्रयोगों को समझने और उन्हें अपने राज्य में लागू करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
पानी के प्रबंधन में एआई की होगी बड़ी भूमिका
बदलते मौसम और तेजी से बढ़ती जल मांग के बीच जल प्रबंधन में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी विशेष जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने जल से जुड़े आंकड़ों को एक समान प्रारूप में एकत्र करने और उनके विश्लेषण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का उपयोग बढ़ाने की बात कही।
यदि अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों के जल संबंधी आंकड़े व्यवस्थित रूप से उपलब्ध होंगे, तो पानी की कमी वाले इलाकों की पहचान पहले की जा सकेगी। इसके आधार पर वर्षा, भूजल, जलाशयों और स्थानीय खपत से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण कर भविष्य की जरूरतों के लिए बेहतर योजना तैयार की जा सकती है।
खेती और उद्योगों में पुनर्चक्रित पानी का इस्तेमाल
सम्मेलन में कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में पुनर्चक्रित पानी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य ताजे पानी पर बढ़ते दबाव को कम करना है। उद्योगों में पानी के पुन: उपयोग की व्यवस्था मजबूत होने से जल संसाधनों पर बोझ कम किया जा सकता है।
इसके अलावा जलाशयों से गाद निकालने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी तैयार करने तथा मानसून से पहले बांधों की सुरक्षा जांचने पर भी जोर दिया गया। इससे जलाशयों की क्षमता बनाए रखने और संभावित जोखिमों को समय रहते पहचानने में मदद मिल सकती है।
स्कूलों से शुरू होगी पानी बचाने की सीख
जल संरक्षण की आदत बचपन से विकसित करने पर भी सम्मेलन में जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि बच्चों को स्कूल स्तर से ही पानी के महत्व और जल संरक्षण की जानकारी दी जाए।
स्कूली शिक्षा में जल संरक्षण से जुड़े व्यवहारिक विषय शामिल होने से नई पीढ़ी पानी की कीमत और उसके सीमित संसाधन होने को बेहतर ढंग से समझ सकेगी। वर्षा जल संचयन, पानी की बर्बादी रोकना और स्थानीय जल स्रोतों की देखभाल जैसे विषयों को जागरूकता अभियान से जोड़ा जा सकता है।
शहरों और स्थानीय निकायों की भी बढ़ेगी जिम्मेदारी
तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए शहरों की भविष्य की जल जरूरतों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। प्रधानमंत्री ने शहरी स्थानीय निकायों को आने वाले वर्षों की पानी की मांग का आकलन करने और उसके अनुसार पहले से तैयारी करने का सुझाव दिया।
स्थानीय निकायों के लिए ‘चिंतन शिविर’ आयोजित करने की बात भी कही गई, ताकि अधिकारी जल आपूर्ति, जल निकासी, वर्षा जल संचयन और पुनर्चक्रित पानी के इस्तेमाल जैसे विषयों पर ठोस रणनीति तैयार कर सकें।
जल-बचत करने वाली आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शनियों और कार्यशालाओं के आयोजन का सुझाव भी दिया गया। इससे भारतीय उद्योगों को कम पानी में बेहतर परिणाम देने वाले उपकरण और तकनीक विकसित करने का अवसर मिल सकता है।
जल सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
सम्मेलन के समापन पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि दो दिनों का यह मंथन भारत को जल-सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सम्मेलन में सामने आए सुझावों का उद्देश्य जल संरक्षण को योजनाओं से आगे बढ़ाकर व्यवहार और जनभागीदारी का हिस्सा बनाना है।
देश में बढ़ती आबादी, शहरीकरण, कृषि की जरूरत और औद्योगिक विकास के बीच पानी की मांग लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में वर्षा जल को सहेजना, पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना, भूजल का संतुलित उपयोग करना और आधुनिक तकनीक के माध्यम से जल प्रबंधन को बेहतर बनाना समय की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री का ‘जल उत्सव’ का संदेश इसी व्यापक सोच को जनभागीदारी से जोड़ने की कोशिश है। यदि केंद्र, राज्य, स्थानीय निकाय और आम नागरिक मिलकर जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हैं, तो आने वाले वर्षों में जल संकट की चुनौती को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अब सबसे बड़ी चुनौती इन लक्ष्यों को जमीन पर तेजी से लागू करने और हर क्षेत्र को जल संरक्षण की इस मुहिम से जोड़ने की होगी।





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