“परिवर्तन की हुंकार!” बुम्बा मुखर्जी ने बंगाल में झोंकी पूरी ताकत

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कोलकाता/पश्चिम बर्धमान: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच चुकी हैं। इसी बीच नेशनल फ्रंट ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (एनएफआईटीयू) के राज्य सचिव बुम्बा मुखर्जी चुनावी मैदान में पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे हैं।

जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ बनाने के लिए बुम्बा मुखर्जी लगातार विभिन्न इलाकों का दौरा कर रहे हैं, कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में माहौल तैयार कर रहे हैं।

“हर सीट पर जीत” का लक्ष्य लेकर मैदान में

बुम्बा मुखर्जी ने स्पष्ट कहा कि वे केंद्रीय ट्रेड यूनियन एनएफआईटीयू के नेतृत्व में भाजपा के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बर्धमान जिले की 9 विधानसभा सीटों पर उन्होंने पूरी ताकत के साथ काम किया है।

🗳️ इन सीटों पर चला ज़ोरदार प्रचार अभियान

बुम्बा मुखर्जी जिन प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों में सक्रिय रहे, उनमें शामिल हैं—

👉 पांडवेश्वर – जितेंद्र तिवारी
👉 दुर्गापुर पूर्व – चंद्रशेखर बनर्जी
👉 दुर्गापुर पश्चिम – लखन घोरुई
👉 रानीगंज – परहा घोष
👉 आसनसोल उत्तर – कृष्णेंदु मुखर्जी
👉 आसनसोल दक्षिण – अग्निमित्रा पाल
👉 जामुड़िया – डॉ. बिजोन मुखर्जी

इसके अलावा, कोलकाता की भवानीपुर विधानसभा सीट पर भी उन्होंने सुवेंदु अधिकारी के समर्थन में प्रचार किया।

🏭 मजदूरों को जोड़ने पर खास फोकस

बुम्बा मुखर्जी ने बताया कि उन्होंने कोलियरी खदानों के श्रमिकों, कारखानों के मजदूरों और जूट मिल के कामगारों को एकजुट कर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की है।
उनका मानना है कि मजदूर वर्ग का समर्थन चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

📢 वर्कर्स कॉन्फ्रेंस से बनाया माहौल

हर विधानसभा क्षेत्र में एनएफआईटीयू की ओर से वर्कर्स कॉन्फ्रेंस आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में श्रमिकों ने हिस्सा लिया।
इन सम्मेलनों के जरिए मजदूरों को संगठित कर भाजपा के समर्थन में मजबूत आधार तैयार करने का प्रयास किया गया।

🔥 नारे से गूंजा चुनावी मैदान

बुम्बा मुखर्जी ने जोरदार नारा देते हुए कहा—
👉 “पलटनोर दरकार, चाहिए बीजेपी सरकार!”

यह नारा अब कई इलाकों में चर्चा का विषय बन चुका है और चुनावी माहौल को और गर्मा रहा है।

🚨 परिवर्तन की लड़ाई या सियासी रणनीति?

बुम्बा मुखर्जी का कहना है कि बंगाल में बदलाव लाने और भाजपा की सरकार बनाने के लिए उन्होंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव सिर्फ पार्टियों के बीच मुकाबला नहीं, बल्कि विचारधाराओं की सीधी टक्कर भी है।

👉 कुल मिलाकर, एनएफआईटीयू के जरिए बुम्बा मुखर्जी का यह आक्रामक प्रचार अभियान पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।
अब देखना यह है कि मजदूर वर्ग का यह समर्थन चुनावी नतीजों में कितना असर डालता है।

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