दक्षिण 24 परगना के फलता विधानसभा उपचुनाव में मतदान से ठीक 48 घंटे पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। जाहांगीर खान ने अचानक चुनावी मैदान से हटने का ऐलान कर दिया, जिससे पूरे इलाके की सियासत गरमा गई है।
⚡ अचानक फैसले से मचा सियासी हलचल
मंगलवार को प्रचार के अंतिम दिन आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाहांगीर खान ने कहा—
👉 “मैं इस चुनाव में अब हिस्सा नहीं ले रहा हूं।”
हालांकि—
👉 नामांकन वापसी की तारीख निकल चुकी है
👉 इसलिए ईवीएम में उनका नाम बना रहेगा
तृणमूल कांग्रेस ने भी साफ किया कि यह फैसला पूरी तरह से जाहांगीर खान का व्यक्तिगत निर्णय है।
🎯 ‘स्पेशल पैकेज’ बना बड़ा कारण
जाहांगीर खान ने अपने फैसले के पीछे बड़ा कारण बताते हुए कहा—
👉 शुभेंदु अधिकारी द्वारा फलता के विकास के लिए घोषित स्पेशल पैकेज
उन्होंने कहा—
👉 “मैं फलता का भूमिपुत्र हूं और यहां के विकास के लिए यह फैसला ले रहा हूं।”
👉 “मेरा सपना ‘सोने का फलता’ बनाना था।”
भावुक होते हुए उन्होंने लोगों के हित को प्राथमिकता देने की बात कही।
🗳️ पहले से विवादों में था चुनाव
फलता विधानसभा क्षेत्र में—
👉 29 अप्रैल को मतदान के दौरान कई बूथों पर गड़बड़ी के आरोप लगे
👉 ईवीएम से छेड़छाड़, इत्र, स्याही और टेप लगाने जैसी शिकायतें सामने आईं
इन आरोपों के बाद—
👉 चुनाव आयोग ने पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया
👉 21 मई को दोबारा मतदान होना तय हुआ
🏛️ भाजपा का आक्रामक प्रचार
इस बीच भारतीय जनता पार्टी की ओर से—
👉 शुभेंदु अधिकारी
👉 शमिक भट्टाचार्य
ने जोरदार चुनाव प्रचार किया और विशेष पैकेज की घोषणा के साथ वोटरों को लुभाने की कोशिश की।
⚖️ कानूनी मोर्चे पर भी सक्रियता
बताया जा रहा है कि—
👉 जाहांगीर खान ने हाल ही में गिरफ्तारी से बचने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत भी ली थी
🗣️ खुद को बताया बेदाग
आरोपों पर सफाई देते हुए जाहांगीर खान ने कहा—
👉 उन्होंने चुनाव आयोग के नियमों के तहत ही चुनाव लड़ा
👉 किसी भी तरह की गड़बड़ी में उनकी कोई भूमिका नहीं है
उन्होंने कहा—
👉 “मैंने कभी फलता के लोगों के साथ गलत व्यवहार नहीं किया।”
🔍 क्यों बड़ा है यह फैसला?
👉 मतदान से ठीक पहले उम्मीदवार का हटना बेहद असामान्य है
👉 इससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं
👉 मतदाताओं पर इसका सीधा असर पड़ सकता है
⚠️ निष्कर्ष
फलता उपचुनाव में जाहांगीर खान का अचानक चुनाव से हटना—
👉 पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ साबित हो सकता है।
अब सबकी नजर 21 मई के मतदान और उसके नतीजों पर टिकी हुई है, जो इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगे।















