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आसनसोल-दुर्गापुर

290 करोड़ के बैंक घोटाले में ईडी का बड़ा एक्शन, कोहिनूर पावर के खिलाफ बंगाल में 7 ठिकानों पर छापेमारी

Moutushi · 30 October 2026, 3:16 PM

दुर्गापुर, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़: पश्चिम बंगाल में करीब 290 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मामले की जांच के सिलसिले में शुक्रवार तड़के से कोलकाता समेत राज्य के सात ठिकानों पर छापेमारी की गई। इस कार्रवाई के दौरान दुर्गापुर के विधाननगर स्थित उद्योगपति सोनू अग्रवाल के आवास पर भी ईडी की टीम पहुंची। अधिकारियों ने घर के अंदर तलाशी अभियान चलाया और कंपनी से जुड़े वित्तीय लेनदेन तथा दस्तावेजों की जांच की।

बताया जा रहा है कि झारखंड में 66 मेगावाट क्षमता का बिजली संयंत्र स्थापित करने के नाम पर विभिन्न बैंकों से भारी भरकम कर्ज लिया गया था। आरोप है कि परियोजना के लिए प्राप्त इस रकम का निर्धारित उद्देश्य के अनुसार इस्तेमाल नहीं किया गया। इसके बजाय कथित तौर पर कर्ज की राशि दूसरी समूह कंपनियों में स्थानांतरित की गई और कुछ रकम निजी कार्यों में भी खर्च की गई। इसी कथित वित्तीय गड़बड़ी की जांच के तहत ईडी ने एक साथ कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया।

शुक्रवार तड़के दुर्गापुर में उद्योगपति के घर पहुंची ईडी

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह से ही ईडी की अलग-अलग टीमें पश्चिम बंगाल के विभिन्न ठिकानों पर सक्रिय हो गई थीं। दुर्गापुर के विधाननगर स्थित उद्योगपति सोनू अग्रवाल के आवास पर भी अधिकारियों ने तलाशी शुरू की। जांच टीम ने घर के भीतर उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य संभावित साक्ष्यों की पड़ताल की।

कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों के साथ राज्य पुलिस का भी सहयोग लिया गया। जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई, ताकि अधिकारी बिना किसी बाधा के तलाशी की प्रक्रिया पूरी कर सकें।

ईडी की इस कार्रवाई से दुर्गापुर के कारोबारी और स्थानीय क्षेत्र में चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, छापेमारी के दौरान सोनू अग्रवाल के आवास से कौन-कौन से दस्तावेज या अन्य सामग्री मिली, इसकी विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

कोहिनूर पावर के 66 मेगावाट बिजली संयंत्र से जुड़ा मामला

जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले का संबंध कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड की झारखंड में प्रस्तावित बिजली परियोजना से है। कंपनी ने झारखंड में 66 मेगावाट क्षमता का बिजली संयंत्र स्थापित करने के उद्देश्य से विभिन्न बैंकों से कर्ज लिया था। बताया जा रहा है कि बैंक कंसोर्टियम से प्राप्त कर्ज की कुल राशि करीब 290 करोड़ रुपये थी।

आरोप है कि बिजली संयंत्र के निर्माण और परियोजना से संबंधित निर्धारित कार्यों के लिए ली गई इस रकम का उपयोग उसी उद्देश्य से नहीं किया गया। जांच एजेंसी को संदेह है कि कर्ज की राशि का एक हिस्सा कंपनी से जुड़ी दूसरी समूह कंपनियों के खातों में स्थानांतरित किया गया।

इस तरह के वित्तीय लेनदेन की जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होता है कि कर्ज की रकम किस खाते में गई, किन कंपनियों के माध्यम से उसका हस्तांतरण हुआ और अंततः उसका इस्तेमाल कहां किया गया। ईडी इसी पूरी वित्तीय प्रक्रिया की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

दूसरी कंपनियों में रकम ट्रांसफर करने का आरोप

इस मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि बिजली परियोजना के लिए बैंक से प्राप्त करोड़ों रुपये को कथित तौर पर दूसरी समूह कंपनियों में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके अलावा, कर्ज की कुछ राशि का इस्तेमाल निजी कार्यों में किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह बैंक से प्राप्त ऋण के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं का महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है। इसी कारण जांच एजेंसी बैंक खातों, कंपनियों के बीच हुए लेनदेन और वित्तीय दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि कुल 290 करोड़ रुपये में से कितनी रकम दूसरी कंपनियों में स्थानांतरित हुई और कितनी राशि के निजी इस्तेमाल का संदेह है। इन सवालों के जवाब जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड से मिल सकते हैं।

सात ठिकानों पर एक साथ तलाशी से बढ़ी हलचल

ईडी ने इस मामले में केवल दुर्गापुर तक अपनी कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि कोलकाता समेत पश्चिम बंगाल के कुल सात ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। कंपनी से जुड़े संदिग्ध लोगों के विभिन्न आवासीय और अन्य परिसरों की भी जांच की गई।

एक साथ कई स्थानों पर तलाशी का उद्देश्य मामले से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों, संभावित लेनदेन और अन्य साक्ष्यों को एकत्र करना बताया जा रहा है। इस दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ राज्य पुलिस का सहयोग भी लिया गया।

हालांकि, किन-किन स्थानों पर तलाशी हुई और वहां से क्या-क्या बरामद किया गया, इसका पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। जांच एजेंसी की ओर से भी बरामदगी को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

अब ईडी की जांच में क्या होगा खुलासा?

करीब 290 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में हुई इस कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर ईडी की आगे की जांच पर है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बिजली परियोजना के नाम पर लिया गया कर्ज किस तरह इस्तेमाल हुआ और कथित तौर पर दूसरी कंपनियों में रकम स्थानांतरित करने के पीछे क्या उद्देश्य था।

आने वाले समय में बैंकिंग रिकॉर्ड, कंपनी के वित्तीय दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों की जांच से मामले के कई पहलू स्पष्ट हो सकते हैं।

फिलहाल, कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कथित 290 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में ईडी ने पश्चिम बंगाल के सात ठिकानों पर छापेमारी की है। जांच के दौरान किसी व्यक्ति या कंपनी की जिम्मेदारी तय होना बाकी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।

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