पश्चिम बंगाल की राजनीति से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। भवानीपुर विधानसभा सीट, जिसे लंबे समय से ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ माना जाता था, वहां इस बार चुनावी नतीजों ने पूरी सियासी तस्वीर बदल दी।
भारत निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, कुल 267 बूथों में से 207 बूथों पर भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी को बढ़त मिली, जबकि ममता बनर्जी सिर्फ 60 बूथों पर ही आगे रह सकीं।
⚡ कई बूथों पर बेहद खराब प्रदर्शन
चौंकाने वाली बात यह रही कि—
👉 कई बूथों पर ममता बनर्जी 100 वोट भी नहीं जुटा सकीं
👉 कुछ जगहों पर तो उन्हें 50 से भी कम वोट मिले
उदाहरण के तौर पर—
- बूथ 227: सिर्फ 12 वोट
- बूथ 14: 43 वोट
- बूथ 16: 42 वोट
- बूथ 20: 41 वोट
- बूथ 24: 45 वोट
- बूथ 176: 29 वोट
- बूथ 249: 28 वोट
कुल मिलाकर—
👉 28 बूथ ऐसे रहे जहां ममता को 50 या उससे कम वोट मिले
🏆 शुभेंदु अधिकारी की निर्णायक जीत
इस चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने 15,105 वोटों से जीत दर्ज की।
👉 शुभेंदु अधिकारी को कुल 73,917 वोट मिले
👉 ममता बनर्जी को 58,812 वोट प्राप्त हुए
हालांकि—
👉 भाजपा उम्मीदवार को भी 39 बूथों पर 50 या उससे कम वोट मिले
📊 कुछ बूथों पर ममता की मजबूत वापसी
हालांकि पूरी तस्वीर एकतरफा नहीं रही।
👉 बूथ 12 पर ममता को 570 वोट मिले
👉 वहीं शुभेंदु अधिकारी को सिर्फ 60 वोट
यह दिखाता है कि कुछ इलाकों में अब भी उनकी पकड़ मजबूत बनी हुई है।
🔄 2021 से 2026—पूरी तरह बदली तस्वीर
अगर 2021 के उपचुनाव की बात करें—
👉 ममता बनर्जी ने भाजपा की प्रियंका टिबरेवाल को 58,000+ वोटों से हराया था
👉 तब उन्हें 85,000 से ज्यादा वोट मिले थे
👉 भवानीपुर के सभी 7 वार्डों में तृणमूल कांग्रेस आगे थी
लेकिन इस बार—
👉 वही सीट उनके हाथ से निकल गई
🔍 क्या है इस हार का मतलब?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक—
👉 यह सिर्फ एक सीट की हार नहीं, बल्कि बड़ा संकेत है
👉 शहरी क्षेत्रों में तृणमूल की पकड़ कमजोर हो सकती है
👉 भाजपा का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है
⚠️ निष्कर्ष
भवानीपुर के नतीजे ने साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति अब नए मोड़ पर पहुंच चुकी है।
👉 ममता बनर्जी के गढ़ में मिली यह हार आने वाले चुनावों के लिए बड़ा संकेत है
👉 वहीं शुभेंदु अधिकारी की यह जीत भाजपा के लिए मनोबल बढ़ाने वाली साबित होगी
अब सबकी नजर आने वाले चुनावों और नई राजनीतिक रणनीतियों पर टिकी है।















