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बंगाल

बांकुड़ा में माओवादियों को बड़ा झटका! 3 शीर्ष नेताओं ने एक साथ डाले हथियार, AK-47 और INSAS भी किए सरेंडर

Moutushi · 24 September 2026, 2:48 PM

बांकुड़ा: पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में माओवादी गतिविधियों से जुड़ा एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। करीब दो दशक तक माओवादी संगठन से जुड़े रहे तीन वरिष्ठ नेताओं ने पुलिस के सामने हथियार डालते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। तीनों ने पुलिस के समक्ष यह इच्छा जताई कि अब वे सशस्त्र संघर्ष और जंगल की जिंदगी छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं।

बुधवार को बांकुड़ा पुलिस लाइन स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में हुए इस आत्मसमर्पण के दौरान जाबा महतो, नयनतारा साहू और रामप्रसाद मंडी उर्फ शचीन बांग्ला ने पश्चिमांचल के एडीजी आनंद कुमार के सामने अपने हथियार जमा किए। इस दौरान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। उपलब्ध पुलिस जानकारी के अनुसार, तीनों लंबे समय से माओवादी संगठन की गतिविधियों से जुड़े हुए थे और पश्चिम बंगाल के जंगलमहल क्षेत्र के साथ पड़ोसी झारखंड के इलाकों में भी सक्रिय रहे थे।

कौन हैं आत्मसमर्पण करने वाले तीन माओवादी नेता?

पुलिस के अनुसार, जाबा महतो और नयनतारा साहू माओवादी संगठन की जोनल कमेटी से जुड़ी थीं। वहीं रामप्रसाद मंडी उर्फ शचीन बांग्ला का संबंध बंगाल-झारखंड-ओडिशा रीजनल कमेटी से बताया गया है। विभिन्न रिपोर्टों में तीनों के अलग-अलग उपनाम भी सामने आए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, तीनों का नेटवर्क बांकुड़ा के अलावा पुरुलिया, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर तथा झारखंड के पूर्वी सिंहभूम क्षेत्र तक फैला हुआ था।

पुलिस के मुताबिक तीनों वर्ष 2006-07 के आसपास माओवादी गतिविधियों से जुड़े थे। इस तरह उन्होंने लगभग दो दशकों तक संगठन के साथ काम किया। इस लंबे जुड़ाव के दौरान उनके खिलाफ पश्चिम बंगाल और झारखंड में कई आपराधिक मामले दर्ज हुए। एडीजी आनंद कुमार के अनुसार, तीनों के खिलाफ कुल मिलाकर 80 से अधिक मामले दर्ज हैं। अन्य पुलिस सूत्रों ने भी 75 से अधिक मामलों की जानकारी दी है। इनमें हत्या समेत हथियार कानून, विस्फोटक कानून और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम से जुड़े मामले शामिल बताए गए हैं।

पुलिस को सौंपे AK-47, दो INSAS और 154 कारतूस

आत्मसमर्पण के दौरान तीनों ने सिर्फ संगठन छोड़ने की घोषणा ही नहीं की, बल्कि अपने पास मौजूद हथियार और गोला-बारूद भी पुलिस को सौंप दिया। पुलिस के अनुसार, उनके कब्जे से एक AK-47 राइफल, दो INSAS राइफल, 10 मैगजीन और 154 राउंड कारतूस जमा किए गए।

पुलिस का कहना है कि इनमें से कुछ हथियार पूर्व में सुरक्षा बलों से लूटे गए थे। हथियारों की बरामदगी को इस आत्मसमर्पण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि इससे लंबे समय से सक्रिय भूमिगत संगठनात्मक नेटवर्क और उसके हथियारों से जुड़े मामलों की जांच में भी मदद मिल सकती है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि आत्मसमर्पण के बावजूद पहले से दर्ज आपराधिक मामलों की कानूनी प्रक्रिया अपने नियमों के अनुसार जारी रहेगी।

जंगल की जिंदगी छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की इच्छा

आत्मसमर्पण करने वाले नेताओं ने कहा कि लंबे समय तक जंगलों में रहकर हथियारबंद जीवन जीने के बाद अब वे सामान्य सामाजिक जीवन में वापस लौटना चाहते हैं। उनके अनुसार, जिस समय उन्होंने माओवादी आंदोलन का रास्ता चुना था, उस समय क्षेत्र में समस्याओं, पिछड़ेपन और कथित वंचना को लेकर उनके मन में अलग विचार थे।

रामप्रसाद मंडी ने पुलिस के सामने कथित तौर पर कहा कि शुरुआती दौर में उन्हें लगता था कि क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने के लिए सशस्त्र संघर्ष ही रास्ता है। लेकिन समय के साथ परिस्थितियों में बदलाव और ग्रामीण इलाकों में विकास कार्यों को देखते हुए उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़ने का निर्णय लिया। पुलिस के अनुसार, तीनों ने अब समाज की मुख्यधारा में लौटकर सामान्य जीवन शुरू करने की इच्छा जताई है।

आत्मसमर्पण के बाद भी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी

पश्चिमांचल के एडीजी आनंद कुमार ने बताया कि तीनों माओवादियों के मामलों को राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद नियमों के अनुसार पुनर्वास संबंधी लाभों पर निर्णय लिया जाएगा।

हालांकि, आत्मसमर्पण का अर्थ यह नहीं है कि पुराने आपराधिक मामलों की जांच या कानूनी प्रक्रिया स्वतः समाप्त हो जाएगी। पुलिस के मुताबिक, तीनों से उनके पुराने मामलों और माओवादी संगठन से जुड़े नेटवर्क के बारे में चरणबद्ध तरीके से पूछताछ भी की जा सकती है। अधिकारियों ने कहा है कि आपराधिक मामलों में कानून के तहत आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी।

जंगलमहल में बदले हालात के बीच महत्वपूर्ण घटनाक्रम

बांकुड़ा, पुरुलिया, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर सहित जंगलमहल क्षेत्र लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों से प्रभावित रहा है। ऐसे में दो महिला नेताओं समेत तीन वरिष्ठ माओवादी पदाधिकारियों का एक साथ हथियार छोड़ना सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

पुलिस के अनुसार, तीनों के आत्मसमर्पण की प्रक्रिया में बांकुड़ा पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका रही। आत्मसमर्पण के बाद अब पुलिस के सामने एक तरफ पुराने मामलों की कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आगे की प्रक्रिया पूरी करने का काम होगा।

करीब दो दशक तक भूमिगत जीवन जीने के बाद तीन लोगों का हथियार छोड़कर सामान्य सामाजिक जीवन में लौटने का निर्णय जंगलमहल क्षेत्र में चल रहे सुरक्षा और पुनर्वास प्रयासों के बीच एक उल्लेखनीय घटनाक्रम के रूप में सामने आया है।

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