आसनसोल: आसनसोल नगर निगम के वार्ड नंबर 26 में संचालित एकीकृत बाल विकास सेवा यानी आईसीडीएस के कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्र संख्या 157, 155 और 107 में बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार, सरकारी खाद्य सामग्री और केंद्रों के संचालन को लेकर कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। मामले को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है और अब संबंधित विभाग से जांच तथा जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आंगनबाड़ी केंद्रों का उद्देश्य केवल छोटे बच्चों को भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उनके पोषण, स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और समग्र विकास में सहायता करना है। पश्चिम बंगाल के आईसीडीएस कार्यक्रम के तहत छह वर्ष तक के बच्चों सहित अन्य पात्र लाभार्थियों को विभिन्न सेवाएं दी जाती हैं। केंद्र सरकार के पोषण कार्यक्रम में भी पूरक पोषण को आंगनबाड़ी सेवाओं का प्रमुख हिस्सा बताया गया है।
नाली और कचरे के पास खाना बनाने का आरोप
वार्ड 26 के केंद्र संख्या 155 की स्थिति को लेकर सबसे गंभीर सवाल सामने आया। आरोप है कि बच्चों के लिए भोजन तैयार करने का काम नाली के किनारे और कचरे के पास चूल्हे पर किया जा रहा था। भोजन तैयार करने की जगह को लेकर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई और इसे बच्चों के स्वास्थ्य की दृष्टि से गंभीर विषय बताया।
आंगनबाड़ी केंद्रों में दिए जाने वाले गर्म पके भोजन के संबंध में केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों में स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था वाले उचित रसोई क्षेत्र में भोजन तैयार करने पर जोर दिया गया है। दिशा-निर्देशों में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तथा समय-समय पर जांच की व्यवस्था का भी उल्लेख है।
ऐसे में यदि किसी केंद्र पर वास्तव में नाली और कचरे के बिल्कुल पास भोजन तैयार किया जा रहा है, तो इसकी जांच जरूरी हो जाती है कि भोजन बनाने की जगह निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं।
केंद्र संख्या 157 में भी उठे सवाल
इसके बाद केंद्र संख्या 157 की व्यवस्था को लेकर भी सवाल सामने आए। भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों के केंद्र पर पहुंचने के बाद वहां की व्यवस्थाओं को लेकर जानकारी ली गई। इस दौरान केंद्र की संचालिका रेखा चक्रवर्ती से भी जवाब मांगा गया।
बताया गया कि उस दौरान भोजन तैयार करने वाली महिला से भी बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था के बारे में पूछा गया। महिला के अनुसार, उस दिन बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था नहीं की गई थी। इस दावे ने केंद्र में बच्चों को मिलने वाले भोजन और रोजाना की व्यवस्था को लेकर सवाल और बढ़ा दिए।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक जांच अभी सामने नहीं आई है। इसलिए भोजन नहीं दिए जाने या व्यवस्था में अनियमितता के आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
केंद्र संख्या 107 में नहीं मिले संचालिका और बच्चे
वार्ड 26 के केंद्र संख्या 107 को लेकर भी ऐसी ही स्थिति सामने आने का दावा किया गया। जानकारी के अनुसार, निरीक्षण के दौरान केंद्र पर न तो संचालिका मौजूद थीं और न ही बच्चे दिखाई दिए। हालांकि, वहां भोजन तैयार किया जा रहा था।
सबसे ज्यादा चर्चा उस समय हुई जब मौके पर 30 बच्चों के नाम पर केवल 10 उबले हुए अंडे मिलने की बात सामने आई। स्थानीय लोगों ने इसी को लेकर सवाल उठाया कि यदि केंद्र में 30 बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था होनी थी, तो उपलब्ध खाद्य सामग्री की मात्रा कितनी होनी चाहिए और उस दिन कितने बच्चों को वास्तविक रूप से भोजन दिया गया।
यह पूरा मामला अब रिकॉर्ड, उपस्थिति और खाद्य सामग्री के वितरण की जांच से स्पष्ट हो सकता है। यदि केंद्र के अभिलेखों में दर्ज बच्चों की संख्या और मौके पर उपलब्ध भोजन में अंतर है, तो विभागीय जांच के जरिए वास्तविक स्थिति सामने लाई जा सकती है।
सरकारी राशन बाहर बेचने का भी आरोप
स्थानीय लोगों ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए आने वाली खाद्य सामग्री को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि बच्चों के लिए भेजा जाने वाला राशन नियमित रूप से बच्चों तक नहीं पहुंच रहा है और कथित तौर पर केंद्रों की संचालिकाओं द्वारा उसे बाहर बेच दिया जाता है।
यह आरोप फिलहाल स्थानीय लोगों के दावे के रूप में सामने आया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस मामले में दस्तावेजों, स्टॉक रजिस्टर, वितरण रिकॉर्ड, लाभार्थियों की उपस्थिति और संबंधित अधिकारियों की निगरानी रिपोर्ट की जांच महत्वपूर्ण होगी।
केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों में आंगनबाड़ी केंद्रों पर खाद्यान्न की आपूर्ति और उपयोग से जुड़े रिकॉर्ड तथा रजिस्टर बनाए रखने और निगरानी की व्यवस्था का उल्लेख है। साथ ही गुणवत्ता और पोषण मानकों को सुनिश्चित करने के लिए जांच की बात भी कही गई है।
बच्चों के पोषण से जुड़ा है पूरा मामला
आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों के पोषण और प्रारंभिक विकास की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। पश्चिम बंगाल के आईसीडीएस विभाग के अनुसार, योजना का उद्देश्य बच्चों के साथ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं तक विभिन्न सेवाएं पहुंचाना है। इनमें पूरक पोषण, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा तथा संदर्भ सेवाएं शामिल हैं।
इसलिए वार्ड 26 के केंद्रों को लेकर सामने आए आरोप सिर्फ भोजन की मात्रा या केंद्र में उपस्थिति तक सीमित नहीं हैं। मामला सीधे उन बच्चों से जुड़ा है, जिनके लिए सरकारी पोषण व्यवस्था बनाई गई है।
बीजेपी ने भी उठाए सवाल
केंद्र संख्या 157 में भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों के पहुंचने और व्यवस्थाओं का जायजा लेने के बाद पार्टी की जिला सचिव बेबी राय ने भी मामले को लेकर सवाल उठाए। स्थानीय लोगों की शिकायतों और केंद्रों में कथित अव्यवस्था को लेकर उन्होंने प्रशासन से स्थिति की जांच की मांग की।
वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों के नाम पर मिलने वाली सरकारी सुविधाओं का वास्तविक लाभ बच्चों तक पहुंचना चाहिए। यदि कहीं खाद्य सामग्री की कमी है, भोजन नियमित रूप से नहीं बनता या लाभार्थियों की उपस्थिति और वितरण रिकॉर्ड में अंतर है, तो इसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
अब प्रशासन की जांच पर टिकी नजर
वार्ड 26 के इन आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर सामने आए आरोपों के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल प्रशासनिक जांच का है। संबंधित विभाग यदि केंद्र संख्या 155, 157 और 107 के रिकॉर्ड की जांच करता है, तो खाद्य सामग्री की आपूर्ति, स्टॉक, बच्चों की उपस्थिति, भोजन वितरण और केंद्र संचालन की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
फिलहाल इन केंद्रों को लेकर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच और संबंधित संचालिकाओं का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है। इसलिए आरोपों को अंतिम सत्य मानने के बजाय जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी है।
लेकिन इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—बच्चों के पोषण के लिए भेजी जाने वाली सरकारी सुविधाएं अगर किसी स्तर पर सही तरीके से नहीं पहुंच रही हैं, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी? अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। उम्मीद यही है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और यदि किसी तरह की अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, ताकि बच्चों के पोषण और उनके अधिकारों से किसी भी स्तर पर समझौता न हो।




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