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आसनसोल नगर निगम में तृणमूल को बड़ा झटका, 4 पार्षदों का इस्तीफा, नेतृत्व और I-PAC पर गंभीर आरोप

Moutushi · 3 July 2026, 3:12 PM

आसनसोल | विशेष संवाददाता

आसनसोल नगर निगम की राजनीति में शुक्रवार को उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया, जब तृणमूल कांग्रेस के दो बोरो चेयरमैन समेत कुल चार पार्षदों—अशोक रूद्र, डॉ. देवाशीष सरकार, चेतन्य मांझी और शबानी बिस्वास—ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सभी पार्षदों ने अपना इस्तीफा नगर निगम के कमिश्नर कार्यालय में जमा कराया, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई।

‘काम नहीं कर पा रहे थे सही तरीके से’

इस्तीफा देने वाले पार्षदों का कहना है कि वे वर्तमान परिस्थितियों में सही तरीके से काम नहीं कर पा रहे थे। उनका दावा है कि राज्य की बदली राजनीतिक स्थिति, खासकर विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिले बहुमत के बाद, उन्होंने स्वयं ही पद छोड़ने का निर्णय लिया ताकि जनता की सेवा बेहतर तरीके से की जा सके।

तृणमूल नेतृत्व पर गंभीर आरोप

चारों पार्षदों ने तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर भी सीधा निशाना साधा। उनका आरोप है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं पर लगातार हमले हो रहे हैं, लेकिन शीर्ष नेतृत्व इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दे रहा। इस चुप्पी से नाराज़ होकर उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया।

I-PAC पर ‘कठपुतली’ बनने का आरोप

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला आरोप I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) को लेकर सामने आया है। पार्षदों ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस अब पूरी तरह I-PAC के इशारों पर चल रही है और पार्टी के सभी बड़े फैसले वहीं से तय किए जा रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक ढांचे के खिलाफ बताते हुए अपने इस्तीफे का प्रमुख कारण बताया।

अशोक रूद्र का बड़ा बयान

पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी के करीबी माने जाने वाले पार्षद अशोक रूद्र ने कहा कि, “जब पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे हैं, तब शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी बेहद निराशाजनक है। हम जनता की सेवा के लिए आए थे, लेकिन मौजूदा हालात में वह संभव नहीं हो पा रहा था। इसलिए हमने इस्तीफा देने का निर्णय लिया।”

डॉ. देवाशीष सरकार ने भी जताई नाराज़गी

वहीं, डॉ. देवाशीष सरकार ने कहा कि भाजपा को मिले बहुमत के बाद राजनीतिक समीकरण बदल चुके हैं। उन्होंने कहा कि वे अपनी जिम्मेदारियों का सही निर्वहन नहीं कर पा रहे थे, इसलिए जनता के हित में पद छोड़ना ही बेहतर समझा।

सियासी हलकों में तेज हुई चर्चाएं

इस सामूहिक इस्तीफे के बाद आसनसोल की राजनीति में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ इस्तीफा नहीं, बल्कि तृणमूल के अंदर बढ़ती असंतोष की एक बड़ी झलक है। आने वाले दिनों में इससे और भी बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

क्या और भी होंगे इस्तीफे?

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के अंदर असंतोष की यह आग और भी फैल सकती है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में कुछ और पार्षद भी इसी राह पर चल सकते हैं, जिससे तृणमूल कांग्रेस को और बड़ा झटका लग सकता है।

👉 आसनसोल में यह इस्तीफा सिर्फ एक स्थानीय घटना नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत भी माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और भी तूल पकड़ सकता है।

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