पश्चिम बंगाल के आसनसोल नगर निगम में एक तस्वीर को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। ममता बनर्जी की तस्वीर हटाने और उसे क्षतिग्रस्त करने के आरोपों ने राज्य की राजनीति को फिर गरमा दिया है।
इस पूरे मामले में विधान उपाध्याय के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पार्षदों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल पश्चिम बर्दवान के जिला शासक एस. पन्ना बलम से मिलने उनके कार्यालय पहुंचा। इसके बाद यह प्रतिनिधिमंडल आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय भी गया, जहां कड़ी कार्रवाई की मांग की गई।
⚡ क्या है पूरा मामला?
आरोप है कि भाजपा युवा मोर्चा के कुछ कार्यकर्ताओं ने नगर निगम परिसर में लगी ममता बनर्जी की तस्वीर को हटाकर वहां शुभेंदु अधिकारी, नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति की तस्वीर लगा दी।
👉 इतना ही नहीं, ममता बनर्जी की तस्वीर के साथ कथित तौर पर तोड़फोड़ भी की गई
👉 घटना के बाद पूरे निगम परिसर में तनाव का माहौल बन गया
🗣️ मेयर का बड़ा बयान
मेयर विधान उपाध्याय ने कहा—
👉 “यह सिर्फ तस्वीर हटाने का मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला है।”
👉 “नगर निगम में अराजकता फैलाने की कोशिश की गई है।”
उन्होंने यह भी बताया कि इस घटना को लेकर पहले ही थाने में शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है।
🚨 TMC की मांग
तृणमूल कांग्रेस ने साफ तौर पर कहा है कि—
👉 दोषियों के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई हो
👉 राजनीतिक उद्देश्यों से सरकारी संस्थानों का दुरुपयोग न किया जाए
🔍 बढ़ता सियासी तनाव
इस घटना के बाद आसनसोल की राजनीति और ज्यादा गरमा गई है।
👉 एक तरफ TMC इसे सुनियोजित साजिश बता रही है
👉 वहीं भाजपा की ओर से अभी तक इस मामले पर स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि—
👉 यह विवाद आने वाले चुनावों से पहले माहौल को और अधिक ध्रुवीकृत कर सकता है
👉 स्थानीय स्तर पर इसका असर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है
⚠️ निष्कर्ष
आसनसोल नगर निगम में तस्वीर को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि राजनीतिक टकराव का बड़ा प्रतीक बन चुका है।
👉 ममता बनर्जी की तस्वीर हटाने का मुद्दा तूल पकड़ चुका है
👉 और आने वाले दिनों में यह मामला और भी गरमाने की संभावना है
अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है—क्या दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई या यह विवाद और बढ़ेगा?















