दो महीने के मासूम को खरीदने का आरोप
आसनसोल में महज दो महीने से अधिक उम्र के एक शिशु को कथित तौर पर एक लाख रुपये देकर खरीदने के मामले ने सनसनी फैला दी है। ई-मेल के माध्यम से मिली शिकायत के बाद आसनसोल उत्तर थाना पुलिस ने जांच शुरू की और उत्तर धादका इलाके से एक दंपति के कब्जे से करीब दो महीने 13 दिन के शिशु को बरामद किया।
इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक दंपति और एक कथित मध्यस्थ शामिल है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि मासूम बच्चे को किसके माध्यम से दंपति तक पहुंचाया गया, कथित तौर पर एक लाख रुपये का लेनदेन किस तरह हुआ और इस पूरे मामले में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं।
पुलिस की जांच अब आसनसोल से लेकर बीरभूम के सिउड़ी तक पहुंच गई है।
ई-मेल शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले की शुरुआत ई-मेल के जरिए मिली एक शिकायत से हुई। शिकायत में शिशु को कथित तौर पर पैसे देकर खरीदे जाने की जानकारी दी गई थी।
शिकायत मिलने के बाद आसनसोल उत्तर थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस उत्तर धादका के लाल बंगला इलाके में रहने वाले एक दंपति तक पहुंची। उनके कब्जे से दो महीने 13 दिन के शिशु को बरामद किया गया।
इसके बाद पुलिस ने बच्चे की पहचान, उसके जन्म से जुड़े दस्तावेज और दंपति के साथ उसके संबंधों की जानकारी जुटानी शुरू की।
पहले दंपति ने बच्चे को अपना बताया
जांच के शुरुआती चरण में दंपति ने पुलिस के सामने दावा किया कि बरामद बच्चा उनका जैविक पुत्र है। लेकिन पुलिस की पूछताछ और आगे की जांच में इस दावे को लेकर सवाल खड़े हुए।
जांच में कथित तौर पर यह जानकारी सामने आई कि बच्चा बीरभूम जिले के सिउड़ी स्थित एक निजी नर्सिंग होम से एक लाख रुपये के बदले लिया गया था। पुलिस अब इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेजों और लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बच्चे के जन्म से लेकर दंपति के पास पहुंचने तक की पूरी प्रक्रिया क्या थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
गिरफ्तार दंपति और कथित मध्यस्थ
पुलिस ने मामले में विनोद कुमार गुप्ता और उनकी पत्नी बाबिता गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, दोनों आसनसोल के उत्तर धादका लाल बंगला इलाके के रहने वाले हैं।
विनोद कुमार गुप्ता के बारे में बताया गया है कि वह राज्य सरकार के राशन डीलर हैं। उनकी पत्नी बाबिता गुप्ता भी मामले में आरोपी बनाई गई हैं।
इन दोनों के अलावा अशोक भववलका को भी गिरफ्तार किया गया है। वह धादका रोड का निवासी बताया जा रहा है और पुलिस के अनुसार, मामले में उसकी भूमिका कथित मध्यस्थ के रूप में सामने आई है।
पुलिस अब गिरफ्तार तीनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है।
क्या कानूनी गोद लेने की प्रक्रिया का पालन हुआ?
मामले की जांच में पुलिस का एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या बच्चे को दंपति के पास पहुंचाने के दौरान कानूनी गोद लेने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था।
यदि कोई परिवार किसी बच्चे को कानूनी रूप से गोद लेता है तो उसके लिए निर्धारित नियम और प्रक्रियाएं होती हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस मामले में उन नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं बच्चे के जैविक माता-पिता की जगह दंपति को माता-पिता दिखाकर कोई दस्तावेज तैयार तो नहीं किया गया।
बच्चे की जन्म संबंधी जानकारी, जन्म प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
सिउड़ी के निजी नर्सिंग होम पर भी नजर
मामले की जांच अब सिउड़ी स्थित उस निजी नर्सिंग होम तक पहुंच गई है, जहां से कथित तौर पर बच्चे को लिए जाने की बात सामने आई है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बच्चे का जन्म कहां हुआ, उसके जैविक माता-पिता कौन हैं और नर्सिंग होम में बच्चे से जुड़े कौन-कौन से रिकॉर्ड मौजूद हैं।
इसके अलावा कथित एक लाख रुपये के वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह जानना चाहती है कि रकम किसने दी, किसने ली और भुगतान किस माध्यम से किया गया।
बच्चे को बाल कल्याण समिति के सामने भेजा गया
पुलिस ने बरामद शिशु को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष के समक्ष भेज दिया है। बच्चे की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी संबंधित प्राधिकरण द्वारा सुनिश्चित की जाएगी।
फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता बच्चे की पहचान और उसके जैविक माता-पिता के बारे में सही जानकारी जुटाना है। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जांच के दौरान बच्चे की सुरक्षा और हितों से किसी तरह का समझौता न हो।
मानव तस्करी का कोण भी खंगाल रही पुलिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस केवल कथित अवैध गोद लेने की प्रक्रिया तक जांच सीमित नहीं रख रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं यह मामला बच्चों की खरीद-फरोख्त या मानव तस्करी से जुड़े किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों के अलावा और कौन-कौन लोग इस पूरी प्रक्रिया में शामिल थे। सिउड़ी से आसनसोल तक बच्चे को पहुंचाने में किसने भूमिका निभाई, यह भी जांच का अहम हिस्सा है।
अदालत में पेश होंगे तीनों आरोपी
आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के डीसीपी सेंट्रल ध्रुव दास ने बताया कि तीनों आरोपियों को गुरुवार को आसनसोल अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस अदालत से आरोपियों की हिरासत लेकर मामले की आगे जांच करने की मांग करेगी।
पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान कथित एक लाख रुपये के लेनदेन, बच्चे के जैविक माता-पिता, मध्यस्थों और सिउड़ी के निजी नर्सिंग होम से जुड़े सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे।
फिलहाल मामले में तीन गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, लेकिन जांच अभी शुरुआती चरण में है। बच्चा वास्तव में किसका है, उसे दंपति तक किसने पहुंचाया, कथित एक लाख रुपये का लेनदेन किन लोगों के बीच हुआ और क्या इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है—इन सभी सवालों का जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगा।
आसनसोल में सामने आए इस मामले ने बच्चों की सुरक्षा, कानूनी गोद लेने की प्रक्रिया और नवजातों की कथित खरीद-फरोख्त को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। अब पुलिस की जांच और अदालत में होने वाली कार्रवाई से इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।





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