12 हजार कांस्टेबल भर्ती की मेरिट सूची पर लगा ब्रेक
पश्चिम बंगाल में करीब 12 हजार कांस्टेबल पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर कानूनी पेंच सामने आ गया है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस भर्ती की मेरिट सूची जारी करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। आरोप लगाया गया है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षण से जुड़े नियमों और दिशा-निर्देशों का कथित तौर पर पालन नहीं किया गया।
बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की पीठ ने आगामी 30 सितंबर तक मेरिट सूची जारी करने पर रोक लगाने का निर्देश दिया। इस आदेश के बाद हजारों अभ्यर्थियों की नजर अब अदालत की अगली सुनवाई और सरकार के जवाब पर टिक गई है।
भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और साक्षात्कार की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है। ऐसे में मेरिट सूची जारी होने का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए अदालत का यह आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2024 में निकला था भर्ती का विज्ञापन
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024 में करीब 12 हजार रिक्त कांस्टेबल पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने आवेदन किया और चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया।
इसके बाद नवंबर 2025 में भर्ती परीक्षा आयोजित की गई। लिखित परीक्षा पूरी होने के बाद चयन प्रक्रिया अगले चरण में पहुंची और इस वर्ष जनवरी तथा फरवरी के दौरान अभ्यर्थियों के साक्षात्कार भी पूरे किए गए।
उम्मीदवारों को उम्मीद थी कि परीक्षा और साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द ही अंतिम मेरिट सूची जारी कर दी जाएगी। लेकिन भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण के नियमों को लेकर सामने आई शिकायत ने पूरे मामले को अदालत तक पहुंचा दिया।
अब मेरिट सूची जारी होने पर रोक लगने के कारण भर्ती प्रक्रिया फिलहाल कानूनी जांच के दायरे में आ गई है।
ईडब्ल्यूएस आरक्षण को लेकर याचिका
मामले में याचिकाकर्ता सुदीप्त चक्रवर्ती की ओर से भर्ती प्रक्रिया में ईडब्ल्यूएस आरक्षण से संबंधित दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किए जाने का दावा किया गया है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि कांस्टेबल भर्ती में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए निर्धारित आरक्षण व्यवस्था को लागू करने में नियमों का पालन नहीं हुआ। इसी मुद्दे को आधार बनाकर अदालत में याचिका दायर की गई।
बुधवार को इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की पीठ में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनिंद्य लाहिड़ी और अर्कदेव विश्वास अदालत में उपस्थित थे।
अदालत के सामने आरक्षण संबंधी शिकायत और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवाल रखे गए। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने फिलहाल मेरिट सूची प्रकाशित करने पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया।
30 सितंबर तक जारी नहीं होगी मेरिट सूची
अदालत के आदेश के अनुसार, आगामी 30 सितंबर तक कांस्टेबल भर्ती की मेरिट सूची जारी नहीं की जा सकेगी। इसका मतलब यह है कि चयन प्रक्रिया के अंतिम परिणाम के लिए अभ्यर्थियों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।
हालांकि, अदालत की अंतरिम रोक को भर्ती प्रक्रिया का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। मामले में आगे सुनवाई होगी और संबंधित पक्षों के जवाब तथा दस्तावेजों की जांच के बाद अदालत आगे का निर्णय ले सकती है।
इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मेरिट सूची कब जारी होगी और भर्ती प्रक्रिया अपने निर्धारित चरण तक कब पहुंच पाएगी।
परीक्षा और साक्षात्कार पूरा, फिर भी परिणाम अटका
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भर्ती प्रक्रिया के कई प्रमुख चरण पूरे हो चुके हैं। नवंबर 2025 में परीक्षा आयोजित होने के बाद जनवरी-फरवरी 2026 में साक्षात्कार भी पूरा किया जा चुका है।
ऐसे में अभ्यर्थियों के लिए मेरिट सूची अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक थी। लेकिन आरक्षण को लेकर उठे कानूनी सवाल के कारण अब परिणाम अटक गया है।
हजारों उम्मीदवारों ने इस भर्ती प्रक्रिया के लिए लंबे समय तक तैयारी की है। ऐसे में मेरिट सूची में देरी से अभ्यर्थियों के बीच स्वाभाविक रूप से चिंता बढ़ सकती है। खासकर उन उम्मीदवारों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है जो सरकारी पुलिस सेवा में नियुक्ति की उम्मीद कर रहे हैं।
बंगाल में भर्ती विवाद का पुराना सिलसिला
पश्चिम बंगाल में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर पिछले कुछ वर्षों में कई विवाद सामने आए हैं। शिक्षक और शिक्षाकर्मी भर्ती से लेकर नगरपालिका से जुड़ी नियुक्तियों तक में अनियमितता के आरोपों को लेकर अदालत में मामले पहुंचे हैं।
इनमें से कई मामलों में जांच एजेंसियों की भूमिका भी सामने आई है। भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर न्यायालयों में लंबी कानूनी लड़ाई चली है।
इसी पृष्ठभूमि में कांस्टेबल भर्ती में आरक्षण नियमों के पालन को लेकर उठी शिकायत को भी गंभीरता से देखा जा रहा है। हालांकि, वर्तमान मामले में अदालत ने अभी केवल मेरिट सूची जारी करने पर अंतरिम रोक लगाई है और आरोपों की अंतिम पुष्टि होना बाकी है।
चुनाव से पहले ही शुरू हो गया था कानूनी विवाद
कांस्टेबल भर्ती को लेकर कानूनी जटिलता विधानसभा चुनाव से पहले ही सामने आने की बात कही गई है। इसी बीच राज्य में राजनीतिक सत्ता परिवर्तन भी हुआ।
अब नई सरकार के कार्यकाल में इस भर्ती प्रक्रिया का भविष्य क्या होगा, इसे लेकर भी अभ्यर्थियों और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। अदालत की ओर से सरकार का पक्ष जानने की प्रक्रिया भी मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
सरकार को भर्ती प्रक्रिया और आरक्षण व्यवस्था से जुड़े सवालों पर अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद अदालत आगे की दिशा तय कर सकती है।
अभ्यर्थियों की नजर अगली सुनवाई पर
फिलहाल करीब 12 हजार कांस्टेबल पदों की भर्ती का परिणाम अदालत के आदेश के कारण अटक गया है। अभ्यर्थियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि मेरिट सूची कब जारी होगी और क्या भर्ती प्रक्रिया वर्तमान स्वरूप में आगे बढ़ेगी।
आगामी 30 सितंबर तक मेरिट सूची जारी नहीं की जा सकेगी। इसके बाद अदालत मामले की सुनवाई के दौरान भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार कर सकती है।
आरक्षण नियमों के पालन का सवाल अब इस भर्ती प्रक्रिया के केंद्र में आ गया है। यदि अदालत के समक्ष नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो भर्ती प्रक्रिया पर आगे भी असर पड़ सकता है। वहीं यदि संबंधित पक्ष अपने पक्ष में पर्याप्त दस्तावेज और नियमों के आधार पर स्थिति स्पष्ट कर देते हैं, तो प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता भी खुल सकता है।
फिलहाल हजारों अभ्यर्थियों की निगाहें कलकत्ता हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। 12 हजार कांस्टेबल पदों के लिए परीक्षा और साक्षात्कार पूरा होने के बावजूद मेरिट सूची का इंतजार बढ़ गया है और अब इस भर्ती का अगला कदम अदालत के फैसले पर निर्भर करता दिखाई दे रहा है।





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