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आसनसोल-दुर्गापुर

वेतन खाते में आते ही 10 से 12 हजार रुपये काटने का आरोप, अंडाल डीवीसी गेट पर चालकों का प्रदर्शन

Moutushi · 27 October 2026, 3:19 PM

अंडाल, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़: पश्चिम बर्दवान जिले के अंडाल ताप विद्युत केंद्र के डीवीसी गेट पर मंगलवार को वाहन चालकों ने वेतन कटौती और एक चालक को काम से बैठाने के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी चालकों का दावा है कि उनके बैंक खातों में वेतन जमा होने के बाद वाहन मालिक उनसे 10 से 12 हजार रुपये तक ले लेते हैं। आरोप है कि इस रकम को देने से इनकार करने पर चालक पिंटू मंडल को काम से बैठा दिया गया। हालांकि, वाहन मालिक पक्ष के प्रतिनिधि आशीष पांडे ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। दोनों पक्षों के बीच सामने आए इस विवाद से अंडाल ताप विद्युत केंद्र में काम करने वाले वाहन चालकों के वेतन और रोजगार को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

डीवीसी गेट पर क्यों प्रदर्शन करने पहुंचे चालक?

प्रदर्शनकारी चालकों के अनुसार, अंडाल ताप विद्युत केंद्र में विभिन्न कार्यों के लिए वाहन मालिक संगठन से अनुबंध के आधार पर लगभग 30 से 32 चार पहिया वाहन लिए जाते हैं। इन वाहनों को चलाने वाले चालकों को उनके काम और ग्रेड के अनुसार वेतन दिया जाता है। चालकों का कहना है कि वेतन सीधे उनके बैंक खातों में जमा होता है, लेकिन इसके बाद उन्हें पूरी रकम अपने पास रखने को नहीं मिलती।

चालकों ने आरोप लगाया कि वेतन से कथित तौर पर बड़ी रकम लिए जाने का विरोध करने पर उन पर दबाव बनाया जाता है। इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार को कुछ चालक डीवीसी गेट पर एकत्र हुए और विरोध जताया। उनका कहना है कि यदि वेतन निर्धारित है, तो उन्हें नियमानुसार पूरी रकम मिलनी चाहिए।

हालांकि, प्रदर्शन में शामिल चालकों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वाहन मालिक पक्ष ने भी इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।

22 हजार से 30 हजार रुपये वेतन, फिर भी कटौती का आरोप

चालकों के मुताबिक, काम के ग्रेड के अनुसार किसी का मासिक वेतन 22 हजार रुपये, किसी का 25 हजार रुपये और किसी का 30 हजार रुपये है। उनका आरोप है कि बैंक खाते में वेतन जमा होने के बाद वाहन मालिक प्रत्येक चालक से 10 से 12 हजार रुपये तक ले लेते हैं।

यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो इतनी बड़ी कटौती से चालकों के हाथ में बचने वाली मासिक रकम काफी कम हो सकती है। परिवार का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, घर का किराया, भोजन और अन्य जरूरी जरूरतें पूरी करने वाले कर्मचारियों के लिए इसका सीधा असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।

प्रदर्शनकारी चालकों का कहना है कि वे अपने काम के बदले निर्धारित वेतन पाने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि वेतन से कथित कटौती के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि कथित रकम किस आधार पर ली जाती है, इसके लिए कोई लिखित समझौता है या नहीं और संबंधित भुगतान का पूरा रिकॉर्ड क्या है।

पिंटू मंडल को काम से बैठाने का आरोप

इस पूरे विवाद में पिंटू मंडल का मामला प्रमुखता से सामने आया है। प्रदर्शनकारी चालकों का आरोप है कि वेतन से पैसे लेने का विरोध करने के कारण उन्हें हाल ही में काम से बैठा दिया गया। चालकों ने यह भी दावा किया कि उनकी जगह किसी दूसरे चालक को काम पर रखा गया है।

चालकों का कहना है कि यदि कोई कर्मचारी वेतन से संबंधित सवाल उठाता है, तो उसके रोजगार पर संकट नहीं आना चाहिए। इसी आरोप के विरोध में मंगलवार को प्रदर्शन किया गया। चालकों के अनुसार, उन्होंने इस मामले की जानकारी स्थानीय विधायक को भी दी है।

हालांकि, पिंटू मंडल को किस आधार पर काम से बैठाया गया, इस संबंध में वाहन मालिक पक्ष की ओर से अलग-अलग तथ्य सामने नहीं आए हैं। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि काम से हटाने की कार्रवाई हुई भी है या नहीं और यदि हुई है, तो उसका आधिकारिक कारण क्या बताया गया है।

वाहन मालिक पक्ष ने आरोपों को बताया निराधार

दूसरी ओर, वाहन मालिक पक्ष के प्रतिनिधि आशीष पांडे ने चालकों द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह गलत और निराधार बताया है। उनका कहना है कि प्रत्येक चालक को सरकारी नियमों के अनुसार निर्धारित समय पर वेतन दिया जाता है।

इस तरह मामले में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। एक तरफ चालक वेतन से बड़ी रकम लिए जाने और विरोध करने पर काम से बैठाने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं वाहन मालिक पक्ष इन आरोपों को खारिज कर रहा है।

ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए वेतन पर्ची, बैंक खाते में जमा रकम, कथित भुगतान या कटौती से संबंधित दस्तावेजों और काम से जुड़ी शर्तों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी भी पक्ष के आरोप को अंतिम रूप से सही या गलत नहीं माना जा सकता।

वेतन और रोजगार को लेकर उठे सवाल

अंडाल डीवीसी गेट पर हुए प्रदर्शन ने अनुबंध के आधार पर काम करने वाले वाहन चालकों की स्थिति को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। ऐसे मामलों में वेतन की पारदर्शिता, भुगतान का रिकॉर्ड और रोजगार से जुड़ी शर्तें महत्वपूर्ण होती हैं। यदि किसी कर्मचारी के वेतन से कोई रकम काटी जाती है, तो उसका आधार और संबंधित नियम स्पष्ट होना जरूरी है।

चालकों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच होने पर यह पता लगाया जा सकता है कि वेतन से कथित कटौती की जा रही है या नहीं और पिंटू मंडल को काम से बैठाने के पीछे क्या कारण है। वहीं, वाहन मालिक पक्ष को भी अपने दावे के समर्थन में भुगतान संबंधी रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का अवसर मिल सकता है।

फिलहाल, अंडाल ताप विद्युत केंद्र के डीवीसी गेट पर प्रदर्शन के बाद मामला चर्चा में है। चालकों के आरोप और वाहन मालिक पक्ष के इनकार के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित पक्षों या प्रशासन की ओर से कोई जांच अथवा औपचारिक कदम उठाया जाता है या नहीं।

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