कोलकाता/पश्चिम बंगाल: 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की सियासत में हलचल तेज हो गई है। इसी बीच अभिषेक बनर्जी का एक बयान राजनीतिक गलियारों में ‘वोकल टॉनिक’ के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह चर्चा छेड़ दी है।
🗣️ “इगो छोड़ो, आखिरी 7 दिन काम करो”
सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार रात हुई तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक बैठक में अभिषेक बनर्जी ने हजारों नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए साफ संदेश दिया—
👉 “इगो छोड़कर काम करें, तभी सीट और वोट दोनों बढ़ेंगे।”
उन्होंने खास तौर पर पहले चरण के मतदान से पहले बचे अंतिम 7 दिनों को बेहद अहम बताया और कहा कि व्यक्तिगत मतभेद भुलाकर पार्टी के लिए काम करना जरूरी है।
⚠️ क्या TMC में सब कुछ ठीक नहीं?
अभिषेक के इस बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या पार्टी के अंदर सब कुछ सामान्य नहीं है?
सूत्रों की मानें तो—
- कई जिलों में नेताओं के बीच मतभेद जारी हैं
- बीरभूम में हाल ही में अनुव्रत मंडल और काजल शेख के बीच मंच पर ही विवाद सामने आया था
👉 ऐसे में ‘इगो छोड़ने’ की अपील को पार्टी के अंदरूनी हालात से जोड़कर देखा जा रहा है।
🏛️ केंद्रीय एजेंसियों पर बड़ा हमला
बैठक के दौरान अभिषेक बनर्जी ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) समेत अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया—
👉 “बीजेपी हार का अंदेशा होते ही पश्चिम बंगाल में केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है।”
साथ ही, उनकी और उनकी पत्नी की गाड़ी की तलाशी को लेकर निर्वाचन आयोग के निर्देशों पर भी उन्होंने आपत्ति जताई और कानूनी कदम उठाने के संकेत दिए।
🎯 बीजेपी और कांग्रेस पर तीखा प्रहार
सूत्रों के अनुसार, अभिषेक बनर्जी ने बिना नाम लिए अमित शाह पर निशाना साधते हुए कड़ी टिप्पणी की।
इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस पर भी हमला बोलते हुए कहा—
👉 “कांग्रेस को वोट देना मतलब बीजेपी को वोट देना।”
उन्होंने खासकर मालदा और मुर्शिदाबाद के नेताओं को इस संदेश को जनता तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
🗳️ चुनाव से पहले ‘वोकल टॉनिक’ क्यों?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि—
- चुनाव के अंतिम चरण में कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए यह बयान दिया गया
- अंदरूनी मतभेदों को कम करने की कोशिश भी हो सकती है
- साथ ही विपक्ष पर आक्रामक रणनीति अपनाने का संकेत भी है
📢 क्या बदलेगा चुनावी समीकरण?
👉 अभिषेक बनर्जी का यह बयान TMC के चुनावी अभियान को नई दिशा दे सकता है
👉 पार्टी कार्यकर्ताओं में एकजुटता लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है
👉 वहीं विपक्ष इसे TMC की कमजोरी के रूप में पेश कर सकता है
🔍 अंतिम बात:
पश्चिम बंगाल की राजनीति में अभिषेक बनर्जी का यह ‘इगो छोड़ो’ मंत्र अब चर्चा का केंद्र बन चुका है।
👉 अब देखना यह होगा कि क्या यह ‘वोकल टॉनिक’ वाकई चुनावी मैदान में असर दिखाता है या फिर यह बयान सिर्फ सियासी बहस तक ही सीमित रह जाता है।














